Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, June 3
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    जिनके असीम धैर्य के आगे पृथ्वी भी नतमस्तक थी!

    By October 16, 2018Updated:October 17, 2018 Current Issues 1 Comment9 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 615
    राहुल कुमार गुप्त

    भारतीय इतिहास का हीरक अध्याय: एक महान कार्य जो इतिहास बनने जा रहा था उस पर कई अवरोध उत्पन्न होना तो लाजिमी था। क्योंकि इतिहास बिना अवरोधों के तैयार नहीं होता। महान और श्रद्धेय कार्यों में ही आलोचनाएं पलती और पोषती हैं। विरोधियों और आलोचकों को बुझते हुए दीपक को मिले घी जैसा कार्य करती हैं। राम को ही यदि वनवास न होता, सीधे-सीधे अयोध्या का राज मिल जाता, मंथरा व कैकेयी राम के सिंहासनारोहण में अवरोध उत्पन्न न करते तो भला इतिहास की सर्वप्रसिद्ध कृति रामायण का भी उदय न होता।

    भारतीय समाज में हजारों साल से दले गये मानवों, जिन्होंने समाज को बहुत कुछ देकर बदले में दुत्कार व घृणा के अलावा कुछ नहीं पाया था, लखनऊ में मायावती जी द्वारा पार्कों का निर्माण इन्हीं लोगों के सम्मान देने का एेतिहासिक प्रतीक था।
    मायावती ने हजारों साल के जड़वत इतिहास को बदलकर एक नये इतिहास की नींव रखी है। हजारों-हजारों साल से इस वेदभूमि में मानवता को घृणित करने वाली घटनाएं जो निरंतर द्रुत वेग से होती चली आ रही थीं, उन पर लगाम कसा है। एक आश्चर्यजनक विराम! जिससे मानवता को सही आयाम मिला। एेसा केवल दैवीय शक्ति ही कर सकती है। पूरे भारत में दलितों की सामाजिक स्थित में व्यवहारिक रूप से जो सर्वाधिक सुधार हुआ है वह उत्तर प्रदेश।
    Image result for shudra
    उत्त्तर वैदिक काल से लेकर आज तक एक वर्ग ने मानव होने का जो पाप सहा है, उससे मानवता तो शर्मसार हुई ही है, ईश्वर भी अपनी सबसे नायाब कृति से लज्जित जरूर हुआ होगा। समय-समय पर इस अन्याय की चरम सीमा को कम करने के लिये कई महापुरुष भी अवतरित हुए। पर प्रत्यक्ष रूप से सब व्यर्थ ही रहा क्योंकि कुरीतियां ज्यादा प्रभावी रहीं। किंतु एक अंतिम व शक्तिशाली अवतार देवी के रूप में इस सदी को इस प्रदेश को मिला जिसने हजारों साल से प्रभावी रही कुरीतियों का दमन किया। महिषासुर व शुम्भ-निशुम्भ जैसे शक्तिशाली इन कुरीतियों का दमन तो देवी रूप में ही हो सकता था।
    ‘मानवता की जिसने रखी लाज है।
    वही तो कहलाता दैवीय अवतार है।।’
    धन्य है! उत्तर प्रदेश। जिसने कई अवतारों को अवतरित किया। किंतु कोटि-कोटि नमन उस अवतार को जिसने मानवता की उचित रूप से लाज रखी। हजारों साल से चली आ रही विषमता की खाई को पाट दिया। उन असहाय, अछूत पीडि़त वर्ग को व्यवहारिक रूप से मानव जीवन जीने का न्याय दिया, अधिकार दिया। आने वाले कल में यह महान कार्य इतिहास में स्वर्ण अध्याय नहीं हीरक अध्याय कहलायेगा।
    ‘बहुत कड़ुआ रहा भारतीय इतिहास है।
    दूसरे तो कम अपनों ने ज्यादा सितम ढायें हैं।।’
    लिखित रूप से तो समानता का अधिकार हमारे संविधान ने जब से बना तब से दे रखा है। किंतु समाज को मूलभूत खुशियां प्रदान करने वाले इस दलित वर्ग को प्रदेश में आज से दो दशक पहले तक वही पुरानी कुरीतियां, मानवता को घृणित करने वाले अछूत शब्द  से बार-बार मानव होने का पाप सहना पड़ता था।
    ‘मानव जैसे थे पर मानव से वो न थे।
    घर में बंधे पशुओं की हालत ही बेहतर थी।।’
    मानवता की देवी ने वेदों की इस पवित्र भूमि पर लगे कलंक का सफाया कर दिया। अपने राज्य को ये सौभाग्य मिला कि दो ध्रुवों को जिसे आज तक कोई भी अवतार या महापुरुष न मिला सका उसे मानवता की देवी ने मिलाया ही नहीं वरन् एक थाल में खाना व एक साथ रहना सिखा दिया। किंतु आज भी देश के अन्य प्रदेशों में मानवता पर लगा कलंक व्यवहारिक रूप से मौजूद है।
    भले ही राजनीतिक विरोधी उन्हें दौलत की बेटी से सम्बोधित करते हो भले ही उनका व्यक्तिगत जीवन कैसा हो। पर जो कार्य किसी अवतार व महापुरुष नहीं कर सके उसे व्यवहारिक रूप प्रदान करना बहुत ही महान व श्रद्धेय कार्य है।
    भारतीय इतिहास पर लगा मानवता के कलंक का सफाया इस भारतीय समाज के लिये बहुत ही बड़ी खुशी की बात है। भले ही इसका व्यवहारिक रूप अभी केवल उत्तर प्रदेश में देखने को मिलता हो लेकिन यह बयार पूरे देश में जल्द ही बहेगी।
    निष्पक्षता को ताक में न रखकर यदि इस विषय को सामने रखकर देखा जाये तो वाकई में ये कोई साधारण शक्ति नहीं वरन सहस्त्राब्दियों के तिरस्कार व आंसुओं से बनी शक्ति है।
    वो केवल दलितों की देवी ही नहीं पूरे भारतीय समाज के लिये मानवता की देवी है। जिसने भारत भूमि में मानवता को सही आयाम दिया है।
    दो दशक से पहले का वक्त मानसिक पटल पर एक बड़ी भयावह स्थिति को दर्शाता है। एेसी ही स्थिति का सजीव चित्रण तो महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र ने अपनी लेखनी में कर के तत्कालीन समाज की वस्तु स्थिति को दर्शाया है। जिसे पढक़र एक वर्ग को अपने आप दया व उच्च वर्ग के खिलाफ क्रोध का भाव उपज आता है। हजारों साल से चले आ रहे अन्याय पूर्ण समाज में जब आज न्याय का वातावरण तैयार हुआ तो उसका श्रेय लेने के लिये कई लोग दिखावा करने से भी नहीं चूक रहे। लेकिन इतिहास तो उनका बनता है जो समाज को कुछ देकर जाते हैं। प्रोपोगंडा करने वाले व अकर्ताओं का इतिहास नहीं बनता। आज दलित वर्ग में थोड़ा सुधार आया तो कुछ रुढि़वादियों को ये सकरात्मक रवैया रास नहीं आ रहा।
    प्रथम विधि निर्माता मनु ने व उस समय के ऋषि-मुनियों ने मानवाधिकारों का जो सरासर लिखित व व्यवहारिक रूप से उल्लंघन किया था उसके लिये उन्हें यश नहीं अपयश मिलना चाहिये था। भले ही कई महान उपलब्ध्यिां इन ऋषियों ने समाज को दी हो किंतु एक अभागा वर्ग जो समाज को सबकुछ देकर अपने शरीर व आत्मा का दान देकर समाज की प्रताडऩाआें व पशुओं से ज्यादा क्रूरतम घटनाओं का जो शिकार हुआ है, एेसी स्थिति में इन ऋषि-मुनियों की सभी महानताएं क्षुद्र ही प्रतीत होती हैं।
    बाल्मिकि जैसे दलित ऋषि भी हुए हैं, जिनकी पूजा भी ऋषि-महात्माओं जैसे ही होती थी, होती है। लेकिन इतना होते हुए दलित वर्ग को ये भी समाज में कोई सम्मानजनक स्थान दिलाने में नाकाम रहे। समय-समय पर इनके उत्थान के लिये मसीहा भी अवतरित हुए। जिससे इन दबे-कुचले लोगों के बीच जीने की एक आस बनी रही। तथागत बुद्ध ने आध्यात्मिक ज्ञान दिया, वेदों की कुरीतियों से दबी इन दलितों की आत्मा को बोझ मुक्त कराने सम्बंधी अनेकों तर्कपूर्ण ज्ञान दिया। मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद शुंग काल(ब्राह्मण काल) में बौद्धवादिता में जबरन कमी लायी गयी और मनुवादिता को पुन: बढ़ावा मिला। जो लगभग दो दशक पहले तक उत्तर प्रदेश में व वर्तमान समय तक देश के अन्य प्रदेशों में लगभग उसी रूप में मौजूद है।
    Related image
    भारतीय स्वतंत्रता काल के दौरान दलितों के उत्थान के लिये कई महापुरुषों (विशेषकर बाबा भीमराव साहब अम्बेडकर)ने महान कार्य भी किये जिसके परिणामों के तहत इन्हें संविधान में बराबरी का दर्जा तो मिल गया किंतु उनकी स्थिति में कोई आमूल-चूल परिवर्तन नहीं आया। समाज में सबको बराबरी का, मानव को मानव होने का इन्होंने रास्ता दिया सैद्धांतिक रूप दिया। जिसे व्यवहारिक रूप यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दिया।
      श्री रामचंद्र जी ने समुद्र से रास्ता मांगने के लिये तीन दिन तक ही अनुनय-विनय की उसके बाद समुद्र सोखने के लिये उन्हें अस्त्र उठाना पड़ा जिस पर समुद्र ने उन्हें रास्ता दिखाया। इस पर तुलसीदास जी ने लिखा कि बिना भय के प्रीति नहीं होती।
    दलितों के उत्थान के लिये अभी तक के सभी महापुरुषों के कार्य विनय व आग्रह पर ही आधारित थे। यह विनय व आग्रह हजारों साल से चला आ रहा है पर समुद्र रूपी समाज पर इसका असर कहां पडऩे वाला था। शासन का भय सभी को रहता है वो चाहे राजतंत्र में हो या लोकतंत्र में! शक्ति व मानवता के इस नये अवतार ने श्रीराम की तरह कार्य किया। जिससे समुद्र रूपी इस समाज को अपनी गलती का एहसास हुआ। कहते हैं पृथ्वी जैसी सहनशीलता किसी में नहीं है पर पृथ्वी भी समय-समय पर आक्रोशित होती रहती है। कभी भूकम्प के रूप में तो कभी ज्वालामुखी, बाढ़, तूफान आदि के रूप में।
    किंतु मानव समाज के इस पृथ्वी से ज्यादा सहनशील वर्ग ने बिना आक्रोशित हुए हजारों साल से सब कुछ सहा है और तो और अपने उसी धर्म को संजोए रखा जिसने उसे लाखों दु:ख दर्द दिये। धन्य है! ये दलित वर्ग! धन्य है! उनका असीम धैर्य और साहस।
    लखनऊ में मायावती द्वारा पार्क निर्माण इतिहास के अधूरे आयाम को पूरा कर रहा था। जो कि उन धन्यात्माओं की स्मृति के लिये बहुत ही जरूरी है। खुद की मूर्ति को लोकापर्ण दलित वर्ग की आकांक्षाओं की पूर्ति थी। किंतु राजनीतिक विरोधियों ने इसे मुद्दा बनाकर  तत्कालीन सरकार को ‘पत्थरों की सरकार’ की उपमा दे डाली।
    Related image
    ढ़ोंगी बाबाओं को ईश्वर मानकर इनकी तस्वीर व मूर्ति बना पूजने वाले करोड़ों में हैं। जबकि इन बाबाओं ने शायद ही कोई सामाजिक क्रांति लायी हो। केवल धन व एेश्वर्य भोगियों को स्वादू न कह साधू कह पूजा करने वालों की कमी नहीं है। पर जो वास्तव में पूजने योग्य है जो वास्तव में भारत में सहस्त्राब्दियों से लगे मानवता के कलंक को दूर करने में सहायक हुईं और समर्थ हैं। उसे राजनीतिक द्वेषवश बहुत कुछ सुनना व सहना पड़ रहा है। धार्मिक चोले में न होकर भी राजनीति के दलदल में कमल जैसे खिलकर समाज को सुगंधित किया है। आश्वासन रूपी लोभ तो अन्य राजनीतिक व धार्मिक लोग देकर अपना उल्लू सीधा करते आये हैं। पर धन्य है यह वर्तमान सदी जिसने हजारों साल से चले आ रहे अन्याय के खात्मे का आगाज किया है। हीरों से जडि़त एक नये इतिहास का सूत्रपात किया है। जिसकी चमक ने समाज के सभी वर्गों को समेकित किया है। यह सदी वास्तव में भारतीय इतिहास का हीरक अध्याय होना चाहिए।
    वंशवाद व जातिवाद से परे जमीन से जुड़े लोगों का साथ ले एक नई विचारधारा भी इस शक्तिपुंज ने देश को दिया है। अन्य राजनीतिक दल भी ये आदर्श रूप आत्मसात कर लें तो शायद देश से अमीरी-गरीबी की खाई भी भविष्य में पाटी जा सकती है।
    अंत में यह स्पष्टीकरण होना जरूरी है, ये आंकड़ों व राजनीतिकरण से सम्बंधित लेख नहीं है। वरन् ये केवल सामाजिक परिवर्तन के भाव से उपजे अंत:मन के विचार हैं जो शायद प्रत्येक बुद्धिजीवी व समाजसेवियों के मन के ही विचार होंगे। मैंने बचपन में अपने दलित दोस्तों के साथ भेदभाव व उन पर होते अत्याचार देखा है। उस समय मन में एक टीस सी उठती पर असहाय था। उन्हें प्यार व स्नेह के अलावा कुछ नहीं दे सकता था। किंतु आज मेरा ये लेख उनके साथ हुए सामाजिक न्याय व उनको मिली खुशी के लिये समर्पित है।

    Keep Reading

    योगी का जन्मदिन “महिलाओं का सुरक्षा दिवस”

    आज हर कोई अवसाद से ग्रस्त और भय से व्याप्त क्यों?

    The Cruelty of Bureaucracy: A Citizen Driven to the Brink of Self-Immolation Over ₹52,900

    अफसरतंत्र की क्रूरता: ₹52,900 के लिए आत्मदाह की कगार पर एक नागरिक

    Meerut's Raj-Rajeshwari

    राजराजेश्वरी मन्दिर की शंकराचार्य ने की थी प्राण-प्रतिष्ठा

    The First Virtual Party: CJP, Politics, and Conspiracy

    पहली आभासी पार्टी सीजेपी, सियासत और साजिश

    Serving one's elders is nothing short of a blessing.

    अपने बुजुर्गों की सेवा किसी वरदान से कम नहीं

    View 1 Comment

    1 Comment

    1. what is an amazon add-on item on July 18, 2019 8:30 pm

      Great article.

      Reply
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Trump’s ‘Fool’ Remark Goes Viral! Even Americans Who Oppose War Dubbed ‘Fools’

    ट्रंप भारी उलझन में: MAGA का भविष्य कौन संभालेगा, वेंस पर शक या रूबियो को मौका?

    June 3, 2026
    Sunil Gavaskar brought time to a standstill, as the heartbeats of 850 children became the rhythm of celebration.

    सुनील गावस्कर ने रोका समय, 850 बच्चों के दिलों की धड़कन बनी जश्न की लय‘

    June 3, 2026

    योगी का जन्मदिन “महिलाओं का सुरक्षा दिवस”

    June 3, 2026
    Mahakavi Bhushan's ancestral village to become a hub of the shared culture of UP and Maharashtra: DM

    उप्र व महाराष्ट्र की साझा संस्कृति का केंद्र बनेगा महाकवि भूषण का पैतृक गांव : डीएम

    June 3, 2026

    आज हर कोई अवसाद से ग्रस्त और भय से व्याप्त क्यों?

    June 3, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading