Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, April 12
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»इंडिया

    मधुर हो रीति, नीति, प्रीति व प्रकृति

    By May 20, 2019 इंडिया No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 514
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    संस्कृत भाषा का साहित्य विश्व में सर्वाधिक समृद्ध है। इसमें मानवीय जीवन के सभी विषय समाहित है। ये सभी आज भी प्रासंगिक है, लेकिन इन्हें समझने के लिए व्यापक दृष्टिकोण होना चाहिए। संस्कृत वांग्मय को  समाजशास्त्र , राजनीतिशास्त्र व विज्ञान से जोड़ कर पढ़ने व पढ़ाने की आवश्यकता है। इसके माध्यम से विश्व की अनेक ज्वलंत समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। मानव जीवन ही नहीं प्रकृति व पर्यावरण के कष्टों  का निवारण किया जा सकता है।इससे मधु अभिलाषा फलीभूत होगी, जिसका उल्लेख वेदों में हुआ है।
    देश के प्रतिष्ठित लेखक, प्राचीन भारतीय वांग्मय के मनीषी और वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ऐसे प्रसंग उठाते रहे है।
    प्राचीन सूक्तियों से वह वर्तमान की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते है। उनकी ऐसी हो दो पुस्तको मधु अभिलाषा और हिन्द स्वराज का पुनर्पाठ का उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने लखनऊ में विमोचन किया। हृदयनारायण दीक्षित ने इन पुस्तकों के लेखन की प्रेरणा के विषय में तर्कसंगत बिंदु रखे। उनके अनुसार हमारे ऋषियों ने अपने विचार किसी पर थोपे नहीं। दुनिया के अन्य देश जब  दर्शन विज्ञान से दूर थे, वहां सभ्यता का विकास नहीं हुआ था,  उसके हजारों वर्ष पहले हमारे अरण्य सत्य की खोज के स्थल थे। केवल दर्शन ही नहीं विज्ञान के आविष्कार भी यहीं हुए।
    ऋग्वेद में मधु शब्द आया है। पहले मधु विद्या को तंत्र माना जाता था। लेकिन ऐसा नहीं था। अनेक विद्वानों ने इसकी व्याख्या की। मधु विद्या गहरा व व्यापक विषय है।  जल, वायु, जबको मधुर माना गया। हमारा कर्म, बोलना, सुनना, चलना, सब मधुमय हो। यही भावना पूरी मानवता को मधुर बना देती है।
    प्रति, रीति, मन सब मधुर हो।
    संवैधानिक संस्थाए मधुर हो। इस तरह ब्रह्मांड मधुर हो जाता है। सबके हृदय एक साथ मधुर हों। यही मधु अभिलाषा है। हृदयनारायण दीक्षित ने बताया कि वह विद्यार्थी काल से ही गांधी जी के चित्र बड़े ध्यान से देखते थे, लगातार गांधी जी को पढ़ते थे। गांधी जी ने मर्यादा, सार्वजनिक जीवन की जो रेखा खींची, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है।
     प्रजातंत्र की उनकी कल्पना थी। वह भारतीय संस्कृति के प्रति आग्रह रखते थे। अंग्रेजो के आने से भारत राष्ट्र नहीं बना। उनके आने से हम ज्ञानी नहीं हुए। उनके उसने से हमारी संस्कृति को नुकसान हुआ। भारत विश्व का प्राचीनतम राष्ट्र है। यूरोप में तेरहवीं  शताब्दी में नेशन का विचार आया। भारत में ईशा के पांच हजार पहले राष्ट्र का स्पष्ट विचार है। वेदों में अनेक बार राष्ट्र शब्द का प्रयोग किया गया।
    गांधी जी यही मानते थे। उन्होंने लिखा था कि यूरोप का इतिहास अराजकता से भरा है। इसीलिए गांधी जी ने ब्रिटिश संसद को वैश्या कहा था। वहां के महिला संगठनों ने यह शब्द वापस लेने को कहा था। गांधी जी ने इससे इनकार कर दिया। यह कहा कि ब्रिटिश संसद में कुछ लोग हल्ला करते है, कुछ लोग सोते रहते है। जाहिर है कि गांधी जी अलग ढंग की व्यवस्था चाहते थे।
    मधु अभिलाषा’ और ‘हिंद स्वराज्य का पुनर्पाठ का विमोचन समारोह भी विद्वतापूर्ण था। राज्यपाल राम नाईक के अलावा विशिष्ट अतिथि  इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री शबीहुल हसनैन, कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं ‘राष्ट्रधर्म’ मासिक के संपादक प्रो ओम प्रकाश पाण्डेय, विधान सभा प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे, अनामिका प्रकाशन के प्रमुख विनोद कुमार शुक्ल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। यह संख्या देखकर संचालक लखनऊ दूरदर्शन के आत्म प्रकाश मिश्रा ने दिलचस्प सलाह दी। उन्होंने कहा कि हृदयनारायण दीक्षित की अगली पुस्तक का विमोचन किसी बड़े मैदान में होना चाहिए।
    राज्यपाल ने कहा कि विधान सभा अध्यक्ष  हृदय नारायण दीक्षित की पुस्तक ‘मधु अभिलाषा’ और ‘हिंद स्वराज्य का पुनर्पाठ’ वास्तव में समाज को दृष्टि देने वाली सामयिक एवं प्रासंगिक पुस्तक है। गीता, रामायण, कुरान, बाइबिल व अन्य पुस्तकोें के बारे में अनेक लोगों ने लिखा है, पर हर लेखक के लिखने के बाद नई नई बातें समाने आती हैं उसी प्रकार श्री दीक्षित द्वारा रचित पुस्तकों में बड़े सहज व सरल ढ़ग से नई बातें सामने आती हैं, यही उनकी विशेषता है।
    उन्होंने कहा कि श्री दीक्षित का लेखन सरल होता है पर विषय गंभीर होते हैं तथा वे सन्दर्भ भी बड़े प्रमाणिक ढ़ग से प्रस्तुत करते हैं।  हृदय नारायण की अब तक अठ्ठाइस पुस्तकें व पांच हजार लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी लेखनी से ईष्र्या होती है क्योंकि उनकी कलम बड़ी विनम्रता और सहजता से चलती है। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अब तक केवल अपने संस्मरण पर आधारित पुस्तक चरैवेति चरैवेति का संकलन किया है तथा इस बात को भंली भांति समझते हैं कि पुस्तक प्रकाशित करने में कितनी पीड़ा होती है।
    श्री दीक्षित ने एक समय में अपनी जुड़वां पुस्तकों का प्रकाशन किया। पूरा देश महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती मना रहा है ऐसे में श्री दीक्षित की पुस्तक के माध्यम से गांधी जी के विचारों को जानने और समझने का अवसर मिलेगा।
    उन्होंने कहा कि श्री दीक्षित ने वास्तव में समाज को एक अद्भुत विचार-धन दिया है। राज्यपाल ने कहा यह सुखद संयोग है कि आज शंकराचार्य का जन्मदिन है और कल नारद जी की जयंती है। श्री दीक्षित उन्नाव से आते हैं, जो साहित्यकारों, क्रांतिकारियों और विद्वानों की धरती है। बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक श्री दीक्षित से उनका परिचय काफी पुराना है। दोंनो एक ही राजनैतिक दल से आते हैं, फर्क इतना है कि वे पार्टी से त्यागपत्र देकर आये हैं और श्री दीक्षित पार्टी से जुड़े हैं। वे एक अच्छे लेखक, प्रखर वक्ता और योग्य पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि श्री दीक्षित विधान सभा अध्यक्ष के नाते सदन का बेहतरीन संचालन करते हैं।
    न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन ने पुस्तक ‘मधु अभिलाषा’ पर चर्चा करते हुए कहा कि श्री दीक्षित ने प्रस्तावना में अद्भुत बातें लिखी हैं, जो विचार करने पर मजबूर करती हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक से पूरा समाज लाभान्वित होगा।
    विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित ने अपनी पुस्तकोें पर संक्षिप्त चर्चा की। अध्यक्षता कर रहे ‘राष्ट्रधर्म’ के संपादक श्री ओम प्रकाश पाण्डेय ने भी पुस्तक पर अपने विचार रखे। प्रमुख सचिव विधान सभा श्री प्रदीप दुबे ने पुस्तकों का परिचय दिया। इस अवसर पर उनके द्वारा निर्मित श्री दीक्षित के जीवन पर आधारित एक लघु वृत्त चित्र भी प्रस्तुत की गयी।
     हिन्द स्वराज की रचना महात्मा गांधी ने मुम्बई  से अफ्रीका की यात्रा के दौरान समुद्री जहाज में कई थी। गोपाल कृष्ण गोखले ने  कहा था कि एक दिन  गांधी जी स्वयं इस किताब को फाड़ देंगे। लेकिन गांधी जी ने पुस्तक लिखने के कई वर्ष बाद गांधी जी ने कहा था कि मै हिन्द स्वराज के एक एक शब्द से आज भी सहमत हूँ। जबकि गांधी जी गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। हृदयनारायण दीक्षित ने लिखा कि भारत मे प्राचीन काल से था। लेकिन यह योरोपीय ढंग का नहीं था।
    गांधी जी कहते थे कि योरिपिय इतिहास में तो राजाओं की विलासिता, छल कपट, हिंसा, षड्यंत्र का चित्रण है। भारत में ऐसे इतिहास लेखन को महत्व नहीं दिया। मधु  अभिलाषा में भारतीय संस्कृति की विराटता के दर्शन होते है। ऋग्वेद में लोकमंगल की भावना है। प्रत्येक व्यक्ति पूर्ण है। पूर्णता से पूर्ण हटाओ तो पूर्ण ही बचता है। राम असंभव का संभव है। ऋग्वेद के ऋषियों ने कभी कोई निर्देश नहीं दिया। कोई सीमारेखा नहीं बताई। कोई बाड़ा नहीं बनाया। यह नहीं कहा कि उनकी बात ही अंतिम है। सत्य अनन्त है, हरिकथा अनन्त कही भी गई। व्यक्ति में जिज्ञाषा होनी चाहिए। प्रश्नों के लिए आतुरता होनी चाहिए।
    हृदयनारायण दीक्षित स्वयं दिलचस्प प्रश्न करते है। वह लिखते है कि बाल रंग लूं ,तो क्या सत्तर की उम्र  से पचास का लगूंगा। यदि पचास का लगूँगा तब भी क्या फर्क पड़ेगा। जितने बाल बचे  है उन्हें ही बचना मुश्किल है। इसलिए बालों को भी नमस्कार करते है। अपने लेखन में आये मैं शब्द का भी विश्लेषण करते है।  मैं शब्द व्यक्तिवादी नही है, उसमें सभी जिज्ञाषा वाले लोग शामिल है। वह भी शामिल है जो व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है, वह शामिल है जो नई व्यवस्था चाहते है। वह व्यवस्था जो सभी के लिए मधुमय हो। विचारों की सोपान व्यवस्था भी चलती है। महात्मा गांधी ने उन्नीस सौ नौ में हिन्द स्वराज लिखी। हृदय नारायण दीक्षित ने अगला सोपान लिखा। वह गांधी दर्शन पर चलते है, विश्वास करते है। इसलिए यह सोपान सार्थक हुआ। गांधी जी भी मधु अभिलाषा की कामना करते थे। यह सोपान चलता भी रहता है। समाज और मानवता के लिए यह श्रेयस्कर भी है

    Keep Reading

    Mathura: Boat capsizes in Yamuna; 10 pilgrims from Punjab dead, 5 still missing.

    वृंदावन यमुना नाव हादसा: लापरवाही की एक और कीमत

    Nature's unparalleled treasure trove in the Govardhana Forest Range of the Valmiki Tiger Reserve.

    वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गोवर्धना फॉरेस्ट रेंज में प्रकृति का अनुपम खजाना

    Rajnath Singh inaugurated several development projects in Lucknow, including the Lakshman Mandapam, which was constructed at a cost of ₹13 crore.

    राजनाथ सिंह ने लखनऊ में 13 करोड़ की लागत से बने लक्ष्मण मण्डपम् सहित कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया

    Mathura: Boat capsizes in Yamuna; 10 pilgrims from Punjab dead, 5 still missing.

    मथुरा: यमुना में नाव पलटी, पंजाब के 10 श्रद्धालुओं की मौत; 5 अभी लापता

    Mahatma Jyotirao Phule: India's Divine Guiding Light

    महात्मा ज्योतिराव फुले: भारत के दिव्य पथ-प्रदर्शक

    नेपाल नवजागरण की खुशबू फैल रही दूर देशों में!

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Mathura: Boat capsizes in Yamuna; 10 pilgrims from Punjab dead, 5 still missing.

    वृंदावन यमुना नाव हादसा: लापरवाही की एक और कीमत

    April 11, 2026
    Nature's unparalleled treasure trove in the Govardhana Forest Range of the Valmiki Tiger Reserve.

    वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गोवर्धना फॉरेस्ट रेंज में प्रकृति का अनुपम खजाना

    April 11, 2026
    Rajnath Singh inaugurated several development projects in Lucknow, including the Lakshman Mandapam, which was constructed at a cost of ₹13 crore.

    राजनाथ सिंह ने लखनऊ में 13 करोड़ की लागत से बने लक्ष्मण मण्डपम् सहित कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया

    April 11, 2026
    Mathura: Boat capsizes in Yamuna; 10 pilgrims from Punjab dead, 5 still missing.

    मथुरा: यमुना में नाव पलटी, पंजाब के 10 श्रद्धालुओं की मौत; 5 अभी लापता

    April 11, 2026
    Mahatma Jyotirao Phule: India's Divine Guiding Light

    महात्मा ज्योतिराव फुले: भारत के दिव्य पथ-प्रदर्शक

    April 11, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading