सुशासन के संदर्भ तक चौकीदार शब्द

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
चौकीदार को चोर बताना राहुल गांधी को अब भारी पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी ने इसे सुशासन और नेशन फर्स्ट की अवधारणा से जोड़ दिया है। इस आधार पर मोदी ने अपने पांच वर्षों का शासन का हिसाब दिया, साथ ही कांग्रेस के शासन को भी कसौटी पर रखा है, जिस पर आर्थिक गड़बड़ी के बहुत आरोप रहे है। ऐसे लोगों द्वारा चौकीदार को चोर बताना गलत था। अब एक साथ पांच सौ क्षेत्रों तक नरेंद मोदी ने चौकीदार को ही मुद्दा बना दिया। इसे इतना  व्यापक स्वरूप प्रदान किया, कि इसमें भारत के सभी नागरिक शामिल हो गए। इस चिंतन में चौकीदार केवल वह नहीं है जो किसी बड़े आदमी के घर या किसी भंडार में नौकरी करता है, बल्कि अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने वाले सभी नागरिक चौकीदार है। प्रधानमंत्री भी इसी में शामिल है।
मोदी ने कहा भी कि देश का नागरिक कर देता है, इस पर देश के गरीबों का हक होता है। मेरी कोशिश रहेगी कि जनता के पैसों पर कोई पंजा नहीं पड़ने दूंगा। मैं अपनी जिम्मेदारी निभाउंगा।
ऐसा भी नहीं कि यह सिद्धांत केवल नरेन्द्र मोदी ने दिया है। यह गांधीजी का सिद्धांत रहा है। सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपने को देश का चौकीदार मानते थे। उन्हें लगता था कि अंग्रेज हमारे देश की संपदा चोरी कर रहे है, लूट रहे है। इसलिए इनको बाहर निकालना है। लेकिन कांग्रेस इस विचार का मखौल बना रही है। मोदी ने कहा कि देश  के कोने कोने में बैठा हर व्यक्ति, जो गांव का है, जो खेत में काम करता है, जो अनपढ़ है वो भी, जो डॉक्टर है वो भी, हर कोई चौकीदार है।
चौकीदार के भाव का निरंतर विस्तार होता जा रहा है। ये भाव जितना प्रबल होगा उतना ही अच्छा होगा। उसी भाव को लेकर इस चौकीदार ने अपना काम शुरू किया। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने इतना विश्वास दिया कि मैंने पीछे मुड़कर कभी देखा नहीं। देश की जनता चाहती है कि देश एक बार फिर चौकीदार चलाए। भारत की इस चौकीदार भावना की गूंज अब विदेशों तक है। बैंक कर्ज की  धोखाधड़ी करने वाले विदेश की अदालतों में जाकर कह रहे हैं कि भारत में जेल की हालत ऐसी है कि हम उसमें रह नहीं सकते। मोदी ने कहा कि अंग्रेजों ने गांधी जी को जिस जेल में रखा था, उससे अच्छी जेल नहीं दूंगा।
नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को भी चौकीदार विचार से जोड़ा। हमारे जीवन इसी भावना से अपनी जान की बाजी लगा देते है। वह सीमाओं की रक्षा करते है। मुझे सेना की ताकत और क्षमता पर पूरा भरोसा है। पाकिस्तान की बड़ी मुसीबत है कि अगर बालाकोट हमला हुआ था तो स्वीकार करना होगा कि यहां आतंकी कैंप थे। अब तक वह कहता है कि उसके यहां कोई आतंकी कैंप नहीं हैं। अब सिद्ध हो चुका है कि पाकिस्तान में आतंकी कैंप चलते हैं। दुर्भाग्य है कि यहां के कुछ लोग मोदी विरोध में अपने बयानों से पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं।
यूपीए सरकार के अंतिम चरण में उनके वित्त मंत्री ने कहा था कि हमें गर्व है कि हम दुनिया की ग्यारहवीं ग्यारहवीं अर्थव्यवस्था में हैं, जबकि वर्तमान सरकार के पांच वर्ष में भारत विश्व की छठी शीर्ष अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है।
प्रधानमंत्री जब चौकीदार की भावना से कार्य करता है तब उससे सुशासन की स्थापना होती है। पिछले लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने  कहा था कि जिन्होंने देश को लूटा है, उन्हें पाई पाई लौटानी पड़ेगी। इस दौरान  ऐसे लोगों को जेल के दरवाजे तक पहुंचाने में मोदी सरकार को सफलता मिली है। मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों में कोई जमानत पर है, कोई डेट ले रहा है। नए अफसर आने के बाद अब कागज भी हाथ लगने लगे हैं। जिसने नौ हजार करोड़ रुपये का घपला किया, उनके चौदह हजार करोड़ जब्त किए। दुनिया के किसी भी कोने में प्रापर्टी होगी, जब्त होकर रहेगी। भारत के कानून की शरण में आना होगा।
मोदी का इशारा विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोगों की तरफ था। इन्हीं का नाम लेकर राहुल गांधी चौकीदार को चोर बता रहे थे। उनका कहना था कि नरेंद मोदी ने गरीबों की जेब से पैसा निकाल कर विजय माल्या और नीरव मोदी की जेब मे डाल कर भगा दिया, इसलिए चैकीदार चोर है। राफेल खरीद पर यूपीए सरकार नाकाम थी। मोदीं सरकार ने खरीदा तो राहुल हमला करने लगे। उनके पास कोई प्रमाण नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने भी सौदे की प्रक्रिया को सही करार दिया था। इसके बाद भी राहुल ने चौकीदार को चोर बताना शुरू कर दिया।
सरकार और भाजपा की तरफ से उचित जबाब न मिलने से राहुल गांधी के हौसले बढ़ते गए। वह जनसभाओं में चौकीदार चोर के नारे लगवाने लगे।
राहुल का यह दांव उल्टा पड़ गया है। नरेन्द्र मोदी ने इसे मुद्दा बना दिया। इह साबित किया देश को घोटालों से रोकने के लिए सभी को चौकीदार की भावना से कार्य करना होगा। प्रियंका गांधी ने कहा था कि चौकीदार अमीरों के यहां होता है। उनका विचार यहीं तक सीमित था। नरेंद मोदी ने इसको व्यापक रूप दे दिया। इसका चुनाव पर  व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
 नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आठ  करोड़ लोग ऐसे निकाले जो फर्जी थे, और आर्थिक लाभ उठा रहे थे। एक करोड़ पन्द्रह  लाख करोड़ रकम चोरी होती थी। नरेंद मोदी ने आधार  को सही ढंग से लागू करके इसे रोक दिया। नियम डीबीटी कारण एक लाख करोड़ रुपये  से ज्यादा की रकम बच गई। इस प्रकार नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के चैकीदार होने से देश को होने वाले लाभ बताए। लाखों करोड़ रुपये की चोरी केवल इस भावना से रुक गई।
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