Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, September 17
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    गुरु की प्रेरणा का प्रतीक

    By July 18, 2019 Current Issues No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 647
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक केशव राव बलिराम हेडगेवार सक्रिय स्वंतत्रता संग्राम सेनानी थे। इसके लिए उन्होंने निजी सुख सुविधाओं का त्याग कर दिया था। आंदोलनों में भाग लेते समय उन्हें भारत माता की त्रासदी विचलित करती थी। वह सोचते थे कि भारत कभी विश्व गुरु था। भारतीय संस्कृति की ध्वज पताका विश्व में प्रतिष्ठित थी। मानव सभ्यता का विकास सबसे पहले यहीं हुआ। यहाँ के वन जंगल तक वैज्ञानिक अनुसंधान के केंद्र थे। चक्रवर्ती सम्राटों की यहाँ सुदीर्घ श्रृंखला थी। भारत ने अपनी संस्कृति का विस्तार तलवार की नोक पर कभी नहीं किया। सदैव मानव कल्याण का विचार दिया। वसुधा को कुटुंब माना। उदार चरित्र की अवधारणा दी।
    डॉ हेडगेवार चिंतन करते थे कि इतना महान देश विदेशी दासता में कैसे जकड़ गया। इसके पीछे उन्हें दो कारण नजर आए। एक यह कि भारत के लोग अपनी सर्वश्रेठ विरासत पर स्वाभिमान करना भूल चुके थे। इसका प्रभाव उनके आचरण पर पड़ा। दूसरा कारण यह था कि हमारे भीतर भेदभाव आ गया। इससे हमारी संगठित शक्ति कमजोर हुई। इसके विदेशी शक्तियों ने लाभ उठाया। डॉ हेडगेवार भारत को पुनः परम वैभव के पद पर आसीन देखना चाहते थे। वह हिन्दू समाज को भेदभाव से ऊपर लाकर संगठित करना चाहते थे। स्वतंत्रता संग्राम अपनी जगह था। वह देश को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करना चाहते थे। इसीलिये कांग्रेस द्वारा चलाये जाने वाले आंदोलनों में सक्रिय भाग लेते थे।
    कांग्रेस के नागपुर सम्मेलन की पूरी व्यवस्था उन्होंने की थी। लेकिन कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए खिलाफत आंदोलन से वह असहमत थे। इसका नाम भी भ्रामक था। ऐसा अहसास कराया गया कि यह अंग्रेजो के खिलाफ है। लेकिन यह तुर्की के खलीफा को अपदस्त करने के विरोध में था। डॉ हेडवेवर ने कांग्रेस के बड़े नेताओं से अपना विरोध दर्ज कराया।
    उनका कहना था कि तुर्की के शासक का मसला उनका है। भारत स्वयं ही गुलाम है। उसे किसी बाहरी मुल्क के मामले में पड़ने की जरूरत ही नहीं है। गुलामों की बात को विश्व सम्मान नहीं देता। कांग्रेस केवल तुष्टिकरण के लिए खिलाफत आंदोलन चला रही है। डॉ हेडगेवार की बात कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने नहीं मानी। इसलिए समाज को एक जुट करने, राष्ट्रीय भावना की प्रेरणा देने के उद्देश्य से उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की थी। संघ के स्वयं सेवक राष्ट्रीय आंदोलन में भी सहयोग करते थे।
    आजादी के बाद भी राष्ट्रीय व प्राकृतिक आपदा के समय स्वयंसेवक अपनी प्रेरणा से सेवा कार्य में जुटते रहे है। चीन व पाकिस्तान के आक्रमण के समय स्वयंसेवक अपने स्तर से सहयोग करते थे। इसीलिए गणतंत्रदिवस परेड में स्वयंसेवकों को पथसंचलन हेतु राजपथ पर आमंत्रित किया गया था। लाल बहादुर शास्त्री ने द्वितीय सर संघचालक से पूंछा था कि आप स्वयं सेवकों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा कैसे देते थे। गुरु गोलवलकर ने कहा था को हम लोग शाखा में खेलते है। यहीं संगठन की प्रेरणा मिलती है, संस्कार और राष्ट्रभाव जाग्रत होता है।
    इसके लिए शाखाओं की पद्धति शुरू की गई। संघ में व्यक्तिवाद को महत्व नहीं दिया गया। डॉ हेडगेवार को सुझाव दिया गया था कि आप संघ के गुरु का पद ग्रहण करें। डॉ हेडगेवार ने इससे इनकार कर दिया। उनका कहना था कि व्यक्ति या उसका उत्तराधिकारी पथ से विचलित हो सकता है। इसके अलावा हिंदुओं में अनेक गुरु है। व्यक्तिगत रूप से अनेक लोगों की आस्था अपने गुरु के प्रति होती है।
    संघ अलग से कोई सम्प्रदाय या पंथ शुरू नहीं कर रहा है। वह पूरे हिन्दू समाज को संगठित करना चाहता है। हिन्दू समाज मे अनेक पंथ समुदाय है। इनके गुरु भी अलग होटे है। लेकिन भगवा ध्वज के प्रति सबकी समान रूप से आस्था है। भगवा ध्वज शौर्य, त्याग, तपस्या का प्रतीक है।  प्राचीन काल मे यह भारत के विश्वगुरु होने का प्रतीक था। इसीलिए संघ में भगवा ध्वज को गुरु का स्थान दिया गया। इससे सदविचारों की प्रेरणा मिलती है।
    उगते हुए सूर्य का रंग भगवा होता है। सूर्यादय अंधकार को दूर करता है। अरुणोदय उत्साह का सन्देश देता है। अग्नि शिखाएं भी भगवा रंग की होती है। यह यज्ञ का प्रतीक है। इसमें शुद्धता त्याग, समर्पण, बलिदान, शक्ति और भक्ति का भाव होता है। सूर्य और अग्नि की भांति भगवा रंग अज्ञानता का अंधकार को दूर करता है। ऊर्जा का संचार करती है।

    Keep Reading

    The future belongs to clean, green, and sustainable energy: A. K. Sharma

    आने वाला समय स्वच्छ, हरित व टिकाऊ ऊर्जा का: ए. के. शर्मा

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    68,500 Teacher Recruitment: Candidates lay siege to Minister's residence, demanding implementation of reservation orders.

    68500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण आदेश लागू करो, मंत्री आवास पर अभ्यर्थियों का घेराव

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    Azim Premji Foundation to provide scholarships to 20,000 female students in Delhi.

    अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन दिल्ली में 20,000 छात्राओं को देगा स्कॉलरशिप

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Special screening of the spiritual film ‘Hanuman Ansh’ in Lucknow; cast members honored with the ‘Matrushakti’ award.

    लखनऊ में आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’ की स्पेशल स्क्रीनिंग, कलाकारों को मिला ‘मातृशक्ति’ का सम्मान

    September 16, 2026
    Remarkable feat by Civil Hospital doctors: 26 cm long, 450-gram gallbladder removed from abdomen.

    सिविल अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल: पेट से निकाला 26 सेमी लंबा और 450 ग्राम वजनी पित्ताशय

    September 16, 2026
    Union with Emptiness

    शून्यता से मिलन

    September 16, 2026
    Grand launch of two new works by Dr. Vidyasagar Upadhyay on Hindi Diwas

    हिन्दी दिवस पर डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो नई कृतियों का भव्य लोकार्पण

    September 16, 2026
    'Naa Pushde' released featuring Neha Kakkar's magical voice; a big treat for YogKansha's fans.

    नेहा कक्कड़ की जादुई आवाज़ में रिलीज़ हुआ ‘Naa Pushde’, YogKansha के फैंस को मिला बड़ा तोहफा

    September 16, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading