दलाई लामा के बिगड़े बोल

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सौरभ श्रीवास्तव

दलाई लामा एक आदरणीय और सन्माननीय व्यकित विशेष है। चीन ने तिब्बत हथिया लिया तब 60 साल पहले दलाई लामा की अगुवाइ में हजारो तिब्बतीयों को भारत ने, वसुधैव कुटुम्बकम की नीति के तहत उन्हें पनाह दी। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 60 साल से हज्जारों तिब्बती अपना जीवन यापन कर रहे है। भारत ने कभी उन्हें पराया नहीं माना। लेकिन इन शरणार्थींयो के धार्मिक नेता दलाई लामा मे भारत के टुकडे करने वाले और पाकिस्तान बनाने वाले मो. जिन्ना के बारे में जो बयान दिया है वह सीधे सीधे भारत की राजनीति में उनकी दखलादांजी है। दलाई लामा ने सार्वजनिक मंच से कहां कि यदि जिन्ना को भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया होता तो भारत में से पाकिस्तान नहीं बनता। कुछ समय पहले यूपी में जिन्ना को लेकर भारी बवाल मचा था। अलीगढ यूनिवर्सिटी.में उनकी तस्वीर को लेकर बवाल मचा था। कुछ समय बाद जिन्ना का भूत वापस कब्र में चला गया जो कि दलाई लामा अब उस भूत को फिर से कब्र से निकाल रहे है।

दलाई लामा एक धार्मिक गुरू है। राजनीति से वे अब तक दूर रहे है, और जिन्ना को भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया होता तो…ऐसा बयान तो आज तक भारत के किसी भी नेता ने नहीं दिया। ऐसा बयान एक धार्मिक गुरू ने क्यों दिया…किस के ईशारे पर दिया… यह समझना कोइ मुश्किल नहीं। दलाई लामा और उनके साथ उस वक्त आये हज्जारो तिब्बतियों से उस वक्त यह कहा गया था की वे शरणार्थी यानिक रिफ्यूजी है और उसी तरह से रहेंगे। भारत के किसी भी मामले में दखलदांजी नहीं करेंगे।

भारत सरकार ने उन्हें रोजी-रोटी और रहने को मकान दिया। वें शांति से रह रहे है लेकिन लगता है कि अपने धर्म गुरू की वजह से अब शायद वें भी नाराज हुये होंगे। क्योंकि उनके धर्म गुरू का ब्यान भारत की राजनीति में दखल के बराबर है। 60 साल पहले भारत में आये दलाइ लामा पूरा विश्व घूम कर चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ बोल रहे है। वहां तक तो ठीक था। लेकीन वे अब एक कदम आगे बढ कर भारत की अंदरूनी मामले में बोल रहे है।

भारत को किसे प्रधानमंत्री बनाना चाहिये था और नेहरू को नहीं बनाना था ये बयान किस राजनितिक दल के हैं ये दलाई लामा अच्छी तरह से जानते है। यह वही सरकार है जिन्होंने दलाई लामा के एक कार्यक्रम में अपने सरकारी अफसर को नहीं भेजने का निर्णय किया था, वे शायद भूल गये है। भारत को क्या करना चाहिये, क्या नहीं करना चाहिये ये भारत तय करेंगा। दलाई लामा को जिन्ना के प्रति इतना ही प्रेम था तो उस वक्त उन्हें भारत से कहना चाहिये था कि जिन्ना को प्रधानमंत्री बनाओ। जो इस दुनिया में नहीं, उसे लेकर ऐसे बयान देना आजकल एक राजनीतिक पैशन हो गया है। उसके पीछे की राजनितिक मंशा साफ दिखाइ देती हैं कुछ नेताओ की। लेकिन आखिर एक धर्म गुरु और वो भी रिफ्यूजी यानि एक किरायेदार मकान मालिक को कह रहा है कि तुम्हें तो यह करना चाहिये था! इससे पहले की किरायेदार मकान को हथिया ले किरायेदार को खबरदार करना होगा कि रिफ्यूजी हो तो रेफ्यूजी की तरह रहे।

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