चुनाव जीते तो वाह- वाह! नहीं जीते तो हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने का चलन सा बन गया है। तो क्या इन नेताओं के हिसाब से वास्तव ईवीएम की विश्वसनीयता खो रही है! विवाद क्यों बार बार उठ रहे हैं। इस मामले को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम् फैसला दिया हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईवीएम वीवीपैट मिलान संबंधी पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के बाद नहीं लगता कि विपक्षी दल शांत बैठ जाएंगे। हालांकि न्यायालय ने साफ कर दिया है कि अब हम आपकी याचिका सुनने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि 21 दलों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका का यह हश्र बिल्कुल अपेक्षित था। आखिर न्यायालय ने इसी विषय पर याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग को विस्तार से सुनने के बाद 8 अप्रैल को फैसला दिया था।
आयोग पहले हर विधानसभा में एक वीवीपैट मिलान की व्यवस्था पर काम कर रहा था। न्यायालय ने उसे विस्तारित करते हुए पांच कर दिया। इन दलों का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। आयोग एक संवैधानिक संस्था है। बार-बार उस पर प्रश्न उठाना उसकी साख को कठघरे में खड़ा करना है। आयोग बारंबार आश्वासन दे रहा है कि ईवीएम प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है तो उस पर विश्वास न करने का कारण नहीं। ईवीएम का मामला जब भी आया आयोग का हमेशा से यही पक्ष रहा है।

सेवानिवृत्त हो चुके चुनाव आयुक्त भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि ईवीएम से कोई छेड़छाड़ संभव नहीं है। इसके बाद राजनीतिक दलों का अपनी जिद पर अड़ना गैर-जिम्मेवार रवैया ही कहा जाएगा। देश में लंबे समय से ईवीएम का उपयोग हो रहा है। तीन संपूर्ण लोक सभा चुनाव ईवीएम से संपन्न हो चुके हैं। इससे संबंधित उठाई गई सारी आशंकाएं निराधार साबित हुई हैं। लेकिन हमारी राजनीति जिस अवस्था में पहुंंच गई है उसमें किस संस्था को कब बेईमान और भ्रष्ट बता दिया जाए, इसकी कल्पना तक आप नहीं कर सकते। राजनीतिक लड़ाई राजनीति के मैदान तक सीमित रहनी चाहिए। आयोग जैसी संवैधानिक संस्था एवं चुनाव प्रणाली को राजनीतिक लड़ाई का हथियार बनाना ठीक नहीं है।
सरकारें आएंगी जाएंगी, आज एक पार्टी सत्ता में है कल दूसरी होगी, लेकिन संस्थाएं अपनी जगह रहेंगी। सभी दलों का दायित्व है कि इन संस्थाओं का सम्मान बनाए रखें। ईवीएम पर बार-बार प्रश्न उठाकर ये चुनाव आयोग की साख और विश्वसनीता को आघात पहुंचा रहे हैं। अगर आप कहते हैं कि ईवीएम का भाजपा के पक्ष में इस्तेमाल किया जा सकता है तो आप आयोग की निष्पक्षता पर ही उंगली उठाते हैं। इसी ईवीएम ने कई परिणाम दिए हैं, जिनसे विपक्ष आज राज्यों की सत्ता में है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बार-बार मुहर लगाने के बाद ईवीएम को विवादित बनाने का गैर-जिम्मेवार सिलसिला बंद हो। यह देश और लोकतंत्र के हित में है।








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