Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, June 14
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    केन्द्र में कैसे सरकार बना पायेगी कांग्रेस पार्टी

    ShagunBy ShagunMarch 15, 2018Updated:March 15, 2018 Current Issues No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 585

    सौरभ श्रीवास्तव

    गत दिनो मुम्बई में कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी नेता सोनिया गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुये कहा था कि 2019 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से केन्द्र में सरकार बनाकर वापसी करेगी। मगर सोनिया गांधी ने यह नहीं बताया कि कांग्रेस किस फार्मूले से भाजपा को लोकसभा चुनाव में हरा पायेगी। कांग्रेस की वर्तमान स्थिति देखे तो सोनिया गांधी की बात में दम कम ही नजर आता है। देश में आज कांग्रेस के स्थिति किसी से छुपी हुयी नहीं हैं। एक दो उपचुनाव जीतकर कांग्रेस का इतराना शायद ही किसी के गले उतर रहा हो।

    2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की इतनी बुरी गत हुयी थी जिसकी कल्पना शायद ही किसी राजनीतिक पण्डित ने की होगी। कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनाव में 1952 से लेकर सबसे कम 44 सीटें ही मिल पायी थी। कांगेस की इतनी बुरी गत तो 1977 में जनता पार्टी की लहर में भी नहीं हुयी थी। उस वक्त कांग्रेस को 189 सीटो पर जीत हासिल हुयी थी व 40.98 फीसदी वोट मिले थे। 1989 में भी देश में कांग्रेस विरोधी माहौल के उपरान्त 197 सीटो पर जीत मिली थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 44 सीटों के साथ कुल 10 करोड़ 69 लाख 35 हजार 311 वोट मिले जो कुल मतदान का 19.30 फीसदी थे। जबकि 2009 में कांग्रेस को 28.60 फीसदी मत मिले थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांगे्रस को 162 सीटो का नुकसान उठाना पड़ा था।

    2014 में भाजपा को 282 सीटो के साथ 17 करोड़ 16 लाख 37 हजार 684 मत मिले थे जो कुल मतदान का 31 फीसदी थे। भाजपा ने 2009 के लोकसभा चुनाव से सीधे 162 सीटो के साथ 12.20 फीसदी मतो में बढ़ोत्तरी की थी। देश भर में भाजपा को लगातार मिल रही विजय से तो यही लगता है कि उसको रोकने का कांग्रेस में दम नहीं बचा है। कांग्रेस के नेता सिर्फ बाते ही बड़ी-बड़ी करते हैं, हकीकत में उनका आज भी जनता से सम्पर्क कटा हुआ है।

    2014 से लेकर अब तक आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडीसा, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, बिहार, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडू़, केरल, पंजाब, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल,मणिपुर, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय सहित देश में 24 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में विधानसभाओ के चुनाव हुये। इनमें कांग्रेस ने दो प्रदेशों पंजाब में अकाली दल,भाजपा गठबंधन के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को हराकर व पुडुचेरी में आल इंडिया एन आर कांग्रेस पार्टी व अन्नादु्रमक गठबंधन के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी की सरकार को हराकर सत्ता छीनी। वहीं कांग्रेस ने देश के 13 प्रदेशों में चुनावी हार के कारण सरकारे गवायी। अरूणाचल प्रदेश में उसके मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार व अधिकांश विधायको के दलबदल कर कांग्रेस छोड़ देने के कारण सत्ता गंवानी पड़ी।

    कांग्रेस को तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति के के.चन्द्रशेखर राव से हारना पड़ा तो आन्ध्र प्रदेश में तेलुगुदेशम पार्टी, भाजपा गठबंधन के चन्द्रबाबू नायडू से हार मिली। केरल में कम्युनिष्टो ने कांग्रेस को हराया। महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखण्ड, जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, मणीपुर, गोवा, मेघालय में कांग्रेस को भाजपा व भाजपा गठबंधन ने हराया। इस प्रकार देखें तो गत चार सालों में कोग्रेस ने जहां दो प्रदेशों में अपनी सरकार बनायी है वहीं 14 प्रदेशों में सरकार गंवायी है। आज कांग्रेस की देश में मात्र चार प्रदेशों पंजाब, कर्नाटक, पुडुचेरी व मिजोरम में सरकार बची है। जिसमें कर्नाटक में आगामी माह में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जहां कांग्रेस को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। मिजोरम के मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली को लेकर वहां उनके खिलाफ भी कांग्रेस के विधायको में रोष व्याप्त हो रहा है। आन्ध्रप्रदेश, दिल्ली, त्रिपुरा,नागालैण्ड में तो कांग्रेस का ना कोई विधायक है ना ही कोई सांसद।

    कांग्रेस आज पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडीसा, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखण्ड,त्रिपुरा, नागालैण्ड, अरूणाचल प्रदेश में बहुत ही कमजोर हालात में हैं। इसी कारण कांग्रेस छोटे-छोटे दलो के आगे समर्पण कर रही है। बंगाल में कांग्रेस कभी ममता बनर्जी के नेतृत्व में तो कभी वामपंथियो के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है। महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी तो तमिलनाडु में द्रुमक, झारखण्ड में शिबू सोरेन के नेतृत्व में, बिहार में लालू यादव तो उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव, मायावती के नेतृत्व में चुनाव लडऩा चाहती है। स्थिति यहां तक आ गयी कि आज राजनीति के हासिये पर पहुंच चुके अजीतसिंह जैसे नेता भी अपनी शर्तो पर कांग्रेस से तालमेल करना चाहते हैं। तेलंगाना में कांग्रेस के सहयोगी रहे असद़दुदीन औवेसी ने भी भविष्य में कांग्रेस से किसी तरह का तालमेल ना करने की घोषणा कर दी है।

    चुनावों में लगातार मिल रही हार के बाद भी कांग्रेस के बड़े नेता वस्तुस्थिति से अनजान बने हुये हैं। गुजरात में 25 साल से शासन कर रही भाजपा को सत्ता विरोधी लहर होते हुये भी कांग्रेस नहीं हरा पायी। जबकि वहां चुनाव के लिये कांग्रेस ने पार्टी से बाहर के कुछ नये जातिवादी राजनीति करने वाले युवा नेताओं के ईशारों पर पर चुनाव लड़ा था। राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद एकमात्र सत्ता के केन्द्र बिन्दु बन चुके हैं। पूरी पार्टी पर उनका नियंत्रण तो पहले से ही था। राहुल गांधी द्वारा अब तक की जा रही राजनीति में परिपक्वता कम ही नजर आती है। गुजरात चुनावो में उनका मन्दिरों में जाना व कुर्ते के उपर से जनेऊ पहनकर प्रदर्शन करना लोगो के कम ही गले उतरा था।

    आज यूपीए गठबंधन में नाम मात्र के दल रह गये हैं। उनके साथी रहे शरद पवार अपनी अलग ही खिचड़ी पका रहें हैं। त्रिपुरा में भाजपा सरकार बनने से डरी हुयी ममता बनर्जी हर दिन नया रंग बदल रही है। कभी वो कांग्रेस के साथ दिखती है तो कभी पवार के। हाल ही में वो तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चन्द्रशेखर राव के नये मोर्चे के साथ नजदीकियां दिखा रही थी। माक्सर््ावादी कम्युनिष्ट पार्टी में तो कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बड़ी लड़ाई चल रही है। पार्टी महासचिव सीतारात येचुरी कांग्रेस से गठबंधन करना चाहते हैं, तो पूर्व महासचिव प्रकाश करात कांग्रेस से किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहतें हैं। इस बात को लेकर माकपा की सर्वोच्च बोडी में मतदान तक हो चुका है जिसमें कांग्रेस समर्थक कामरेडो को 31 व विरोधी खेमे को 55 मत मिले थे। इससे माकपा का कांग्रेस से गठबंधन के प्रयास पर रोक लग गयी लगती है।

    कांग्रेस पार्टी को निर्धारित संख्या नहीं होने के कारण लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद नहीं मिला वहीं राज्यसभा में में भी सीटो की संख्या में भाजपा कांग्रेस से आगे निकल चुकी है। आज कांग्रेस में वरिष्ठ नेता मुख्यधारा से कट गये हैं। छुटभैये नेता ज्यादा छाये हुये हैं जिनके मनमाने बयानो के कारण पार्टी को अक्सर खामियाजा भुगतना पड़ता है। आज कांग्रेस सिर्फ गठबंधन के सहारे राजनीति करना चाहती है। ऐसे में कांग्रेस के पारम्परिक मतदाता अन्य दलो से जुडऩे लगे हैं। कांग्रेस संगठन में जनाधार वाले कम व कागजी नेता ज्यादा काबिज होने से संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है।

    अपनी पारिवारिक राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुये राहुल गाँधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष तो बन गये मगर 1952 के बाद सबसे बुरे दौर में गुजर रही कांग्रेस पार्टी के अच्छे दिन कैसे लाये जा सकते हैं, इस बात पर अभी गंभीर मंथन करना बाकी है। कांग्रेस संगठन में वार्ड पंच के चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव जीतने की छमता रखने वाले लोगों को उनकी छमतानुसार संगठन में पदाधिकारी बनाना चाहिये। धनबल से पार्टी पदाधिकारी बने हुये सत्ता के दलालो से पार्टी को मुक्त करवाना होगा। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना होगा। पार्टी को परिवारवाद, रिश्तेदारी प्रथा से कुछ समय के लिये दूर करना होगा तभी कांग्रेस पार्टी की वापसी की कुछ संभावना बन सकती है। लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधानपरिषद चुनावो में जनता से जुड़े लोगो को प्रत्याशी बनाने से लोगो को पार्टी में हो रहा बदलाव नजर आ सकता है। बदलाव होता नजर आने से ही कांग्रेस अपना खोया जनाधार पुन: प्राप्त कर सकती है। कांग्रेस को गठबंधन की बजाय अपना खुद का जनाधार बढ़ाने का प्रयास करना चाहिये। ऐसा नहीं होने पर तो शायद ही सोनिया गांधी का सपना 2019 में पूरा होता लगता है।

    Shagun

    Keep Reading

    A weeping Great Nicobar and a smiling 'Ego'!

    रोता हुआ ग्रेट निकोबार और मुस्कुराता हुआ अहम्!

    US attack off the Oman coast and diplomatic surrender: Is India's strategic autonomy merely a facade?

    ओमान तट पर अमेरिकी हमला और कूटनीतिक आत्मसमर्पण: क्या भारत की रणनीतिक स्वायत्तता एक छलावा मात्र है?

    Many writers are caught in a labyrinth of duties!

    कर्त्तव्यों के चक्रव्यूह में घिरे हैं कई कलमकार!

    Do not play vote-bank politics at the cost of internal security.

    आंतरिक सुरक्षा की कीमत पर वोटों की राजनीति न करें

    Sold taxi to save a girl's life; later, the true recipient of the gold medal was found.

    टैक्सी बेचकर बचाई लड़की की जान, फिर मिला गोल्ड मेडल का असली हकदार

    When a clever merchant and an innocent king taught a lesson to the forest and the sea...!

    जब चतुर व्यापारी और मासूम राजा ने दी जंगल और समंदर को सीख तब..!

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    A weeping Great Nicobar and a smiling 'Ego'!

    रोता हुआ ग्रेट निकोबार और मुस्कुराता हुआ अहम्!

    June 14, 2026
    US attack off the Oman coast and diplomatic surrender: Is India's strategic autonomy merely a facade?

    ओमान तट पर अमेरिकी हमला और कूटनीतिक आत्मसमर्पण: क्या भारत की रणनीतिक स्वायत्तता एक छलावा मात्र है?

    June 14, 2026
    Lethal danger at the railway crossing! Scouts raise awareness through street plays.

    रेलवे क्रॉसिंग पर मौत का खतरा! स्काउट्स ने नुक्कड़ नाटक से जगाई सावधानी

    June 14, 2026
    Body of a 12-year-old boy found on a cot with a belt tightened around his neck.

    चारपाई पर पड़ी मिली 12 वर्ष के बच्चे की गले में बेल्ट से कसी हुई लाश

    June 13, 2026

    3 मिनट की झपकी एक ईमानदार इंसान की इज़्ज़त लगभग छीन लेती

    June 13, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading