डॉ दिलीप अग्निहोत्री
साढ़े चार वर्ष पहले नरेंद्र मोदी ने ने काशी में कहा था कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। तभी से वह गंगा की निर्मल, अविरल बनाने का सपना देख रहे थे। काशी और हल्दिया को उन्होंने जल मार्ग से जोड़ने की बात कही थी। तब उनकी इन बातों पर विपक्ष ने खूब तंज कसे थे। लेकिन इस सीमित अवधि में एक बड़ा सपना साकार हुआ। आजादी के बाद पहली बार जल परिवहन की शुरुआत हुई। आमजन ने नरेंद्र मोदी का जिस प्रकार उत्साहपूर्वक स्वागत किया ,उसने पिछले लोकसभा चुनाव की याद ताजा कर दी। मोदीं को ऐसे उत्साही लोगों को अनेक बार रोकना पड़ा। लेकिन यह साफ हुआ कि मोदी का करिश्मा अभी भी कायम है।यह सौगात केवल काशी की नहीं पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश को इसका लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं इसका फायदा पश्चिम बंगाल तक दिखाई देगा। जितना सामान लेकर यह पानी का जहाज आया ,उतना समान लाने के लिए सोलह ट्रक लगते। इस प्रकार जल परिवहन एक प्रकार की क्रांति लाने वाला साबित होगा।
यह कार्य आजादी के बाद से ही करना चाहिए था। लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। अब सौ से ज्यादा नेशनल जल मार्ग पर कार्य किया जा रहा है। बिहार , झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सभी जल मार्ग से जुड़ेंगे। इससे इस पूरे क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन सभी को बढ़ावा मिलेगा। यह सब काशी की गरिमा के अनुरूप होगा। कालीन, कार्पेट का भी यह इलाका हब बन रहा है। काशी ही नहीं देश में परिवहन क्रांति नया अध्याय शुरू हुआ।
नरेंद्र मोदी वाराणसी में गंगा के उस पार रामनगर में नव निर्मित बहुउद्देशीय टर्मिनल राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने कोलकाता से चले मालवाहक जलयान एमवी रबीन्द्रनाथ टैगोर की अगवानी भी की । आजादी के बाद यह पहला अवसर था। जब कोई जल मालवाहक इतना सामान लेकर इतनी दूरी तक आया।
मोदी ने जल परिवहन के विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए जो नीतिगत फैसले किये थे, उन्हें जहाजरानी और जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने रिकॉर्ड समय पूरा कर दिया। गडकरी ने एक ट्वीट सन्देश में कहा कि नए भारत की शान में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। वाराणसी का मल्टी मॉडल टर्मिनल परिवहन के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होगा। जल मार्ग विकास परियोजना के तहत बने इस टर्मिनल को हल्दियावाराणसी के बीच राष्ट्रीय जलमार्ग एक पर विकसित किया जा रहा है।
इस टर्मिनल के जरिये दो हजार टन के बड़े जहाजों की भी आवाजाही मुमकिन हो सकेगी। नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र काशी को चौबीस सौ करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात दी। प्रधानमंत्री वाराणसी के रिंग रोड तिराहे पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में गंगा नदी पर बने पहले मल्टी-मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन किया।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग छप्पन के बाबतपुर से वाराणसी तक चार लेन चौड़ीकरण के कार्य, वाराणसी रिंग रोड फेज एक आईडब्ल्यूटी सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लाण्ट समेत विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इसके अलावा मोदी ने इण्टरसेप्शन डाइवर्जन ऑफ ड्रेन एण्ड ट्रीटमेण्ट वर्क एट रामनगर वाराणसी, किला कटरिया मार्ग पर आईआरक्यूपी का कार्य, पूर्व राष्ट्रीय मार्ग संख्या सात पड़ाव रामनगर टेगरा मोड़ मार्ग पर आईआरक्यूपी का कार्य, लहरतारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मार्ग पर उपरिगामी फुटपाथ का निर्माण, वाराणसी में हेलीपोर्ट का निर्माण, ड्राइवर प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना कार्य आदि परियोजनाओं का शिलान्यास किया। मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन किया । यह जल परिवहन को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा है। यह गंगा नदी पर बने पहले तीन ऐसे टर्मिनल में से है।
बनारस की कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया। पूर्वांचल के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ जाने का रास्ता आसान होगा। वाराणसी से बाबतपुर फोरलेन और सोलह किमी. लंबे रिंग रोड का लोकार्पण किया। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा हल्दिया से प्रयागराज तक जलमार्ग विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत पहले बंदरगाह का शुभारंभ भी मोदी ने किया। कोलकाता से चले कंटेनर का मोदी ने काशी में स्वागत किया। गंगा में जल मार्ग से बिहार, छत्तीसगढ़ के रास्ते पश्चिम बंगाल तक उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सकरा बाबतपुर रोड को फोरलेन परियोजना का भी लोकार्पण किया। रिंग रोड से गाजीपुर, आजमगढ़ और गोरखपुर तक आवागमन आसान होगी।
देश में पैसठ प्रतिशत माल की ढुलाई सड़क मार्ग से और सत्ताईस प्रतिशत रेलवे के जरिये होती है। जल परिवहन का हिस्सा केवल आधा प्रतिशत है। जबकि विकसित देशों में यह करीब दस प्रतिशत है। जल परिवहन ढाई गुना सस्ता पड़ेगा। प्रदूषण भी नहीं होगा। सड़क मार्ग से एक टन प्रति किलोमीटर माल भाड़ा ढाई रुपये पैसे पड़ता है रेल का माल भाड़ा एक रुपया चालीस पैसे है।
जल परिवहन पर यह शुल्क केवल एक रुपया छह पैसे होगा। सड़क मार्ग से एक लीटर ईंधन में प्रति किमी चौबीस टन और रेलवे के जरिये पच्चासी टन माल की ढुलाई होती है। जबकि जल परिवहन में एक लीटर से प्रति किमी करीब सौ टन माल ले जाया जा सकता है। इस जलमार्ग पर वाराणसी के अलावा ग़ाज़ीपुर, कालूघाट, साहिबगंज, त्रिवेणी और हल्दिया में बहु उद्देशीय टर्मिनल होंगे। जलयानों की मरम्मत और रखरखाव के लिए डोरीगंज बिहार में एक केंद्र होगा। पांच स्थानों पर रोल ऑन रोल रो-रो केंद्र होंगे जो सड़क से जल टर्मिनल तक माल की आवाजाही की सुविधा प्रदान करेंगे।
नरेंद्र मोदी ने हजारों करोड़ रुपये की यह सौगात काशी को दी है। लेकिन इसका लाभ इस जनपद तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह एक साथ अनेक प्रदेशों में विकास के नए युग की शुरुआत करेगा।







