देश पर गहरा घाव कर रहे नक्सलवाद ने आज भी अपनी क्रूर हरकते बंद नहीं की हैं वे लगातार अपनी क्रूर मानसिकता का परिचय आये दिन निर्दोषों की हत्या कर देते रहते हैं। इसी क्रम में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक बार फिर अपना क्रूर चेहरा दिखाया है। महज चार-पांच दिनों के अंदर नक्सलियों ने मीडिया से जुड़े पत्रकार और कैमरामैन समेत सात जवानों को मौत के घाट उतार दिया। पहली घटना चार दिन पहले छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में हुई। इसमें सीआरपीएफके 4 जवान शहीद हो गए जबकि 2 लोग घायल हो गए। नक्सलियों ने यह हमला आईईडी ब्लास्ट के जरिये किया। वहीं दूसरी वारदात दंतेवाड़ा जिले में हुई, जिसमें दूरदर्शन के कैमरामैन के अलावा छत्तीसगढ़ पुलिस के दो जवान शहीद हो गए। ऐसा पहली बार हुआ है कि नक्सलियों ने मीडिया को निशाना बनाया है। मतलब नक्सली हताश हैं और उनमें अपनी मौजूदगी दिखाने की छटपटाहट साफतौर पर सामने आ रही है।
आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि नक्सली हमलों में कमी आई है, मगर चिंता का सबब यह है कि सुरक्षा बल को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। रह-रह कर नक्सली सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करते रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले नक्सलियों का हमला सरकार के इकबाल को भी चुनौती दे रहा है। दरअसल, यह दशकों पुरानी समस्या है। और किसी एक राज्य या जिले की नहीं है। कुल आठ राज्यों के 60 जिले नक्सलियों के उत्पात से पीड़ित हैं। इसमें झारखंड के 14, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 10-10, मध्य प्रदेश और प. बंगाल के 8-8, बिहार के 5 और महाराष्ट्र के 2 जिले शामिल हैं।
लाख सख्ती के बावजूद इनका आतंक बरकरार है, जबकि उनपर केवल बल प्रयोग से बात नहीं बनने वाली। सरकार को कई स्तर पर उनसे निपटने के उपाय अमल में लाने होंगे। मसलन, स्थानीय लोगों को अपने साथ लाना जरूरी है। जब तक हम आदिवासियों को उनके संसाधनों पर अधिकार नहीं देंगे, यह समस्या कभी खत्म नहीं होगी। दूसरा, पुलिस-सुरक्षा बलों को मिलकर लड़ना होगा। तीसरा, अधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूद करना होगा।
विकास को जमीनी स्तर पर लागू कराना होगा। चौथा, राज्य सरकारों को अलग-अलग नीतियां बनाने के बजाय एक केंद्रीय नीति बनानी होगी। जवानों के साथ मीडियाकर्मी का इस तरह जाना दुखद है। नक्सलियों को समझना होगा कि खून-खराबे से उनकी वाजिब मांगें शून्य हो जाएंगी। मुख्यधारा में लौटना है तो उन्हें हिंसा का रास्ता तत्काल त्यागना होगा।







