अब जब पूरा प्रदेश ठंडी शीतलहर की चपेट से गुजर रहा है और जिससे आने वाले दिनों में शीतलहर और भी तेज होने की आशंका जताई जा रही है। तब ऐसे में और जरूरी हो जाता है कि इससे बचाव के लिए आवश्यक उपाय केवल स्वयं के लिए ही नहीं बल्कि समाज के विभिन्न वर्गो को भी ध्यान में रखकर किए जाएं। अच्छी बात यह कि अभी शीतलहर की ठंडी से किसी की जान जाने का सिलसिला ज्यादा नहीं शुरू हुआ, पर लोगों की परेशानियों में इजाफा स्वाभाविक रूप से देखने को मिल रहा है।
अब बात कोहरे के कहर से ट्रेनों की लेटलतीफी की हो या अस्पतालों के अव्यवस्थित रैन बसेरे में ठंड की मार झेल रहे मरीजों और तीमारदारों की हो या फिर खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे मुकद्दर के सहारे पड़े हुए गरीबों और पशुओं की हो, सुविधा नहीं होना एक बात है उसके अभाव में जान जाना दूसरी बात और यही बेहद गंभीर तथ्य है। सभ्य समाज के लिए तो अपमान की तरह है।

आमतौर पर माना यह जाता है कि मौसम चैन से खाने-पीने और गर्म कपड़ों के आराम के साथ रहने का है, लेकिन सही यह है कि शीतलहर के दिनों में कष्ट ही कष्ट नहीं बल्कि जीवन को खतरे में भी डालना है। यही कारण है कि इन दिनों के लिए चिकित्सक सावधानी बरतने की परामर्श देते हैं। तब इस बात का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है किस जगह और जरूरत के हिसाब से जरूरतमंदों का ख्याल रखा जाए।

यह अच्छी बात है कि इस वर्ष प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है हालांकि इस दिशा में अभी और प्रयास किए जाने अपेक्षित है। राजधानी के विस्तार को देखते हुए इस ओर गंभीरता के साथ कदम उठाए जाने के साथ ही अस्पतालों में सुव्यवस्था बनाना विशेष रूप से आवश्यक है, बता दें कि यही वह जगह है जहां सर्वाधिक समस्या से ग्रस्त लोग भी आते हैं और अगर उन सब गरीबों की ओर ध्यान ना दिया जाए, तो व्यवस्था का दावा करना पूरी तरह से व्यर्थ होगा। सरकारी मशीनरी के साथ आम नागरिकों को भी इस संबंध में अपना दायित्व समझना और उसका निर्वहन करना होगा। इस सर्दी में आपकी एक मदद इन गरीबों के लिए बड़ा मील का पत्थर सभीत होगी।







