Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, October 29
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Hot issue

    भगत सिंह की असली तीन तस्वीर

    ShagunBy ShagunSeptember 27, 2021 Hot issue No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 927

    27 सितम्बर शहीदे भगत सिंह आज़म भगत सिंह के जन्मदिन पर ख़ास

    पंकज चतुर्वेदी

    शहीदे आज़म भगत सिंह के कई फोटो पोस्टर, टीशर्ट आदि पर दिखते हैं लेकिन असल में उनके असली फोटो चार ही हैं. यह जान लें कि आठ अप्रैल वह तारीख थी जिसने एक विप्लववादी सरदार भगत सिंह को एक विचारक, स्वप्नद्रष्टा और लेखक के तौर पर स्थापित कर दिया था। इसी तारीख से जुड़ी है उनकी सबसे लोक प्रिय हैट वाली तस्वीर भी। शहीदे आजम भगत सिंह के 23 साल पांच महीने और 23 दिन के छोटे से जीवन का हर दिन अपने में रोमांच, साहस, विचार और देश के प्रति समर्पण की अद्वितीय कहानी है। उनके महज चार असली चित्र उपलब्ध हैं और हर चित्र के पीछे अपने कारण हैं।

    सरदार भगत सिह का पूरा परिवार क्रांतिकारी था, उनके दादा अर्जुन सिंह, पिता किशन सिंह, चाचा सरदार अजीत सिंह हों या चाचा स्वर्ण सिंह, सभी आजादी के आंदोलन में विप्लवी गतिविधियों के कारण मशहूर और सरकार की नजरों में खटके हुए थे। जब वह पैदा हुए थे तो उनके चाचा सरदार स्वर्ण सिंह जेल में थे। ब्रितानी हुकुमत की खिलाफत के कारण उन्हें सजा हुई थी। जेल में उन्हें ना तो खाना मिल रहा था, ना ही बीमारी का इलाज। वे महज 23 साल की उम्र में जेल में ही शहीद हो गए थे।

    दूसरे चाचा सरदार अजीत सिंह तो आजादी के आंदोलन के बडे क्रांतिकारी थे। अंग्रेजों से बचते-बचाते वे विदेश चले गए थे। अब घर में एक चाची विधवा तो दूसरी विधवा जैसी। भगत जब किसी चाची को रोता देखता तो उनके आंसू पोंछता । ‘‘‘चाची रोना नहीं, मैं अंग्रेजों को मार भगाउंगा फिर चाचाजी लौट आएंगे।’’ कभी कहता, ‘चाची , देखना मैं अपने चाचा का बदला जरूर लूंगा।’’ भगत सिंह का पहला उपलब्ध फोटो उनकी ग्यारह साल की अवस्था का हैं। जबकि दूसरा चित्र एक खटिया पर बैठे हाथ में हथकड़ी लगा हुआ। तीसरा चित्र उनके कालेज के दिनों का है जिसमें वे पगड़ी पहने है और सबसे ज्यादा चर्चित और प्रिय चित्र उनका हैट वाला है।

    भगत सिंह का हथकड़ी वाला चित्र असल में उनकी पहली गिरफ्तारी के वक्त का है। वे एक बांस की ढीली सी खटिया पर बैठे हैं, उनके सामने कोई आदमी है, हाथ में हथकड़ी लगी है। उनके नंगे सिर पर पर सिखों वाली जूड़ी है। पैरे नंगे हैं, कुरता या शर्ट भी अव्यवस्थित सी है। बात अक्तूबर- 1926 की है। अभी तक भगत सिंह की पहचान क्रांतिकारी के तौर पर नहीं थी, लेकिन अंग्रेज सीआईडी को शक था कि क्रांतिकारियों के घर का यह नौजवान कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में है।

    लाहौर में दशहरे के मेले में रामलीला के समय एक बम फटा। पंजाब पुलिस ने मान लिया कि यह धमाका विप्लववादियों ने किया हे। आनन-फानन में भगत सिंह को पकड़ कर लाहौर रेलवे स्टेशन के बगल वाले हवालात में रखा गया। ना अदालत ले गए, ना कोई कानूनी लिखा-पढ़ी हुई और भगत सिंह को कोई तीन सप्ताह हिरासत में रखा गया। बब्बर अकाली आंदोलन के कार्यकर्ता मिलखा सिंह निर्झर ने गुरबचन सिंह भुल्लर को दिए एक साक्षात्कार में बताया था कि असल में यह फोटो उस समय का हे। ठंड के दिन थे।

    सीआईडी वाले पूछताछ के लिए पेड़ के नीचे खुले में भगत सिंह को लेकर बैठते और पूछताछ करते थे। बाद में साठ हजार रूपए के मुचलके पर उन्हें छोड़ दिया गया था क्योंकि कोई भी प्रमाण उनके विरूद्ध नहीं मिले थे। यह फोटो पुलिस वालों ने ही अपने रिकार्ड के लिए खींचा था। यह तस्वीर भगत सिंह के भाई कुलबीर सिंह को सन 1950 में मिली थी। इस चित्र के पुलिस के रिकार्ड से बब्बर अकाली मूवमेंट के एक वकील तक पहुंचने फिर उसे बितानी सरकार के भय से छुपा कर रखने और आजादी के बाद उसके सामने आने की कहानी भी बेहद घुमावदार है, बिल्कुल भगत सिंह के जीवन की तरह।

    इससे पहले नेशनल कालेज, लाहौर में उनका एक फोटो सन 1924 में खींचा था जो कि पूरी कक्षा का समूह फोटो था। बाद में उससे निकाल कर उनकी यह तस्वीर लोगों के सामने लाई गई, जिसमें उनके सिर पर पगड़ी है और दाढ़ी-मूंछ भी। यह फोटो भी उनकी शहादत के बाद कालेज के रिकार्ड से निकल कर लोगों तक पहुंचा।

    “इन्कलाब जिंदाबाद” और “साम्राज्वाद का नाश हो” के नारों के बीच उभरी भगतसिंह की क्रांतिकारी विचारक की छबि का प्रतीक बन गया उनका हेट वाला फोटो भी बेहद क्रांतिकारी ढंग से जनता के सामने आ पाया था। इस चित्र में सरदार भगत सिंह के चेहरे पर रौब, दृढ संकल्प और आंखों की चमक आज भी लोगों को सम्मोहित करती है।

    यह कहानी तो सभी को पता है कि लाहौर गोली कांड के बाद पुलिस से बचने के लिए भगत सिंह ने अपने केश कटवा लिए थे और अंग्रेजी हेट लगा कर वे पुलिस को चकमा दे कर ट्रैन से उनकी नाक के सामने से फरार हो गए थे। उसके बाद भगत सिंह को हैट से प्यार सा हो गया था। जब एच एस आर ए(हिंदुस्तानी सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोशिएसन) ने तय कर लिया कि असेंबली में बम फैक कर खुद को गिरफ्तार करवाया जाएगा और फिर अदालत में देश की आजादी की आवश्यकता पर देश को संबोधित किया जाएगा, उसके बाद भगत के सभी साथी उसे असीम प्यार करने लगे थे। वे सभी जानते थे कि यह कारनामा उनके जीवन का अंत का मार्ग प्रशस्त करेगा, लेकिन भगत सिंह का जबरदस्त आत्म विश्वास और मौत के प्रति निर्भरता के भाव से उने चैहरे का नूर बढ़ गया था।

    आठ अप्र्रैल को दिल्ली का असेंबली में बम फेंका गया था, लेकिन उससे पहले कई दिनों तक भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त असेंबली की कार्यवाही और हालात देखने वहां जाते रहे थे। शायद चार अप्रैल की बात है यानि कांड के चार दिन पहले, साथी जयदेव कपूर ने दिल्ली के ही कश्मीरी गेट के रामनाथ फोटोग्राफर स्टूडियो में इस फोटो को खींचने का इंतजाम किया था। उन्होंने फोटोग्राफर को कहा कि ‘‘मेरे यार की शानदार तस्वीर खींचना, यह हमसे बहुत दूर जा रहा है। ’’

    तय तो यह था कि तीन दिन में तस्वीर मिल जाएगी। सनद रहे उस दौर में फोटो खींचना और उसे बनाने की तकनीक बहुद धीमी थी और तीन-चार दिन से पहले फोटो मिलती नहीं थी। काम की अधिकता के चलते रामनाथ आठ तारीख तक फोटो तैयार नहीं कर पाए और असेंबली में हुए धमाके की चर्चा से पूरी दुनिया हिल गई। जयदेव कपूर भागते हुए गए और रामनाथ से फोटो ले कर आए। उसके बाद इसी फोटो ग्राफर को पुलिस ने पुरानी दिल्ली के थाने में बुलाया ताकि अभियुक्तों के फोटो खींचे जा सके। वह देखते से ही पहचान गए, लेकिन मौन रहे।

    उसके बाद जब भगत सिंह को लाहोर गोली कांड में फांसी की सजा हुई तो उनका एक नोट जेल से आया जिसमें उन्होंने कहा कि ‘मेरा नाम हिंदुस्तानी इंक्लाब का प्रतीक बन गया है। अगर में मुस्कुराता हुआ फांसी पर चढता हूं तो हिंदुस्तानी मांओं को प्रेरणा मिलेगी और वे अपने बच्चों को भी भगत सिंह बनने के लिए प्रेरित करेंगी। इस तरह अपनी जिंदगी कुर्बान कर देने वालों की तादाद में भारी बढ़ेतरी होगी। फिर साम्राज्यवाद के लिए इंकलाब के सैलाब का समना कर पाना मुश्किल होगा।’’

    एचएसआरए ने यह फोटो और नोट को पोस्टर की शक्ल में तैयार किया और कई अखबारों को भेजा। सभी राजद्रोह की लटकती तलवार से भयभीत थे लेकिन फांसी के बाद 12 अप्रेल को लाहौर के उर्दू अखबार ‘वंदे मातरम ’ ने इस तस्वीर को छापा। यह अखबार के पन्ने की जगह पोस्टर के रूप में ही अखबार के बीच रखकर वितरित की गई। हालांकि बाद में अखबार के मालिक लाला फिरोजचंद को भी पुलिस ने पकड़ा।

    भगत सिंह की खटिया वाली और हेट वाली तस्वीर उस समय ब्रितानी सरकार की नींद हराम किए थी तो आज भी जब जोर जुल्म की टक्कर का नारा उभरता है तो प्रेरणा और ताकत का स्त्रोत यही दो तस्वीरे बनती हैं।

    Shagun

    Keep Reading

    नीले ड्रम’ हत्याकांड पर आया फैसला : जैसी करनी, वैसी भरनी

    अकीदा बनाम अंधविश्वास: पक्के विश्वास और भटकती भीड़ की दास्तान

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Anuradha Paudwal: Reached great heights, yet also endured the pain of profound loneliness.

    अनुराधा पौडवाल : बुलंदियों को भी छुआ और गहरे अकेलेपन का दर्द भी झेला

    October 28, 2026

    यूपी में श्रमिकों की बढ़ी मजदूरी, महंगाई सूचकांक के आधार पर तय हुई दरें

    October 28, 2026
    Neeru Sharma Explores Parenting, Social Conditioning and Unspoken Wounds as the Trailer of Sonali Kulkarni’s ‘Like Maa’ Is Released

    माँ की परवरिश में छिपे बचपन के जख्मों की कहानी कहेगी ‘लाइक माँ’

    October 28, 2026
    U&i launches new gadgets: now listen to music and make calls for up to 50 hours—all through your glasses.

    U&i के नए गैजेट्स लॉन्च, अब चश्मे से सुनें म्यूजिक और 50 घंटे तक करें कॉलिंग

    October 28, 2026
    From Ravana on Screen to a Power Player Behind the Scenes! Yash Makes a Big Move in ‘Ramayana’ Distribution

    पर्दे पर रावण, पर्दे के पीछे पावरफुल खिलाड़ी ! ‘रामायण’ के डिस्ट्रीब्यूशन में यश की बड़ी एंट्री

    October 27, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading