जी के चक्रवर्ती
आकस्मिक आपदा के रूप मे छाये आज के दौर में एक जानलेवा लाइलाज अत्यंत विषाक्त विषाणु के इंसानी दुनिया में प्रवेश करने से सारा का सारा विश्व ही अस्थिर हो उठा जिसकी वजह से लगभग पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था ही चरमरा गई है।
हमारे देश में लगभग 95 प्रतिशत कामगार जो की असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोग रोज कमाते और रोज खाते हैं। इस तरह के लोगों के पास संचित धन होता ही नही है फिर भी जो कुछ उनके पास होता है उससे ऐसे लोग तीन से चार महीनों तक बिना कामकाज के खाना खा व अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर सकते हैं।

इस समय में किसी भी प्रकार के काम काज की गतिविधियों के स्थिर होने से सारा देश सिथिल सा पड़ गया है। देश में लॉकडाउन लागु हुए आज एक महीने से भी ज्यादा का वख्त गुजर गया इस दौरान देश की सभी औधोगिक गतिविधियां पूरी तरह बंद है जिसकी वजह से हमारे देश के बाजारों में उपलब्ध सभी तरह के सामानों के उत्पादन से लेकर कच्चे माल के उठान नहीं होने से चीजों के बनने का सिलसिला विल्कुल से ठप है। आटा, दाल, चावल जैसी मूलभूत इंसानी आवश्यक वस्तुएं तो हमारे किसानों भाइयों द्वरा पैदा कर लिए जाने से गाँवो के खेत खलिहानों में काम नहीं रुक पाया, इसके आलावा हमारे फ़ूड कॉर्पोरेशन की गोदामों में इतनी मात्रा में आनाज भरी पड़ी है कि हमारा देश भारत पूरे विश्व के लोगों को पाँच वर्षों तक खिलने में सक्षम है लेकिन यदि हम बात करें अन्य रोजमर्रे जी जरुरी वस्तुओं की तो उसमे साबुन, तेल, मंजन, दवाइयां, कपडे जैसे अन्य रोज मर्रे की जरुरी आवशकताओं जैसी वसुओं की तो उन सभी चीजों के उत्पादन औधोगिक क्षेत्र के कल-कारखानों में ही तैयार होने से वहां के काम काजो पर प्रभाव तो पड़ेगा ही।
वहीं पर एक किसान अपने खेत में गन्ना उत्पादन तो कर सकता है लेकिन उन गन्नों से बनने वली चीनी एवं चीनी से बनी वस्तुएं एवं कपडे जैसी सभी चीजें मिल और कारखानों में ही तैयार किये किये जाने से ऎसी अवस्था में कारखानों में तैयार किये जाने वाले मालो के उत्पादन लॉकडाउन के कारण पूरी तरह से ठप पड़ा है। यदि आगे आने वाले दिनों में देश में फिलहाल बंद पड़े मिल कारखानों को मुजदूरों को उनके घरों से लाकर उत्पादन यथा शीघ्र चालू करके आगे आने वाले दिनों में पैदा होने वाली स्थिति को समय रहते ही संभाला जा सकता है।
इसके लिये यदि अभी से हम तैयारी नहीं करेंगे तो इन सभी तरह के वस्तुओं का अचानक से अकाल पड़ना स्वाभाविक सी बात है और ऐसी अवस्था में मौका परस्त लोग इस वख्त का फायदा उठाने से नहीं चूकेंगे। और एक रूपये दाम की वस्तु को पांच रुपये में बेचने में आमादा हो जायेंगे और फिर देश में एक बार अफरा-तफरी जैसा माहौल पैदा होते देर नहीं लगेगी, इसलिये हमें ऐसी इस्थिति पैदा ही न होने दिया जाये कि जिससे छोटी पुंजिगत कारोबारी लोग जिनके के पास उनके संचित धन अब तक लॉकडाउन होने से काम काज के जरिये होने वाली कमाई बंद होने के कारण संचित धन भी खत्म हो गये हैं। उनके काम काज कर कमाई करने का सिलसिला जितनी जल्दी हो सके पुनः शुरू किया जा सके और कुछ भी हो अभी पुरे देश में बन्द पड़े मिल कारखानों को तुरंत चालू करके उनमे काम करने वाले लोगों को उनके घरों से लाकर काम-धंधे की रफ्तार को पुनः पूर्वत सुचारू किये जाने की बहुत आवश्यकता है।







