जिला, जज्बात और जनकल्याण

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दिलीप अग्निहोत्री
प्रत्येक जिले की अपनी कोई न कोई विशेषता होती है। ये बात अलग है कि लोग उसे कितना पहचानते है या उसे कितना उसे आगे बढाते है। लेकिन इसमें संदेह नहीं कि जब एक बार जब किसी उत्पाद के लिए संबंधित जनपद की पहचान बन जाती है, तब उसके प्रति स्थानीय लोगों के जज्बात जुड़ जाते है। इसे वह मजबूत होता देखना चाहते है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश की यात्रा के दौरान इस तथ्य को बखूबी समझा। उन्होंने पहचान के धूमिल होने से उतपन्न हुई निराशा को देखा। जिसके प्रतिकूल प्रभाव स्थानीय अर्थ व्यवस्था पर भी पड़े थे। रोजगार के अवसर कम हुए। युवकों को दूसरे प्रदेशों में रोजगार के लिए पलायन करना पड़ा। इसीलिए योगी ने उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले को अपनी पहचान वाले उद्योग विकसित करने का अभियान चलाया। इसमें समय समय पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू,और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सहभागी बने। रामनाथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में  एक जिला एक उत्पाद समिट का शुभारंभ किया। वह इससे प्रभावित हुए। यह स्वीकार किया कि जिस तरह यहां का माहौल बदल रहा है, और  निवेशक आ रहे हैं उससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर की हो सकती है। राष्ट्रपति ने पच्छत्तर जनपदों के उत्पाद की प्रदर्शनी में गहरी रुचि दिखाई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बना है। निवेशक लगातार आ रहे हैं। वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट से प्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी। इससे हर साल पांच लाख युवाओं को अपने जिले में अपने गांव में रोजगार मिलेगा। प्रदेश सरकार हर संभव प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। यूपी सरकार ने खुद स्टार्टअप के लिए ढाई सौ करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
मुख्यमंत्री योगी ने ठीक कहा कि आज जापान और थायलैंड से ज्यादा संभावनाएं यूपी मे हैं। उत्तर प्रदेश के पहले ही स्थापना दिवस समारोह में ओडीओपी वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट लागू किया। अब हर गांव में कोई न कोई काम शुरू होगा।  सिर्फ पांच महीने में ही इन्वेस्टर्स समिट को जमीन पर उतारा गया है। योगी सरकार विश्वकर्मा  श्रम सम्मान योजना लागू करेगी। जिससे कि श्रमिकों को सम्मान मिलेगा।
 समिट में आठ सत्रों में एग्रो एंड फूड्स, क्रेडिट एंड फाइनेंस, क्राफ्ट एंड टूरिज्म और हैंडलूम एंड टेक्सटाइल क्षेत्र की चुनौतियों एवं अवसरों पर ओडीओपी उत्पादकों के साथ चर्चा होगी। इस दौरान उद्यमियों को मार्केटिंग के तरीके, गुणवत्ता सुधारने की तकनीक, प्रशिक्षण आदि से जुड़े बिंदुओं की जानकारी दी जाएगी।
ओडीओपी के तहत चिह्नित उत्पादों के उत्पादन से लेकर बिक्री तक की जानकारी मुहैया कराने के लिए सरकार ने एक वेबसाइट विकसित की है जिसका शुभारंभ राष्ट्रपति करेंगे। इसके अलावा हस्तशिल्पियों की समस्याओं के निवारण और उनकी जिज्ञासाओं के समाधान के लिए निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के लखनऊ स्थित कार्यालय में स्थापित किये गए टोल फ्री कॉल सेंटर का भी स्थापना की गई है।
 राष्ट्रपति की उपस्थिति में पांच एजेंसियों व कंपनियों के साथ एमओयू  किये गए।ह ओडीओपी के उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री की भी सुविधा मिलेगी। लघु उद्यमियों को बाजार से पूंजी जुटाने का जरिया सुलभ कराने के लिए मुंबई स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के साथ भी एमओयू हुए। हस्तशिल्पियों को जीरो इफेक्ट-जोरी डिफेक्ट सिद्धांत के आधार पर अपने उत्पाद तैयार करने में मार्गदर्शन देने के लिए  क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ भी करार हुआ। स्प्ष्ट है कि जिला स्तर पर योगी सरकार ने आधारभूत ढांचा और प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करने के बाद ही क्रियान्वयन की दिशा में कदम बढ़ाए है। इस योजना की सफलता से प्रदेश की आर्थिक ही नहीं सामाजिक तस्वीर भी बदल जाएगी। युवकों को रोजगार के लिए जब बाहर नहीं जाना पड़ेगा ,तब उनको परिवार के साथ ही रहने का अवसर मिलेगा। आर्थिक आवश्यकताओं की भी पूर्ति होगी। यह अभियान उत्तर प्रदेश की बीमारू छवि को बदलने में सहायक होगा।

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