बचपन जीवन की प्राथमिक अवस्था है, यह संवेदनशील भी है और साथ ही बहुत महत्वपूर्ण भी, सच यह है कि इसी काल में भावी जीवन की गणन होती है। इसमें बच्चों का स्वास्थ्य, अध्ययन, संस्कृतिक होना जैसी बातें मुख्य हैं। इन पर बच्चों को ध्यान नहीं देना होता है क्योंकि उनकी तो यह मुक्त अवस्था है बिना किसी फिक्र चिंता के मस्ती भरा जीवन।
ध्यान देना होता है उसके माता-पिता एवं अभिभावकों को, इनकी देखरेख में वह पलते हैं वह भावी जीवन की ओर अग्रसर होते हैं। वर्तमान समय में इस सोच को लेकर कुछ बदलाव आया है क्योंकि बेहद छोटी उम्र से ही शिशु को आया एवं नौकरों व क्रेच के भरोसे छोड़ देते हैं। इसके बाद थोड़ा और बड़े होने पर उनको छात्रावासों में भेजा जाता है।

वास्तव में यह सभी जगह दावे कुछ भी करें लेकिन पूर्णतया व्यवसायिक होती हैं जो अपना काम किसी लगाव से नहीं बल्कि वेतन मुनाफे को देखकर करती हैं। सभा विकास से कोसों दूर होता है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह आह्वान है कि बच्चों के भविष्य निर्माण में लोगों को भागीदार बनना होगा।
बात तो उन्होंने बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान का शुभारंभ करते हुए कही लेकिन सच तो यह है कि उनका कथन बचपन के सभी पहलुओं को समझता है, जो माता एवं पिता अपने बच्चों को शुरू से ही अपने से दूर रखते हैं। उनका प्रणाम बहुत सुखद नहीं होता बल्कि बच्चे का व्यक्तित्व बुरी तरह से प्रभावित होता है।
इस संबंध में हमारे संयुक्त परिवार की प्रथा बहुत ही कारगर होती थी, जिसमें बच्चा कभी अकेलापन महसूस नहीं करता था। तब स्वाभाविक रूप से उसका तीव्र विकास भी होता था। केवल सुख सुविधा उपलब्ध करा देने से ही अभिभावक का उत्तरदायित्व पूरा नहीं होता है बच्चे के साथ तारतम्य बनाएं रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह होने पर ही उसमें भावी जीवन के लिए आवश्यक संस्कारों का बीजा- रोपण किया जा सकता है। संस्कार नहीं होते हैं तो जीवन वैसे ही उद्देश्य रहित हो जाता है। समाज के लिए इससे बड़ी क्षति और कुछ नहीं हो सकती, ऐसे में मुख्यमंत्री का आह्वान गंभीरता के साथ ध्यान दिए जाने योग्य है।








2 Comments
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