पोर्न शुड बी बैन
जी के चक्रवर्ती
हमारे देश मे आप और हम में से कितने लोगों ने कभी क्या सोचा भी होगा कि दुष्कर्म जैसे कृत्यों पर फांसी जैसी शख्त सजा होने के बावजूद अभी भी समाज के व्यभिचारियों पर इसका कोई भी असर होता नही दिख रहा है बल्कि इस तरह के कृत्य हमारे समाज मे दिन प्रतिदीन और भी ज्यादा बढ़ते चले जा रहे है। दरअसल हमारे देश मे बहु-बेटियों या महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचारों एवं बलात्कारों जैसे जघन्य अपराधों में अधिक जोर अपराधियों को सजा दिये जाने तक ही सीमित रहती है।
सवाल उठता है कि क्या सभी दोष केवल अपराधी का ही होता है? शायद कुछ न कुछ दोष हमारा भी हो होगा खैर यदि ऐसा ही मान भी लिया जाये कि दोष केवल अपराधियों का ही होता है लेकिन इसमे एक और सवाल का उठना लाजमी है कि अक्सर ऐसा ही देखने मे आता है कि हम उन कारको को नजर अंदाज कर देते हैं कि आखिर हमारे समाज मे इस तरह की प्रवृतियों के पैदा होने के कारण एवं कारकों पर किसी का ध्यान नही जाता है। आज हमारे समाज के कुछ लोग जिसमे मुख्यतः नौजवान युवक-युवतियों के अलावा अधेड़ उम्र के लोगों में इंटरनेट के माध्यम से परोसे जाने वाली पोर्न वेबसाइट्सों से इस तरह की सेक्स विकृतियां पैदा होना स्वाभाविक है।
हजारों की संख्या में ऐसे पोर्न वेबसाइट्स हमारे ज़माज के बच्चों, किशोरों एवं युवाओं के मन मष्तिष्क में जो विकृतियां उत्पन्न कर रहीं है, इन विकृतियों का खुलासा सरकार के ही आंकड़े खुद बयां करते हैं कि देश मे प्रति 15 मिनट में एक महिला दुष्कर्म की शिकार हो जाती है।
दूसरी ओर, हम इस तथ्य से भी इनकार नहीं कर सकते हैं कि देश में सस्ते स्मार्ट फोन, सस्ते इंटरनेट डेटा, मुफ्त वाई-फाई जैसी सुविधाओं के आ जाने के बाद से जहां समाज के आम लोगों की अनेकों तरह की कई मुश्किलें जरूर आसान हो गई हैं लेकिन वहीं दुर्भाग्य से इंटरनेट डेटा की सहज उपलब्धता के करण एसे पोर्न साइडें एवं अश्लील वीडियो चित्रों के आदान-प्रदान बहुत तेजी से हमारे समाज मे फैला है लेकिन मौजूदा समय मे सरकार द्वारा इन साइडों पर लगये गये प्रतिबंधों से कुछ रोक अवश्य लागी है लेकिन जो कि अभी भी न काफी है।
आज से चार-पांच वर्षों पहले इंटरनेट डेटा की प्रति व्यक्ति खपत औसतन 1.5 जीबी प्रतिमाह हुआ करती थी, वहीं पर यह आज वर्तमान समय मे बढ़ कर लगभग 10 जीबी प्रतिदिन से भी अधिक हो गई है। गूगल ट्रेंड्स के वर्ष 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 90% इंटरनेट यूजर्स ने एक माह में कम से कम एक बार पोर्न या पोर्न जैसे शब्दों को सर्च किया है। एक दूसरी रिपोर्ट यह दर्शाती है कि अश्लील वीडियो देखने वाले लोगों में से 54% हमारे भारतीय लोग है।
हमारे समाज में फैले इस तरह की व्यभिचार और व्यभिचरियों पर अंकुश समाज के लोगों की सहभागिता से लगा कर हम अपने समाज के बच्चों-युवाओं में व्याप्त होने वाले इन विकृतियों से उन्हें बचा सकते हैं जिसके लिये पोर्न साइट्सों एवं सामग्रियों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा कर इस दिशा में और भी कुछ करने की आवश्यकता है







