कोरोना वायरस से भारत को रहना होगा सावधान

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कोरोना वायरस इस समय दुनिया का सबसे बड़ा संकट बना हुआ है लोग इस कदर डरे हुए हैं कि लोग एक दूसरे देश जाने से भी कतराने लगे हैं। कोरोना वायरस से वैसे तो चीन बेहद बुरी तरह प्रभावित है जहां हज़ारों से अधिक लोग इसके शिकार हो चुके हैं तथा वहां के वुहान प्रान्त से अन्य देशों को जाने वाले लोगों के जरिये इसके फैलने की आशंका है, भारत में भी इसकी आहट सुनने को मिलने का तथ्य वास्तव में चिंताजनक है। देश के सबसे शिक्षित राज्य केरल में इसके संक्रमण के तीन मामले सामने आने के बाद वहां राजकीय आपदा घोषित कर दी गई है तो दिल्ली में भी पांच लोगों में इसके लक्षण दिखाई दिए हैं।

किसी भी अनहोनी को टालने के लिये हम हर संभव प्रयास तो जरूर करते हैं लेकिन कुछ चीजें हमारे इन प्रयासों के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिशाली होती हैं। इसलिये संभव है कि आने वाले दिनों में इसे लेकर कुछ अप्रिय समाचार सुनने को मिलें पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब ऐसी बीमारियों का अचानक उत्पन्न हो जाना सामान्य होता जा रहा है जिनको पहले नहीं सुना गया हो। आश्चर्य यह है कि ऐसी बीमारियां अधिक घातक साबित हो रही हैं।

कभी पशुओं-पक्षियों से तो कभी पेड़-पौधों तक से ऐसी बीमारियां पैदा एवं विकसित होती हैं और हमारे मेडिकल साइंस को चुनौती देती रहती हैं। चुनौती भी इस तरह की कि इसका स्थाई इलाज खोजने में वर्षों लग जाते हैं और तब तक कोई नई बीमारी अपना प्रकोप लेकर प्रकट हो जाती है। ऐसे में जरूरी है कि कुछ न कुछ निरोधात्मक तैयारियां इंसानों को भी करनी चाहिये।

बात देखने में महत्वपूर्ण भले ही न लगे लेकिन कहीं न कहीं इसका असर भी पड़ता जरूर है। कोराना का प्रकोप बढ़ने के बाद चीन में अपने यहां नॉन वेज के खाने पर रोक लगाने की सलाह लोगों को दी है। नॉन वेज के अन्य नुकसानों के बारे में पहले ही कहा जा रहा है लेकिन अब कोराना का मामला भी इससे कहीं न कहीं जुड़ गया है। इसलिये यह भी सही है कि जीवन शैली भी रोगों को रोकने या उनके बढ़ने के जिम्मेदार होती है।

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