जलवा हाउडी मोदी का: विदेश से बनाया पाक पर दबाव

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जी के चक्रवर्ती

टेक्सास में हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के छाये रहने के अलावा डोनाल्ड ट्रंप के लिए ह्यूस्टन आना एवं प्रधानमंत्री मोदी को “फादर ऑफ़ इंडिया” कहा जाना इसके साथ ही देश-विदेशी खबरों के सुर्खियों में छाए रह कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेश वापस लौट आये। लेकिन उन्हें जो बड़ी कामयाबी मिली वह यह कि विदेश की जमीन से पाक पर कूटनीतिक दबाव बनाने में वह कामयाब रहे, अमेरिका ने पाक को कश्मीर मुद्दे पर बुरी तरह से लताड़ा।

अमेरिका के टेक्सास शहर में हुए इस कार्यक्रम में मीडिया से लेकर ट्रंम्प तक बहुत रोमांचित दिखे। लेकिन भारतीय प्रधान मंत्री की अमेरिकी यात्रा सफल या असफल रहा इस विषय में हमारे देश के प्रत्येक व्यक्ति की राय या विचारों का अलग-अलग होना स्वाभाविक सी बात है। कुछ लोगों ने भारत जैसे देश के एक सत्तासीन प्रधान मंत्री द्वारा दूसरे देश के चुनावी कैम्पेन में शिरकत करने के जाना एक छोटे स्तर के कृत्य होने के साथ ही साथ अपने पद की गरिमा एवं मर्यादा के विपरीत किया गया कार्य माना जा रहा है।

यह एक अलग बात है कि हमारे देश मे मोदी को लेकर लोगों की राय और सोच अलग-अलग हो सकती है लेकिन यदि हम यह कहें कि मोदी ही क्या दुनिया के किसी भी देश के प्रधानमंत्री हो चाहे राष्ट्रपति के प्रति उस देश की सम्पूर्ण जनता एक मत होना या उसके पक्ष में खड़ा दिखाई देना जरूरी नही है हां यह बात अलग है कि किसी विशेष मुद पर वहाँ की जनता और सरकार दोनों एकमत हो।

अमेरिकी की एक मीडिया संस्थान “यूएसए टुडे” ने “हाउडी मोदी” कार्यक्रम को खबर की हेड लाइन बनाते हुए लिखा है कि मोदी-ट्रंप का ब्रोमांस है। ब्रोमांस का अर्थ दो भाइयों का आपसी भाईचारा है। इस कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने ट्रंप को अपना और भारत का दोस्त बताया है ठीक इसके बाद ट्रंप जब मंच पर संबोधन के लिेए आए तो उन्होंने भी पीएम मोदी की प्रशंसा की। वैसे देखा जाए तो अमेरिका द्वरा अपने देश में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में प्रचार के लिए हिंदुस्तान के किसी भी प्रधानमंत्री को अपने यहाँ बुलाये जाने का आमंत्रण शायद पहली बार ही देखने में आया है।

दुनिया के इस शक्तिशाली लोकत्रांतिक देश के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को लेकर अमेरिका में काफी तनाव है कियुंकि ट्रंप के ईगो की वजह से अमेरिका को शायद बहुत तरह के नुकसान उठाना पड़ा है।

टेक्ससास के इस कार्यक्रम में उपस्थित सभा को संबोधित करना शायद दोनों देशों के रास्ट्राध्यक्षों के लिए ही फायदेमंद थे। यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका की टेक्‍सॉस ऐसा राज्‍य है, जहां पर हमेशा डेमोक्रेटिक का प्रभुत्‍व रहा और यहां पर वसे भारतीयों की संख्‍या भी अधिक होने के करण अमेरिका में वर्ष 2020 होने वाले राष्‍ट्रपति चुनाव के दौरान यहाँ पर रह रहे एशियाई मूल के लोगों की खासकर अमेरिकी भारतीयों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

अब जब हमारे प्रधानमंत्री जी भारत वापसी कर चुके हैं तो इसमे यह बात देखा जाय कि मोदी के इस दौरे से हमारे देश को क्या हासिल हुआ है? इस बात पर कुछ लोग जैसे प्रोo राठी के अनुसार भारत के कश्मीर पर 370 के मुद्दे पर किसी अन्य देश के हस्तपक्षे उसे मंजूर नही है इस बात को दुनिया के समक्ष रख्खा। वहीं आदिति फ्रंनांडिस के अनुसार ट्रंम्प ने भारत की ओर से किसी भी बात को स्वीकार नही किया। इसके साथ ही साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत मे वहां के कंपनियों को भारत मे निवेश करने के लिए भाषण के माध्यम से किया गया आवाह्न में भी कमियाबी नही मिली।

वही दोनों देशों के मध्य व्यपारिक रिश्तों को लेकर ट्रंम्प ने कहा कि जल्द ही हमारे और भरत के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। वही ट्रंम्प द्वरा पाकिस्तान को भी कोई छूट नही दी गई। अब यहाँ यह प्रश्न भी उठता है कि आखिरकार भारत के पक्ष में कौन सी बात रही उसमे यदि हम कहे कि एक मात्र यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।

क्‍योंकि अमेरिका में 20 प्रतिशत लोग एशियाई देशों से ही संबंधित हैं। ऐसे में ट्रंप का हाउडी मोदी रैली में आना उनके लिए तो लाभहदयक सिद्ध होगा वैसे तो अंग्रेजी में “How do you do” इसका अर्थ “आप कैसे हैं।” इसके साथ ही साथ प्रधानमंत्री मोदी के नजरिए से ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां उन्हें अमेरिका की आवश्यकता है। उनमें से एक मुद्दा इस क्षेत्र की भू-राजनीति की भी है। प्रधानमंत्री के साथ ट्रंप ने जब सभा को संबोधित किया तो उससे लोगों के मध्य यह संदेश जाएगा कि अमेरिका एवं भारत दोनों भूराजनीति के मुद्दे पर एकजुट हैं, इसलिए यह ना सिर्फ दोनों नेताओं के लिए बल्कि दोनों देशों के लिए भी यह लाभदायक सिद्ध होने वाली ही बात है।

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