विवादों में कराची बिनाले के गड़े मुर्दे

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विवाद न हो तो खबर ही कहाँ बनती है सवाल उठता है कि क्या कला के किसी भी बड़े आयोजन से विवाद का रिश्ता चोली-दामन वाला होकर रह गया है? या कला के नाम पर हम और हमारा समाज अपना सिर्फ सुंदर, कलात्मक और मनभावन चेहरा ही देखना चाहता है? क्या 21 वीं सदी की हमारी दुनिया में अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ कहने सुनने भर का नारा बनकर रह गया है? ऐसे ही बहुत से सवाल हमारे जेहन में तब आते हैं, जब कराची बिनाले के मौजूदा घटनाक्रम जैसी घटनाएं सामने आती हैं। हां, एक और भी नजरिया बनता है इन घटनाओं की प्रतिक्रिया में कि सारे बवाल जान बूझकर पैदा किए जाते हैं, ताकि कार्यक्रम की चर्चा सुर्खियों में रहे।
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बहरहाल बात करते हैं मौजूदा विवाद की, पाकिस्तान के कराची शहर में 26 अक्टूबर से 12 नवंबर तक के लिए कराची बिनाले 2019 का आयोजन किया गया है। विदित हो कि यह इस बिनाले का दूसरा संस्करण है, इस बार के बिनाले का विषय था “डेवलपमेंट फुटप्रिंट ऑन इकोलॉजी” यानी पारिस्थितिकी पर विकास के पदचिन्ह। इसमें अन्य कलाकारों के इंस्टालेशन के साथ ही अदीला सुलेमान का इंस्टालेशन ‘द किलिंग फील्ड्स ऑफ कराची’ भी शामिल था। जिसमें विगत कुछ वर्षों में 440 निर्दोषों की पुलिस मुठभेड़ के नाम पर पुलिस अधिकारी राव अनवार और उनकी टीम द्वारा की जाने वाली तथाकथित हत्याओं का मामला उठाया गया था।
यानी यहां प्रदर्शित 440 पत्थरों को उन तथाकथित निर्दोषों के कब्र के रुप में दर्शाते हुए उन्हें कलाकार की तरफ से श्रद्धांजलि दी गयी थी। साथ ही इस विषय पर एक फिल्म भी वहां दिखाई जा रही थी। जाहिर था कि यह बात कुछ तत्वों को पसंद नहीं आयी और उन्होंने इस इंस्टालेशन को तोड़- फोड़कर रख दिया। हालांकि उसके बाद अदीला और उनके साथियों ने उन टुटे टुकड़ों को एक बार फिर से दुबारा संयोजित भी किया, लेकिन अंतत: प्रशासनिक दबाव व अन्य कारणों से आयोजकों ने इसे हटा ही दिया है।

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