खूंखार आतंकी बगदादी का अंत

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जी के चक्रवर्ती

खूंखार आतंकी संघटन आइएसआइएस ने पूरी दुनिया में अपने ख़ौफ और बर्बरता के पर्याय माने जाने वाले इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानी आइएसआइएस के सरगना अबू-बकर अल-बगदादी के मारे जाने की खबर आने के बाद दुनिया ने एक बार चैन की सांस ली। बता दें कि आइएस ने दुनिया का ध्यान पहली बार उस वक्त अपनी ओर खींचा, जब उसने इराकी शहर मोसुल पर कब्जा कर लिया था और यहां तक कि सद्दाम हुसैन के गृह जनपद तिकरित को अपने झंडे के नीचे कर लिया था। ऐसा माना जाता है कि कई देशों की सेनाओं के आगे उसके टिके रहने के पीछे अल-बगदादी की नेतृत्व क्षमता ही थी।

हिंसक और रूढ़िवादी इस्लामी आंदोलन में विश्वास रखने वाले बगदादी ने अपने कब्जे वाले इलाके में शरीयत के मुताबिक शासन चलाये जाने की घोषणा कर दिया था। इसलिए उसके मारे जाने की खबर निश्चित रूप से आइएस के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

एक समय ऐसा लगने लगा था की क्या यही लोग पूरी दुनिया के बर्बादी का कारण बनने वाले हैं। इसने एक ऐसी जटिल स्थिति पैदा कर रखा था कि आइएस न केवल मैदानी युद्ध मे पारंगत है बल्कि ऐसा आतंकी संगठन है, जिसने अपने विचारों के प्रसार-प्रसार के लिए दूसरे देशों के भोले-भाले युवाओं को अपनी चपेट में लेने की भी कोशिशें करता था। यहां तक कि भारत में भी आइएस के एजेंटों ने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने का जाल रचा फैलाया हुआ था लेकिन यहां के सामाजिक-राजनीतिक माहौल की कारणों से वह ऐसा करने में सफल नही हो पा रहा था। बहरहाल, बगदादी के मारे जाने की खबर ऐसे वक्त आई है जब सीरिया में चल रही लंबी लड़ाई के बीच आइएस जैसी संगठन की प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी थी।

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पहले “ओस्माबिन लादेन” और फिर “बगदादी” जैसे खूंखार आतंक वादियों के मारे जाने की खबर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बहुत बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी कई बार खबर आई कि बगदादी मारा गया लेकिन कुछ दिनों के यह ख़बर निराधार साबित हुईं। अभी कल दिनांक 29 अक्टूबर को अमेरिकी सुरक्षा बल ‘डेल्टा कमांडोज’ ने अपने एक गोपनीय अभियान के दौरान जिस तरह से बगदादी के मौत की पुष्टि हुई उससे फिर एक बार आतंक के पर्याय बने बगदादी और इससे पहले ओसामाबिन लादेन जैसे आतंकियों के आतंक से दुनिया को मुक्ति मिली अवश्य मिली है लेकिन यहां एक प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसे दुर्दांत आतंकवादी लोगों के इस हद तक पहुंचने देने के लिए कौन जिम्मेदार है?

दरअसल अधिकतर यह देखने मे आता है कि जब समाज मे कोई छोटी-मोटी घटनाएँ घटित होती है तो किसी को भी इस बात की परवाह नही होती है कि आज यह भले ही यह छोटी है लेकिन आगे भविष्य में बहुत बड़ी भी हो सकती है। इसी तरह समाज के अनेकों बातों में लोग बहुत छोटी सी चीज है अरे चलो आगे भविष्य में देखा जायेगा कह कर उसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन वही छोटी सी चीज या बात न जाने किस रूप में आपके लिए नासूर बन जाये। ऐसे दहशत गुर्दो ने न जाने कितने लोगों की जान लेचुकी है और न जाने कितने परिवार तबाह हो चुके है। इनके कारनामो से समाज के अन्य लोग दहशत में अपने दिन गुजरने के लिये मजबूर हो जाते हैं।

गौरतलब है कि बगदादी के मारे जाने की खबरों के तुरंत बाद यह जानकारी का सामने आना कि आइएस ने अब अब्दुल्लाह कार्दश को अपना सरगना चुन लिया। अब यहां यह प्रश्न उठता है कि इस बात की क्या गारंटी है कि अब्दुल्लाह कार्दश आने वाले वक्त में बगदादी जैसा खूंखार आतंकवादी बनकर लोगों में दहशत पैदा नही करेगा।

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