कला व कृषि की स्थानीय पहचान

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना व्यापक परिप्रेक्ष्य में लागू की थी। यहां प्रत्येक जिले की अपनी विशेषता रही है। यह विशेषता उस जिले की पहचान के साथ जुड़ी थी। यह केवल स्थानीय उद्योगों के उत्पाद तक सीमित नही थी। एक जिला एक उत्पाद की मूल भावना यहीं तक सीमित भी नहीं है। इसमें कृषि और लोककला का विषय भी शामिल है। भारत में नाट्यशास्र का इतिहास आदिकाल से रहा है। यहां प्रकृति की भव्यता का गायन सबसे पहले हुआ। इसमें लोक संस्कृति का भी समावेश रहा है। यही कारण है कि हमारे यहां प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट कला है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अनेक प्रतिष्ठित लोककलाकारों को सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि नृत्य और नाट्य अभिव्यक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसलिये कन्या भ्रूण हत्या, दहेज, मादक पदार्थों के सेवन आदि अनेक सामाजिक बुराइयों को दूर करने तथा समाज में स्वस्थ संदेश फैलाने में नाट्य कला का प्रभावी प्रयोग किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से ही संगीत, साहित्य और नाट्य विधाओं का गौरवशाली स्थान रहा है। कला के प्रति जागरूकता लाना और नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना सराहनीय होता है। इसी के साथ विलुप्त हो रही लोक कलाओं के संरक्षण व संवर्धन की आवश्यकता है।

एक अन्य कार्यक्रम में राज्यपाल ने एक जनपद एक उत्पाद की तरह ही एक जनपद एक विशेष फसल प्रोजेक्ट तैयार करने का सुझाव दिया। जिससे जनपद में होने वाली फसल विशेष को प्राथमिकता मिल सके। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की दृष्टि से आज जैविक खेती को बढ़ावा मिलना चाहिए। अत्यधिक कृषि रासायनों एवं उर्वरकों के उपयोग से जमीन पर प्रतिकूल प्रभाव होता है।

खाद्यान्न पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसके प्रति किसानों को जागरूक बनाना चाहिए। जैविक खेती को बढ़ावा देकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। जैविक खेती द्वारा मृदा की प्राकृतिक उर्वरता भी बनी रहती है। पर्यावरण का क्षरण भी न्यूनतम होता है। किसानों के लिए आॅन लाइन फसल उत्पाद बेचने की व्यवस्था उपयोगी साबित होगी। इससे किसान कृषि उत्पादों को आसानी से उपयुक्त बाजार में बेच सकेंगे।

इस तकनीक में बिचौलिए नहीं होंगे। किसान को उनके उत्पाद का पर्याप्त मूल्य मिलेगा। किसानों की आय दोगुनी करने की योजना आगे बढ़ेगी। उत्पादों को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध होगा। उनकी आमदनी में अपेक्षित वृद्धि हो सकेगी। पारम्परिक खेती में नवीनतम तकनीकों का समावेश लाभप्रद होगा। स्वास्थ की दृष्टि से मोटा अनाज लाभप्रद होता है। इसके उत्पादन में लागत भी कम लगती है। इसको भी प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। मोदी सरकार ने मृदा परीक्षण को अभियान के रूप में चलाया था। किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के अनुसार फसलों की बुआई करने,फसल अवशेष न जलाने तथा पर्यावरण बचाने पर भी सजग रहना चाहिए। सरकार प्रदेश के अठारह मण्डलों में किसानों के जैविक उत्पादों को बेचने के लिए मण्डियों में एक स्थान उपलब्ध कराएगी। जिसमें किसान अपने कृषि उत्पादों को सीधे बेच सकते हैं। द मिलियन फार्मर्स स्कूल के माध्यम से किसानों को खेती के बारे में नवीनतम जानकारी कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही है।

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