15वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला का समापन: ‘महसूस कीजिए किताबें बातें करेंगी’ 

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हुआ विजेताओं और मेला सहयोगियों का सम्मान  

लखनऊ, 17 सितम्बर। किसी भी लेखक को मां बनना पड़ता है तब कोई रचना और पुस्तक जन्म लेती है। शब्द जब अठखेलियां करते हैं, जुड़ते-न्त्य करते, मिलते-रूठते-मनाते, हास-परिहास करते हैं तब किताब तैयार होती है। आज पाठको का ध्यान इंटरनेट की तरफ ज्यादा है पर पुस्तक पढ़ने से प्राप्त आनन्द एकदम अलग है। सजग जागरूक लोग तथ्यों के लिए आज भी पुस्तकों पर ही निर्भर हैं।
ये विचार यहां मोतीमहल वाटिका लाॅन राणा प्रताप मार्ग में पन्द्रहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेले में मुख्य अतिथि विधानसभाध्यक्ष डा.हृदयनारायण दीक्षित ने व्यक्त किये। मोतीमहल लान में आठ सितम्बर से जारी पन्द्रहवें पुस्तक मेले का आज समापन दिवस था। आज मेला सहयोगियों को सम्मानित किया गया साथ ही आन लाइन कविता प्रतियोगिता के विजेता अंकित तिवारी व नृत्य प्रदर्शित करने वाले बच्चों को मुख्य अतिथि ने पुरस्कृत किया। इसी के साथ मेले ने अगले वर्ष के लिए विदा ले ली।
मुख अतिथि ने कहा कि आज मोबाइल के दौर में लेखक बहुत बढ़ गया हैं। सोशल मीडिया पर लाखों पोस्ट डाली जाती है। पर गम्भी साहित्य किताबों में ही है। वैदिक काल और फिर छापेखाने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि चार बार जीतने के बाद पांचवीं बार मैं चुनाव हारा तो मुझे बहुत सी किताबें पढ़ने का मौका मिला। पुस्तकों को जीवंत संरचना मानते हुए मुझे तो लगता है मेज पर रखी अनपढ़ी किताबेे शिकायत करती हैं, आप भी इनसे बात करके देखिए तो इनकी जीवंतता आपको भी महसूस होगी।
बिन्दु जैन के संयोजन में चले समारोह में भाजपा नेता भारत दीक्षित, अशोक तिवारी, अनिल तिवारी, संरक्षक मुरलीधर आहूजा ने विचार व्यक्त किए। इससे पहले संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने अतिथियों का स्वागत किया और अंत में आभार संयोजिका आस्था ढल ने व्यक्त किया।
मुख्य मंच पर सुबह मो.मूसा खान अशांत की पुस्तक मर गई संवेदना के बाद कादम्बिनी क्लब इंदिरानगर की स्मारिका विद्योत्तमा का विमोचन हुआ और अनेक महिला रचनाकारों ने रचनाएं सुनाईं। शीला पाण्डेय के संयोजन, डा सुरेन्द्र विक्रम की अध्यक्षता, अखिलेश चमन, नीलम राकेश व डा.हेमंत श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुए स्वरचित कविता पढ़ने के बाल कवि सम्मेलन में शिवांगी सिंह, शिवांश, तनुश्री शुक्ल, अर्जित गुप्ता, इन्द्राक्षी शुक्ल सहित 22 बाल रचनाकारों सहित अश्वित रतन ने रचना पाठ किया।
बाल एवं युवा मंच पर नृत्य गायन का विविध प्रदर्शन का क्रम आज भी चला। विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपने-अपने वर्गों में समराजय, आशी, रुबीना, सरिता, ताविषी, अभिषेक, मोनू, जीतेन्द्र, नायला, सोनम, वरुण, शिवानी, सपना, कुंवर शशि प्रताप, अनुष्का, अनुभा, ऋषा त्रिवेदी, आर्यन, प्रिंस, ज्ञानेन्द्र, अनुराग, आद्या, प्रभाती, प्रणव, वैष्णवी, युक्ता, तृषा, द्रविष, शिविका, मारूफा व शिवांगिनी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। युवा मंच पर अजय प्रसून की अध्यक्षता व आरके सरोज के संचालन में चले लक्ष्य साहित्यिक संस्थान के समारोह में सिद्धेश्वर क्रान्ति, शरद पाण्डेय, रवि सारस्वति, गोबर गणेश, डा.हरि फैजाबादी, अर्जुन सागर, भूपेन्द्र शून्य, अनिल अनाड़ी राजा भइया गुप्ता और ज्योति किरन रतन ने रचनाएं पढ़ीं। मुख्य मंच पर भी देर शाम तहजीब फाउण्डेशन के सौजन्य से आयोजित नई कलम से मुशायरे में कलाम गूंजते रहे।
पति-पत्नी और…..सास
विधानसभाध्यक्ष ने अपने चुटीले अंदाज में कहा- आज तो अपने पति को कैसे मनाएं, इस पर भी किताबें हैं। इसी तरह पत्नियों के लिए आने पति को नाराज न होने दें इस पर भी हैं। मैंने देखा तो नहीं पर बहू से सास नाराज न हो, इसपर भी जरूर किताब होगी।

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