बेहतर होता तुम कोई छोटा लेख लिखते!

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साभार: गूगल

सपने सभी देखते हैं, मगर पूरे किसी-किसी के ही हो पाते हैं। ऐसा नहीं सफल लोगों के सपनों या इच्छाओं में कोई अलग बात होती है। यह भी आम लोगों की तरह ही सपने देखते हैं, बस इनकी लगन इन्हें सोने नहीं देती है। यही वजह है कि यह अपने सपने पूरे कर पाते हैं। इसके विपरीत कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो सपने तो देखते हैं मगर वे बिना कोशिश किए हार मान लेते हैं। ऐसे लोग कभी सही समय के इंतजार में, तो कभी पैसों की कमी या जानकारी के अभाव का रोना रोते रह जाते हैं।

एक शहर में एक छोटा लड़का रहता था। उसके पिताजी शहर के ही एक अमीर सेठ के घर काम करते थे। लड़का अपने पिता को दिन भर सेठ की गाड़ियां साफ करता देखता और सोचता कि मेरे पिता जी इतनी मेहनत करते हैं फिर भी उन्हें वो मान-सम्मान नहीं मिलता जो लोग सेठ को देते हैं। एक दिन लड़के के स्कूल में टीचर ने बच्चों से एक लेख लिखने को कहा, जिसमें उन्हें बताना था कि वो बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं।

उस लड़के ने एक बेहतरीन लेख लिखा और उसमें घर और गाड़ियों की फोटो भी बना दी। शिक्षक ने सभी कॉपियां जांचने के बाद रिजल्ट सुनाया तो लड़के की कॉपी पर बड़े अक्षरों से फेल लिख दिया। जब लड़के ने टीचर से वजह पूछी तो टीचर ने कहा, ‘बेहतर होता तुम कोई छोटा लेख लिखते क्योंकि तुमने जो लिखा है, वो असंभव है।

तुम लोगों के पास कुछ नहीं है इसलिए ऐसा संभव नहीं है लेकिन मैं तुम्हें दूसरा मौका दे सकता हूं। तुम लेख दोबारा लिखो और कोई वास्तविक लक्ष्य बनाओ।‘ लड़का उस कॉपी को लेकर घर गया और उस पर काफी सोचा। अगले दिन वो टीचर के पास जाकर बोला, अगर आप मुझे फेल करना चाहते हैं तो कर दीजिये लेकिन मैं अपने सपने को नहीं बदलूंगा।

बीस साल बाद वही टीचर एक सम्मेलन में मंच पर खड़े एक बेहद कामयाब नौजवान का भाषण बड़े गौर से सुन रहा था। भाषण खत्म होने के बाद नौजवान नीचे आया, उसने टीचर के पैर छुए और उन्हें अपना परिचय दिया। ये वही छोटा लड़का था, जिसे कभी उस टीचर ने फेल किया था। आज वो एक कामयाब बिजनेसमैन बन चुका था, जिसके पास हर वो चीज थी जो उसने बचपन में अपने लेख में लिखी थी।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है :

जरूरी नहीं है कि कोई आदमी जो आपसे बड़ा या समझदार है, वह आपको सबसे सही तरीके से जानता है या आपकी ताकत और कमजोरी को पहचानता है। केवल आप खुद अपनी क्षमता को पहचानते हैं। सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए उस रास्ते पर चल पड़ें।

रास्ते में कई तरह की मुश्किलें आती हैं, मगर इन्हें पार करते हुए जो आगे बढ़ता है, अंत में उसे ही मंजिल मिलती है। ऐसे में अपनी परेशानियों का रोना रोने से बेहतर है, पूरी लगन के साथ आगे बढ़ा जाए और सपने पूरे करने में अपनी ताकत लगाई जाए।

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