मुंबई, 28 सितम्बर 2018: देश के शेयर बाजार में जहां डिमैट खातों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, वहीं पारंपरिक ब्रोकरों के कारोबार में गिरावट जैसी स्थिति है। यह इस तथ्य से भी स्पष्ट होता है कि अपस्टॉक्स जैसे डिस्काउंट ब्रोकिंग फर्म भी शेयर बाजार में निवेशकों की भागीदारी को बढ़ावा दे रहे हैं। वित्त वर्ष 2017-2018 के दौरान 3.76 मिलियन (37.6 लाख) नए डिमैट खाते खोले गए। यह आंकड़ा वर्ष 2007-08 में अपने शिखर पर रहे सट्टेबाजी बाजार के दौरान पिछले रिकॉर्ड 3 मिलियन (30 लाख) से कहीं अधिक था।
हालांकि, शेयर बाजार में प्रवेश करने वाले हजारों नए निवेशक ब्रोकरेज की संपूर्ण सेवाओं से नहीं, बल्कि बट्टा (छूट) देने वाले आढ़तियों (डिस्काउंट ब्रोकर) के कारण आ रहे हैं। बट्टा देने वाले आढ़तिए नेशनल स्टॉक् एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सबसे बड़े भागीदार भी हैं। उदाहरण के लिए अपस्टॉक्स को लें। आखिरी के 15 महीनों में इसने भागीदारी के मामले में तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की। इसमें उल्लेखनीय रूप से 33 प्रतिशत भागीदारी और राजस्व तीसरी श्रेणी के शहरों से आता है और करीब 42 प्रतिशत पहली श्रेणी के शहरों से।
अपस्टॉक्स के सीईओ रवि कुमार कहते हैं, ’’हमारे 70 प्रतिशत से ज्यादा ऑर्डर अपस्टॉक्स प्रो मोबाइल के माध्यम से आते हैं। हमारा मोबाइल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म स्पष्ट रूप से यह इशारा करता है कि तीसरी श्रेणी के शहरों में भागीदारी मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से है।’’ यह स्टॉक मार्केट में तीसरी श्रेणी के शहरों की भागीदारी मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बढ़ने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
वित्त वर्ष 2017-2018 के दौरान अपस्टॉक्स में आये कुल ऑर्डरों में से 98.5 प्रतिशत ऑनलाइन प्राप्त हुये थे, जबकि सिर्फ 1.5 प्रतिशत ऑर्डर ही कॉल-एंड-ट्रेड सुविधा के माध्यम से आए। वित्त वर्ष 2018 में अपस्टाॅक्स के लेनदेन का हर रोज का अनुमानित कारोबार तीन गुना बढ़कर 14000 से 18000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह प्रति दिन 5000 से 6000 करोड़ रुपए के बीच था। अपस्टाॅक्स पार्टनर मॉडल के माध्यम से काम करती है, जो अतिरिक्त खर्चों को बचाने में सहायक होता है।







