नीरज जी के चले जाने से ऐसा लगा कि जैसे एक युग बीत गया है, गीतों का। हिंदी फिल्मों में जो गीत उन्हों ने लिखे, जो मादकता और जो तबीयत उन्हों ने परोसी है, वह अविरल है, अनूठी है । वह बताते थे कि एक बार राजकपूर ने एक गीत में कुछ बदलने पर हस्तक्षेप किया तो उन्हों ने राज कपूर को डांटते हुए कहा कि देखो, तुम अपनी फील्ड के हीरो हो, मैं अपनी फील्ड का हीरो हूं । तुम अपना काम करो, मुझे अपना काम करने दो। और राज कपूर चुप हो कर उन की बात मान गए थे। एक समय एस डी वर्मन जैसे संगीतकारों से भी नीरज टकरा गए थे। देवानंद दो ही गीतकारों पर मोहित थे। एक साहिर लुधियानवी, दूसरे नीरज। ओमपुरी पहली बार जब लखनऊ में नीरज से मिले तो पूरी श्रद्धा से उन के पांव पकड़ कर लेट गए थे। यह उन के गीतों का जादू था।
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