चीन से जीतने के लिए जनता को भी लड़ना होगा

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भारत का दुश्मन नंबर एक चीन ही है। यह ऐसा हिंसक देश है, जो पूरी दुनिया में डुप्लीकेसी की दुकान चलाता है और गुंडई की धौंस जमाता है। भारत के विरुद्ध इस समय उसकी साजिशें तेज हो गयी हैं। वह पहले ही हमारे हजारों किमी क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। हमारे धर्मप्रिय पड़ोसी देश तिब्बत को तो उसने हड़प लिया। अब वह हमें धमकियां दे रहा है। वह हमारी सीमा पर अतिक्रमण कर रहा है। वह पाकिस्तान के साथ मिलकर हमारी आर्थिक नाकेबंदी कर रहा है। वह हमें दुनिया के समक्ष नीचा दिखाना चाहता है। मन बहुत उद्वेलित है। चीन के प्रति दिल में नफरत बढ़ती जा रही है। मैंने बहुत सालों से चीन के सामानों का प्रयोग कम कर रखा है, लेकिन अब मैंने संकल्प लिया है कि एक भी सामान चीन का प्रयोग में नहीं लाऊंगा।
एक कथा सुनता था कि रानी की जान तोते में बसती है। उसी तरह चीन की जान व्यापार में बसती है। अरबों डालर के चीनी सामानों से हमारे देश के बाजार पटे पड़े हैं। उसकी मोबाइल कंपनियों के होर्डिंग और बोर्ड तो गली-गली लगे हुए हैं। चीनी कंपनियों के बोर्ड और विज्ञापन देखकर मेरे मन में चीन के प्रति गुस्सा और घृणा एक साथ बढ़ती है। यह बहुत गंदा देश है। मानव मूल्यों से इसका कोई वास्ता नहीं, लोकतंत्र का तो यह देश हत्यारा है। माओवाद तो हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी काल बना हुआ है। नक्सलवादियों को चीन से खाद-पानी मिल रहा है। पूर्वात्तर के राज्यों में हिंसा को भड़काने में चीन की साजिश किसी से छुपी नहीं है।
जाहिर है, चीन के खतरनाक इरादों से देश की सेना सीमा पर लड़ रही है। परंतु चीन ऐसे नहीं हारेगा। वह राक्षस है, उसे हराने के लिए अब एक लड़ाई हर भारतीय को लड़नी होगी। यह लड़ाई आर्थिक मोर्चे की है। चीन की कमर तोड़ने के लिए उसके उत्पादों का प्रयोग भारतीयों को बंद करना होगा। यह बहुत कठिन नहीं है। जब भी कोई उत्पाद खरीदें, उस पर यह जरूर देख लें, कि वह बना कहां है। चीन से जीतने के लिए उसके बनाये सामानों का बहिष्कार करें।

रोशन प्रेमयोगी

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