पिता जी! मैं भी बनूंगा ड्राइवर

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एक शहर में कलेक्टर के घर के सामने एक ड्राइवर ने घर खरीद लिया। दोनों के दो दो बच्चे थे । एक दिन मोहल्ले में आइसक्रीम बेचने वाला आया तो ड्राइवर के बच्चों ने बोला कि हमें आइसक्रीम खानी है।  ड्राइवर ने झट 20 रूपये दिये और कहा जाओ खा लो। आइसक्रीम वाला कलेक्टर के घर के सामने पहुंचा तो उसके बच्चों ने भी आइसक्रीम खाने के लिए कहा कलेक्टर बोला बच्चों यह डर्टी होती है  अच्छी नहीं है बिमार हो जाओगे।  बच्चे बेचारे मन मसोस कर बैठ गए। दो दिन बाद रेवड़ी गजक वाला मोहल्ले में आया फिर ड्राइवर के बच्चों ने गजक खाने की ईच्छा जताई तो ड्राइवर ने झट 20 रूपये दिये और बच्चों ने गजक खा ली।
अब गजक वाला कलेक्टर के घर के पास पहुंचा तो उसके बच्चों ने भी गजक खाने की जिद करी कलेक्टर ने कहा कि बेटा इस पर डस्ट लगी होती है बिमारी हो जाती है बच्चे फिर मुंह लटका कर बैठ गए।  कुछ दिन बाद मोहल्ले में मदारी आया जो बंदर नचा रहा था ।  ड्राइवर के बच्चों ने कहा हमे बंदर के साथ खेलना है।  ड्राइवर ने मदारी को 50 रूपये दिए और थोड़ी देर बच्चों को बंदर से खेलने को कह दिया। बच्चे खुश।
अब कलेक्टर के बच्चों ने भी कह कि उन्हें भी बंदर के साथ खेलना है  कलेक्टर बोला अरे कैसी गंदी बात है बंदर जानवर है काट लेता है यह कोई खेलने वाली चीज है ?  बच्चे बेचारे फिर चुप चाप बैठ गए ।  कुछ दिन बाद  कलेक्टर ने अपने बच्चों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं तो बच्चों ने तपाक से उत्तर दिया
ड्राइवर

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