लखनऊ 25 सितम्बर। उप्र युवा कांग्रेस मध्य जोन के अध्यक्ष श्री अंकित परिहार के नेतृत्व में आज युवा कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र एवं विश्व प्रसिद्ध शिक्षा के केन्द्र बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय(बीएचयू) में स्वयं उनकी मौजूदगी में पुलिस प्रशासन द्वारा केन्द्र/प्रदेश सरकार के इशारे पर शांतिपूर्ण धरना दे रहीं छात्राओं पर बर्बर लाठीचार्ज एवं फायरिंग की घटना के विरोध में विरोध मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का पुतला फूंका गया एवं सिर मुंड़वाकर विरोध दर्ज कराया।

यह जानकारी देते हुए लखनऊ लोकसभा युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बताया कि प्रदेश युवा कांग्रेस कार्यालय से सैंकड़ों युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में घटी छात्र-छात्राओं पर किये गये अमानवीय एवं तानाशाही घटना के विरोध में केन्द्र एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए जीपीओ की ओर बढ़ रहे थे जहां भारी पुलिस बल का प्रयोग करते हुए रास्ते में रोका गया। जहां युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर विरोध किया गया एवं युवा कांग्रेस के मोहम्मद सईद गुड्डू, श्री अमीर हमजा सिद्दीकी एवं श्री जितेन्द्र तिवारी ने वाराणसी में छात्र-छात्राओं पर हो रहे अत्याचार को शर्मनाक बताते हुए अपना सिर मुड़वाकर विरोध प्रकट किया।
इस मौके पर युवा कांग्रेस मध्य जोन के अध्यक्ष श्री अंकित परिहार ने कहा कि खुद को धर्म का ठेकेदार बताने वाली प्रदेश की योगी सरकार के इशारे पर नवरात्र के पवित्र माह में छात्राओं पर लाठियां और गोलियां बरसायी जा रही हैं। उनके साथ अत्याचार किया जा रहा है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देकर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। शिक्षा के केन्द्र को जंग का मैदान बनाया जा रहा है और शिक्षा के मंदिर को दूषित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश सरकार लेाकतंत्र की हत्या करने पर अमादा है। श्री परिहार ने मांग की है कि छात्र-छात्राओं पर लाठी-गोली बरसाने के दोषियों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जाय एवं लगभग 1200 छात्र-छात्राओं पर फर्जी तरीके से जिस प्रकार आपराधिक मुकदमें दर्ज किये गये हैं उन्हें प्रदेश सरकार तत्काल बिना शर्त वापस लेते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति को तत्काल बर्खास्त किया जाय।
श्री तिवारी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से प्रदेश सचिव एवं लखनऊ के प्रभारी श्री विशाल सिंह राजपूत, दिनेश सिंह, शाहबाज खान, विशाल तिवारी, रितेश बाल्मीकि, हंसराज सिंह चौहान, ऋषभ मिश्रा, उमेश यादव, सूरज द्विवेदी, राजा हैदर, मो. जुनेद, कार्तिकेय शुक्ला आदि सैंकड़ों युवा कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल रहे।
…आज के PM गलियों से रास्ता बदल कर निकल गये:राजबब्बर
लखनऊ 25 सितम्बर। भारत रत्न-पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गाँधी जी का जन्म शताब्दी वर्ष समारोह पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में विभिन्न 10 स्थानों पर वृहद रूप से इन्दिरा जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सेमिनारों का आयोजन किये जाने के तहत आज जनपद वाराणसी के चौधरी रामनाथ शोध संस्थान, नरिया सुन्दरपुर, निकट- बी.एच.यू. में जन्म शताब्दी वर्ष समारोह आयोजित किया गया।
समारोह को सम्बोधित करते हुए अभा कांग्रेस कमेटी के महासचिव-प्रभारी उप्र श्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इन्दिरा जी संघर्ष एवं लोककल्याण की प्रगतिशील राजनीति की मिसाल थीं। इन्दिरा जी की जुझारू राजनीति और गांधी-नेहरू की भारतदृष्टि की वैचारिक विरासत को जो कांग्रेसी आत्मसात करेगा वह कभी हिम्मत नहीं हारेगा और वह हिम्मत से खड़ा हो गया तो कांग्रेस के सम्मान और फिर से उत्कर्ष की लड़ाई जीतने से कोई ताकत रोक नहीं सकती। उन्होने कहा कि हमारे लिए भारत माता की जय के मायने हैं। भारत भूमि की हर संतान की जय, चाहे वह किसी धर्म, जाति, भाषा में विश्वास रखता हो। इन्दिरा जी हर भारतवासी के लिए संघर्ष की प्रतीक थीं। गांधी-नेहरू ही नहीं, पटेल और मौलाना आजाद की भी विरासत धर्म-जाति की राजनीति नहीं स्वीकार करती। इन्दिरा जी भारत के हर बाशिन्दे के लिए जीतीं और लड़ती रहीं और उसी सैद्धान्तिक संघर्ष भावना से बलिदान हो गईं। उनमें नेतृत्व की अद्भुत समायोजन शक्ति थी जिसके कारण वह अपनी अग्रज पीढ़ी, हम उम्र पीढ़ी और युवा नेताओं के लिए सहज थीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर व केन्द्रीय लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. पुरूषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि इन्दिरा गांधी जी संघर्ष एवं निर्माण दोनों की प्रतीक थीं। उन्होने द्विराष्ट्रवाद को खंडित कर बंग्लादेश का निर्माण एवं सन 1971 की जीत दिलाई, कांग्रेस में प्रगतिशील नीति विरोधी खेमे को धूल चटाई तो वैज्ञानिक संस्थानों की नेहरू की परम्परा को बढ़ाते हुए पहली बार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग बनाकर किसी वैज्ञानिक के अधीन रखने की शुरूआत की। भारत को आणविक शक्ति बनाया। अंतरिक्ष कार्यक्रमों को तेज गति दी। हरित क्रान्ति को साकार किया। आज धर्म स्थल तोड़ने की राजनीति होती है तो इन्दिरा गांधी ने बैंकों और जमीनों की इजारेदारी तोड़ने की राजनीति की। आपातकाल के बाद हमने उनके खिलाफ जेएनयू में प्रदर्शन किया तो उनमें खड़े होकर हमसे संवाद की हिम्मत भी थी। कांग्रेसी उनके संघर्षों की अपनी विरासत का अलख जगा लें तो कांग्रेस को कोई हरा नहीं सकता। इसके लिए जरूरी है कि कांग्रेस में टिक पाने के लिए उस नेहरू की भारत की खोज पढ़ना अनिवार्य हो जाय, जिसने आधुनिक भारत ही नहीं, बेटी इन्दिरा जैसा जननेता भी गढ़ा। यह आपका दोष है कि ऐसा करने पर टिकट मांगना तो दूर टिकट बांटने वालों का संकट न हो जाय, लेकिन देश को जोड़ने वाले विचारों की अपनी समृद्ध विरासत को आत्मसात करने की शुरूआत तो कहीं से आपको करनी ही होगी।उप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री राजबब्बर सांसद ने कहा कि इन्दिरा जी जेएनयू में विरोधी प्रदर्शन में मुड़कर पहुंचने की हिम्मत रखती थीं लेकिन आज के प्रधानमंत्री गलियों से रास्ता बदल कर निकल गये लेकिन बीएचयू में प्रदर्शन कर रहीं काशी की बेटियों के बीच पहुंचने की हिम्मत उनमें नहीं दिखाई। परिणाम आपके सामने है कि बेटी बचाओ का नारा बेटी पिटवाओ में बदल गया। इंदिरा जी की विरासत छद्म राष्ट्रवाद के विपरीत उत्कट देशभक्ति की विरासत है।








