मानवता को झकझोर देने वाली है संविदा कर्मियों की दास्ताँन : रायबरेली से जुड़े एक अपंग संविदा कार्मिक ने बताई बैठा कहा विद्युत लाइन पर काम करते हुए अपंग अब बिजली विभाग ने कर दिया बेरोजगार, चार अन्य संविदा कार्मिकों का दर्द विद्युत दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नियों को सर्विस से किया बाहर, परिवार सड़क पर
लखनऊ, 31 मई : उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के साप्ताहिक वेबीनार में संविदा कार्मिकों ने अपने दिल का दर्द बयां किया। बिजली लाइनों पर काम करते हुए दुर्घटनाओं में अपंग हुए और नौकरी से निकाले गए कार्मिकों ने अपनी व्यथा साझा की। रायबरेली के रामविलास पाल ने बताया कि विद्युत दुर्घटना में अपंग होने के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। उन्होंने कहा, “हमारा परिवार कहां जाएगा? हमारी मदद करें।” इसी तरह, चार-पांच अन्य कार्मिकों की दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नियों को भी नौकरी से निकाल दिया गया, जिससे उनके परिवार सड़क पर आ गए।
वेबीनार में बड़ी संख्या में प्रदेशभर के संविदा कार्मिकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि चिलचिलाती धूप, बारिश, ठंड, या कोविड काल में भी उन्होंने कम वेतन में उपभोक्ताओं की सेवा की। लेकिन अब छंटनी के कारण उनके परिवार संकट में हैं।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कार्मिकों का हौसला बढ़ाया और भरोसा दिया कि उनकी बात पावर कॉरपोरेशन के प्रबंधन, ऊर्जा मंत्री, और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा, “संविदा कार्मिकों के साथ हो रहा अन्याय अस्वीकार्य है। अपंग और प्रभावित कार्मिकों को तत्काल नौकरी में बहाल किया जाए। यह छंटनी न केवल कार्मिकों के परिवारों को संकट में डाल रही है, बल्कि विद्युत सेवाओं को भी प्रभावित कर रही है।”
परिषद ने इस तुगलकी फरमान को सरकार की छवि धूमिल करने वाला बताया और कार्मिकों के लिए न्याय की मांग की। यह मामला अब सरकार के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि संविदा कार्मिकों को उनका हक मिल सके।







