लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश की बिजली कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद (यूपीएसईबी) को पुनः बहाल करने की मांग की है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्ष 2000 में यूपीएसईबी को तोड़कर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (यूपीपीसीएल) और चार वितरण कंपनियों में विभाजित किया गया, लेकिन 31 मार्च 2004 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि इस सुधार से न तो परिचालन प्रदर्शन में सुधार हुआ, न ही उपभोक्ता सेवाएँ बेहतर हुईं। इसके बजाय घाटा, ट्रांसमिशन और वितरण हानियाँ बढ़ीं, और प्रबंधन में कुप्रबंधन उजागर हुआ।
वर्मा ने आरोप लगाया कि 1.8 लाख करोड़ रुपये की पैतृक संपत्ति को निजी कंपनियों को बेचना जनता के साथ धोखा है। उन्होंने मांग की कि सभी ऊर्जा निगमों को एकीकृत कर यूपीएसईबी को बहाल किया जाए, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में स्वतः सुधार होगा और बिजली कंपनियाँ आत्मनिर्भर बनेंगी। यह कदम उत्तर प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में देश के लिए एक मिसाल बनाएगा।
उपभोक्ता परिषद ने निजीकरण को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग है। वर्मा ने जोर देकर कहा कि 1959 में गठित यूपीएसईबी को बहाल करने से बेशक ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति आएगी।







