लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों में बिजली वितरण के निजीकरण पर उपभोक्ता परिषद ने कड़ा ऐतराज जताया है। परिषद का कहना है कि जब देश का प्रमुख निजी समूह, अदानी ग्रुप, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के लिए समानांतर बिजली लाइसेंस लेने में अपनी संपत्ति सिद्ध नहीं कर पाया, तो 1.80 लाख करोड़ की बिजली संपत्ति को सस्ते दाम पर बेचने की योजना भविष्य में बड़ा घोटाला बन सकती है।
2023 में विद्युत नियामक आयोग ने अदानी की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें 8 मई को जवाब मांगा गया, मगर मामला आज भी अधर में है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि आयोग ने उन्हें उपभोक्ताओं का पक्ष रखने की अनुमति दी थी, जहां नेटवर्थ पर सवाल उठे।
वर्मा ने सरकार से मांग की कि अदानी की याचिका की जांच कर इस साजिश को रोका जाए, वरना यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार बन सकता है।







