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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    कोरोना का कहर एक युग परिवर्तन की ओर! Part-4

    By May 2, 2020Updated:May 2, 2020 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    अब मौका है सबके पास, देशभक्त कहलाने का।
    घर में ही रहकर सैनिक का कर्तव्य निभाने का।।

     

    • राहुल कुमार गुप्त

    अदृश्य महाशत्रु के साथ महायुद्ध का उत्साह विश्व के कई देशों के साथ भारत में भी कम होता जा रहा है। लोगों में भय भविष्य के लिये भी व्याप्त होता जा रहा है। हमें वर्तमान से लड़ते हुए भविष्य में होने वाले परिवर्तनों पर भी गौर करना पड़ेगा। कोरोना के बाद अब पहले जैसी दुनिया व पहले जैसी दिनचर्या तो नहीं रहेगी, बहुत से परिवर्तन करने पड़ेंगे। हमें भी बुहत बदलना पड़ेगा तभी भविष्य में भी इससे या इस जैसे किसी और अदृश्य महाशत्रु से बचाव संभव हो सकेगा। “कोरोना का कहर एक युग परिवर्तन की ओर!” नामक सीरीज पर हमारे सीनियर कॉपी एडीटर राहुल कुमार गुप्त ने ऑनलाइन कई प्रबुद्ध व चिंतनशील लोगों से सुझाव और विचार साझा किये हैं। यह इस क्रम का चौथा भाग है। इस क्रम में वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक आईपी कुशवाहा जी से ऑनलाईन सुझाव व विचार साझा किये गये हैं।

    वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक: आईपी कुशवाहा

    उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से हमारे देश की जनता ने इस विपदा की घड़ी में धैर्य का परिचय दिया है वो वास्तव में एक बड़ी मिसाल है किन्तु धैर्य आखिर धैर्य होता है उसे यदि वक्त पर परिणाम न मिले तो वो निराशा की गहराईयों में डूबने लगता है। भारत की जनता का धैर्य अभी सधा हुआ है पर वो उत्साह भी नहीं जो पहले था। कुछ देशों में तो वहाँ की जनता ने लॉकडाउन को लेकर विद्रोह भी कर दिया है। जबकि भारत की जनता उन देशों से ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है, तब भी इस विपदा के समय उसने जो साथ दिया है वो धैर्यता का पर्याय जरूर बन गया है। लॉकडाउन किसी की ज़िंदगी का हिस्सा कतई न था लेकिन खुद की व अपनों की ज़िंदगियाँ बचाने के साथ देश को बचाने का भी जिम्मा हम सबका है। इस महायुद्ध में प्रत्येक जनता एक योद्धा की तरह कार्य कर रही है।

    भारत की प्रत्येक जनता इसके लिये वास्तव में नमन की हकदार है। कुछ लोग भ्रमित होकर भले ही इस युद्ध को और पेचीदा बनाने का कार्य कर रहे हैं लेकिन हकीकत समझाने के बाद वो भी इस युद्ध में वीर सैनिक की भाँति कार्य कर सकते हैं। जिस तरह से मीडिया वाले, इस महाविपदा के समय भी मजहब की खाईं बनाते जा रहे हैं उससे भी बहुत से लोगों का हौसला टूटता नज़र आया है। इस दुःखद काल में मीडिया का देश के प्रति यह बहुत ही गैरजिम्मेदाराना रवैया था। इस विपदा पर तो मीडिया को ऐसा करना चाहिए कि सबका हौसला बढ़े, सब मिलजुलकर इस महायुद्ध में भाग लें। जिससे देश से इस अदृश्य महाशत्रु व उससे होने वाली समस्याओं का जल्द ही अंत किया जा सके। बड़े पत्रकार अपने मालिकों के अलावा अपने देश के प्रति भी अपने कर्तव्यों का अनुपालन इस दुःखद वक्त में कर सकते हैं। जिससे भारतीय समाज आपस में नफ़रत की आग से निकलकर बाहर आ सकें। नफ़रत की यह आग लगाने व बढ़ाने के लिये सोशल मीडिया तो लगा ही हुआ है, भ्रामक खबरों को फैलाकर आपस में ही ईर्ष्या व नफ़रत की आग का दरिया रोज तैयार होता है।

    सवर्ण बनाम् पिछड़ा,एसएसी तथा हिंदू बनाम् मुस्लिम। आपको सोशल मीडिया में अब यही देखने को ज्यादा मिलेगा। ऐसे में भारतीय एकता के लिये कौन आगे आयेगा? यही भारतीय एकता ही भारत के प्राण हैं। कोरोना को भगाने के साथ हमें नफ़रत की इस आग को भी बुझाने के लिये एकजुट होना पड़ेगा। भारत, राजनीति से बढ़कर है। किसी की राजनीति को बढ़ावा देने के लिये भारत की आत्मा का विनाश नहीं किया जा सकता है। मीडिया ही जनसंचार का सबसे सहज व विश्वसनीय साधन है, कम से कम इन्हें अपने कर्तव्य, भारत की आत्मा के प्रति तो समझने होंगे।

    “हर तरफ जब आफत और महामारी है, ऐसे में हम भारतीयों के हौसले की बारी है।
    जीतेंगे ये जंग भी हम, क्योंकि बस घर में ही रहकर जो देशभक्ति निभानी है।“

    यह जंग जब विकसित देशों में सहज नहीं है तो भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में कैसे सहज हो सकती है! इसलिये इस जंग को जीतने के लिये इसे सहज बनाने के लिये सबका कर्तव्य है कि सरकार की गाईडलाईन का पालन करते हुए एक-दूसरे का सहयोग जरूर करें। कोरोना के बाद की दुनिया बड़ी बदली हुई होगी और सरकार उसके लिये भी जरूरी गाईडलाईन जारी करेगी। पर हमें तो सोशल डिस्टेंसिंग और सफाई पर अब बहुत ध्यान देना पड़ेगा। प्रतिरक्षा तंत्र के लिये आयर्वेद व होम्योपैथ का सहयोग ले, साथ में खान-पीन का भी ध्यान देना पड़ेगा। कुछ वर्षों के लिये समारोहों व भीड़ वाले इलाकों में जाने से परहेज भी हम सबको करना पड़ेगा। ऑफिसों में भी बहुत से परिवर्तन हो सकते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग, सैनेटाईजर, मास्क का प्रयोग आम हो चलेगा। हाथ मिलाने की परंपरा को दूर कर भारत की नमस्कार परंपरा को ही अपनाना पड़ेगा।

    जनसमस्याओं के लिये आनलाईन वीडियो कान्फ्रेंसिंग को अपनाना बेहतर होगा। डिजिटलाईजेशन को अब परंपरागत करना होगा। दवा आने के बाद भी कुछ महीनों या वर्षों तक बाजार के स्वरूप को भी भीड़-भाड़ से बचाये रखना होगा। सरकार इसके लिये भी जरूर कोई गाईड लाईन बनायेगी। इसी गाईडलाईन का पालन कर कुछ महीने या वर्ष तो हमें बिताने ही होंगे। राजनीतिक दलों के नेता भी रैलियों की बजाय किसी न्यूज चैनल पे आकर या सोशल मीडिया में अपने समर्थकों को संबोधित कर सकते हैं। इसके लिये अपने समर्थकों को पूर्व में जानकारी दी जा सकती है कि इस तारीख को हमारे नेता संबोधित करेंगे। इससे बहुत से प्रत्यक्ष और परोक्ष लाभ भी देखने को मिल सकते हैं। मानव के इस महाशत्रु से बचाव के लिये हमें भी वक्त के साथ बदलना पड़ेगा। हम कह सकते हैं कि हम वाकई एक बड़े परिवर्तन की ओर चल दिये हैं और कितने परिवर्तन होंगे यह वक्त तय करेगा।

    • जारी ……..

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