Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 663 दस्तूर सपनों में ही भ्रमित हुए रही हकीकत दूर आंख खुली तो अस्त व्यस्त सब पहले जैसी भूल।। सम्बल जिनको मान रहे थे वह भी थे मशगूल जो बोया सो काटना जीवन का दस्तूर।। डॉ दिलीप अग्निहोत्री