आवास विकास एलडीए के खाली भुखंडो से निकल घर-घर में घुस सकते हैं सांप और बिच्छू या जहरीले कीट
लखनऊ। रायबरेली रोड पर वृंदावन कालोनी के सेक्टर आठ के एक घर में खड़ी Activa स्कूटर में साँप घुसकर बैठ हुआ था। बच्चा एकटिवा घर के बाहर ले के कुछ दूर गया। तभी उसने मुँह निकालकर जीभ हाथ पर लपलपाई, किशोर बच्चा ने तुरन्त एक्टिवा रोककर फिर आगे का पैनल खोलकर साँप को बाहर निकाला ऐसा सिर्फ वृन्दावन कालोनी में हीं नहीं बल्कि शहर की सभी पाॅस कालोनियों में ऐसा शंका बनीं रहती है इसका मुख्य कारण है कि बरसात में भूमि के अंदर रहने वाले जीवों में एक सांप भी है।
बिलों में पानी भर जाने के कारण बाहर निकल कर पेड़ों और घनी घास युक्त भूमि के अलावा आस पास के घरों और गमलों या बाहर लगाये गये हरे पौधों घरों में खड़े वाहनों में शरण लेते हैं लेकिन इसमें अगर देखा जाए तों सबसे ज्यादा वर्षों से पड़े उन खाली भुखंडो से निकल कर पड़ोस में मकानो में घुसते हैं जिनके बगल के खाली प्लाट जों ज्यादा तर बड़े बड़े उन लोगों के होते हैं।
जिन लोगों भुखंड आंबटित करा के व्यावसायिक दृष्टिकोण से छोड़ रक्खे हैं जिस पर लोगों कूड़ा तों फेंकते हीं है कहीं कहीं तों इसमें अवैध रुप से झुग्गी झोपड़ी डाल बिना कोई शुल्क दिए सरकारी जल सीवर और बिजली का मनमानी दुरपयोग कर सरकार कों क्षति पहुंचाते हैं ।
सूत्रो के अनुसार इसमें लेसा और जल संस्थान के स्थानीय कर्मी भी इनका साथ देते हैं क्योंकि ये उनकी अवैध आय का साधन होता है इसमें सबसे बड़ा दोषी आवास विकास परिषद और लखनऊ विकास प्राधिकरण हैं जों हर ख़ाली पड़े भुखंड से आबंटी से अंत में एक निश्चित निर्धारित कर लेता है जिस देख रेख निगरानी शुल्क कहा जाता है जबकि ये दोनों सरकारी संस्थाओं के अधिकारी कर्मचारी इसमें अपनी ज़रा भी जिम्मेदारी नहीं निभाते। उसी के परिणाम आम निवासियों को भुगतना पड़ता है।
जब ये सरकारी संगठन आबंटी से एक अच्छी खासी रकम एक मुश्त लेते हैं तों तमाम खाली पड़े भुखंडो की निगरानी शुल्क लेने के बाद निगरानी क्यों नहीं करते खाली प्लाटों में उग रहे घास फूस ओर हानिकारक वनस्पतियों की सफाई और कटाई समय समय पर क्यों नहीं कराते ओर इन भुखंडो पर रहने वाले अवैध प्रवासियों जों निशुल्क बिजली जल सीवर का मनमाना उपयोग करने वालो कों हटा कर सरकारी रेवेन्यू कों क्यों नहीं क्षति होने से रोकते।






