डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने अपना स्थापना दिवस मनाया

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डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के स्थापना दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष श्री राम नाईक, श्री थावर चन्द गहलौत केन्द्रीय मंत्री सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, प्रदेश के राज्यमंत्री समग्र ग्राम्य विकास डा0 महेन्द्र सिंह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक के सदस्य श्री इन्द्रेश कुमार, पूर्व मंत्री श्री अशोक बाजपेयी, स्थानीय विधायक श्री सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव, कुलपति प्रो0 निशीथ राय सहित अन्य विद्वतजन व छात्र-छात्रायें उपस्थित थे।
राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी संस्था का स्थापना दिवस अपने आप में महत्वपूर्ण होता है। देश में अनेक राज्य अपना स्थापना दिवस मनाते हैं। उड़िसा दिवस 1 अप्रैल को तथा गुजरात एवं महाराष्ट्र का स्थापना दिवस 1 मई को मनाया जाता है। 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस मनाने के लिये प्रदेश सरकार को सलाह दी थी। प्रसन्नता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर तत्परता से विचार करते हुए उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस 24 जनवरी को मनाने का निर्णय लिया है। इस दृष्टि से सभी विश्वविद्यालयों को अपने स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस आत्म अवलोकन का अवसर होता है, जिसमें अब तक क्या किया है और आगे क्या करेंगे का आंकलन किया जाता है।
श्री नाईक ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने विगत वर्षों में काफी प्रगति की है। इस विश्वविद्यालय में सामान्य एवं दिव्यांग छात्र-छात्राएं एक साथ अध्ययन करते हैं जो सराहनीय है। समावेशी भारत में समावेशी शिक्षा को लेकर कैसे सुधार हो सकता है, का हल चर्चा के माध्यम से निकल सकता है। दिव्यांगजनों में इच्छा शक्ति जगाने का कार्य करें। इच्छा शक्ति के निर्माण से नई दृष्टि विकसित होती है तथा दिव्यांगों में आत्मविश्वास बढ़ता है। राज्यपाल ने चरैवेति का सार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को आगे बढ़ने के लिये चलते रहना चाहिए। जगत वन्दनीय होने के लिये सूर्य की तरह निरन्तर चलते रहें। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिये भावनात्मक जुड़ाव की आवश्यकता होती है।
केन्द्रीय मंत्री श्री थावर चन्द गहलौत ने डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों से अलग है। दिव्यांगों को स्वावलम्बी बनाने के लिये प्रधानमंत्री ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को अधिक जीवन्त और सक्रिय बनाने का काम किया है। विभाग ने दिव्यांगों के सर्वागीण विकास के क्षेत्र में विश्व स्तरीय कीर्तिमान बनाया है। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार डा0 शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यालय को यथा सम्भव सहयोग करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में ब्रेल प्रेस की स्थापना के लिये भारत सरकार को जैसे ही विधिवत् प्रस्ताव प्राप्त होगा तो सरकार गम्भीरता से विचार करेगी।
श्री इन्द्रेश कुमार ने प्रधानमंत्री को दिव्यांग शब्द के प्रयोग के लिये बधाई देते हुए कहा कि विकलांगता अभिशाप नहीं है। दूसरों की मदद करने के लिये आगे आना चाहिए क्योंकि मदद करने का अपना सुख होता है। मदद में दया नहीं कर्तव्य का भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को स्वावलम्बी बनाकर देश को बढ़ाने में सहयोग करने की आवश्यकता है।
प्रो0 निशीथ राय ने आये हुए अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्यपाल की प्रेरणा से डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने स्थापना दिवस मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रगति की आख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में लगभग साढ़े चार हजार छात्र-छात्राएं हैं जिनमें 750 से ज्यादा दिव्यांग विद्यार्थी हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग विद्यार्थी डिग्री के स्तर से पहुंचे, इसलिये विश्वविद्यालय द्वारा अगले सत्र से कक्षा 6 से 12 तक की कक्षाएं भी संचालित की जायेगी।
कार्यक्रम में अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखें तथा सभी अतिथियों का सम्मान स्मृति चिन्ह देकर किया गया। इस अवसर पर सामान्य छात्रों के साथ-साथ दिव्यांग विद्यार्थियों ने सामूहिक तौर पर राष्ट्रगान प्रस्तुत किया।

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