उपभोक्ता परिषद ने प्रधानमंत्री और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की उठाई मांग
लखनऊ 16 , सितम्बर: उपभोक्ता परिषद ने दावा किया कि वर्तमान में विद्युत उत्पादन क्षेत्र के मामले में देश में जो स्थिति पैदा हो रही है उसमें आने वाले समय में निजी क्षेत्र का पूरा बोलबाला स्थापित होने वाला है। इसलिए उपभोक्ता परिषद ने प्रधानमंत्री और ऊर्जा मंत्री के सामने यह मांग रखी है की सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादन इकाइयों को लगाया जाए अन्यथा की स्थिति में ऊर्जा सेक्टर पर निजी घरानों का पूरा कब्जा हो जाएगा। वर्तमान में ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार की 30 जून 2024 को पब्लिक डोमेन में डाली गयी रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश के ऊर्जा सेक्टर में उत्पादन के क्षेत्र में निजी घरानो का 53 प्रतिशत कब्जा हो गया है जो बहुत ही चिंता का विषय है।
पूरे देश में राज्यों में विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दलों में कमी इसीलिए हो पाती है क्योंकि राज्य और केंद्रीय सेक्टर के की उत्पादन इकाइयों से खरीद की जाने वाले बिजली मूल्य में कमी रहती है और वहीं दूसरी तरफ निजी घराने महंगी बिजली बेचकर बिजली दरों में बढोतरी को बढावा देती है।
इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा 31 दिसंबर 2023 की स्थिति के अनुसार पूरे देश में विद्युत उत्पादन की क्षेत्रवार जो अखिल भारतीय कुल स्थापित क्षमता है। वह वर्तमान में 446190 मेगावाट है वही उसमें केंद्रीय सेक्टर की 104453 मेगावाट शामिल है और राज्य सेक्टर की 107671 मेगावाट स्थापित क्षमता शामिल है लेकिन वहीं निजी क्षेत्र में पूरे देश में 234065 मेगावाट की उत्पादन क्षमता शामिल है ऐसे में यह कहना उचित होगा कि निजी क्षेत्र वर्तमान में पूरे देश में कुल स्थापित क्षमता का लगभग 53 प्रतिशत हो गया है उन्हों कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरे देश में वर्तमान में निजी क्षेत्र उत्पादन के क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब निजी क्षेत्र महंगी बिजली बेच करके ना चाह कर भी बिजली दरों में बढोतरी कराएगा इसलिए अभी भी समय है केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। और ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादन इकाइयों को लगाने का काम शुरू करना चाहिए।






