दिलीप अग्निहोत्री
पिछले कई विधानसभा व उपचुनावों में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था। उस समय विपक्ष का उत्साह व जश्न देखते बनता था। क्या मजाल कि उस समय कोई ईवीएम का नाम भी ले। कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल एस की सरकार बनी थी। करीब दो दर्जन विपक्षी पार्टियों के नेता वहां जश्न मनाने पहुंच गए थे। उस समय यही ईवीएम ठीक थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में कांग्रेस को सफलता मिली, ईवीएम ठीक थी, इसके पहले पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी, ईवीएम ठीक ठीक थी, दिल्ली में सत्तर सदस्यीय विधान सभा की तीन को छोड़ कर सभी सीट आम आदमी पार्टी के खाते में चली गई, तब ईवीएम से बढ़िया कोई प्रणाली नहीं थी। लेकिन कहीं भाजपा जीत जाए तो ईवीएम गड़बड़ हो जाती है।मनमोहन सिंह दो बार इसी प्रणाली से प्रधानमंत्री बने, मायावती, अखिलेश यादव को इसी ईवीएम ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का अवसर दिया। चंद्रबाबू नायडू भी इसी व्यवस्था से आज भी मुख्यमंत्री है। पिछले कुछ समय से विपक्ष का ईवीएम राग बन्द था। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद इस विषय पर बोलने का औचित्य भी समाप्त हो गया था। लेकिन इस बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पता नहीं क्यों ईवीएम की गड़बड़ी का राग फिर छेड़ दिया। कई पार्टियां तो जैसे उनकी जुगलबंदी के लिए तैयार बैठी थी। वह भी शामिल हो गई।
बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएंगे। चुनाव आयोग का दावा स्पष्ट है। उसके अनुसार ईवीएम मशीन पूरी तरह से सुरक्षित हैं इसे किसी बाहरी उपकरण से जोड़ा ही नहीं जा सकता चुनाव आयोग सभी पार्टियों को ईवीएम में छेड़छाड़ साबित करने की चुनौती दे चुका है। उसने इसके लिए सभी पार्टियों को आमंत्रित किया। लेकिन तब अपवाद छोड़ कर ऐसे सभी पार्टियां नदारत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कहा था कि पचास प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों का मिलान करना मुश्किल है। फिर भी प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच बूथों के मतों का पर्चियों का मिलान किया जाए।
दो हजार चार में पहली बार आम चुनाव पूरी तरह से ईवीएम से कराए गए। इस बार तो आमचुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद विपक्ष ने ईवीएम राग अलाप दिया। पहले पराजय के बाद इसकी शुरुआत होती थी। लोकतंत्र बचाओ के नाम पर इक्कीस पार्टियों का जमावड़ा चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में हुआ। इसमें ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। पचास प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों का मिलान ईवीएम से करने की मांग की गई।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईवीएम से निकली पर्ची को देखने का समय बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ईवीएम पर लोगों का भरोसा नहीं रह गया है। इस लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्रचिन्ह लग रहे है। वह दिल्ली में जीते थे तब लोकतंत्र मजबूत था। चर्चा है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस बार पहले से ज्यादा कड़ी चुनौती का सामना कर रहे है।
कांग्रेस को अपनी न्याय योजना से क्रांतिकारी परिवर्तन की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया। इस पार्टी ने कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंधवी को चंद्रबाबू नायडू के पीछे चलने के लिए लगाया था। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले चरण के बाद ईवीएम गड़बड़ी का आरोप लगाया था। सपा इस बैठक में शामिल थी। वामपंथी पार्टियां हर जगह से नाउम्मीद हो रही है, वह भी ईवीएम पर निशाना लगाने में पीछे नहीं थी।
इस संबन्ध में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का बयान गौरतलब है। उनका दावा है कि
पारदर्शी व निष्पक्ष चुनाव के लिए ईवीएम से बेहतर दूसरा कोई चुनाव प्रणाली नहीं है। यदि इसमें छेड़छाड़ की गुंजाइश होती तो किसी सरकार को पराजय का सामना नहीं करना पड़ता। ईवीएम पर अंगुली उठाना चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अंगुली उठाना है। पूरी दुनिया भारतीय चुनाव आयोग का विशेष स्थान है।






