मेरे देश में माहौल अब सियासत का गरम है।
ईर्ष्या, नफ़रत और भय का सब ओर आलम है।।
स्वस्थ राजनीति की अब फिर से जरूरत यहाँ है।
पर देश बाद में यहाँ, दल का स्वार्थ ही धरम है।।
सरकारें आयी गयीं पर आमजन का हाल वही है।
नौकरशाही वही है तानाशाही वही है..
सही मायने में तो लोकतंत्र का कहीं नाम नहीं है।।
बस मतदान ही लोकतंत्र का बना पर्याय यहाँ है।
बाकी दिनों अपने हक के लिये लड़ती जनता यहाँ है।।
– राहुल कुमार गुप्त






