लखनऊ, 12 दिसम्बर 2020: ठंडक का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लोगों को गर्म कपड़ा पहनने में कोई कोताही नहीं करनी चाहिए। कान को विशेष रूप से ढककर रखना चाहिए, क्योंकि ठंडक कान से ही प्रवेश करती है। ठंड से बचने के लिए शरीर का तेल मालिश करना भी जरूरी है। आइसक्रीम जैसी ठंड खाद्य पदार्थ सेवन करने से बचें।
ये बातें बीएचयू के पंचकर्म विभाग के विभागध्यक्ष डाक्टर जेपी सिंह ने कही। वहीं कृषि विशेषज्ञ के अनुसार फसलों को ठंड से बचाने के लिए खेत में नमी का रहना जरूरी है।
आयुर्वेदाचार्य ने कहा, कान से ही प्रवेश करता है ठंड, कृषि विशेषज्ञ ने सब्जी की फसलों में नमी बनाए रखने की दी सलाह
आयुर्वेदाचार्य डाक्टर जेपी सिंह ने कहा हमारे शरीर में वैक्ट्रिया हमेशा सुशुप्ता अवस्था में रहते हैं। उन्हें सक्रिय होने के लिए उपयुक्त प्रकृति की जरूरत होती है। जैसे ही वह उपयुक्त प्रकृति पाता है, वैसे ही वह सक्रिय हो जाता है। इसी कारण इम्यूनिटी को बढ़ाने की बात कही गयी है।
उन्होंने बताया कि किसी बीज को पनपने के लिए देश काल ऋतु और जल की जरूरत होती है। यदि हम यहां से सरसों ले जाकर पहाड़ पर डाल दें तो वह नहीं होगा। उसी तरह से गर्मी में गेहूं नहीं उग सकता। यदि जल भी नहीं रहे तो बीज पनप नहीं सकता। वैसे ही हमारे शरीर में हमेशा वैक्ट्रिया रहते हैं। जैसे ही उसको उपयुक्त देश काल मिलने पर वह पनप जाता है। इसी कारण हम इम्यूनिटी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं कि इम्यूनिटी स्ट्रांग होने पर वैक्ट्रिया के लिए उपयुक्त प्रकृति नहीं मिल पायेगा। इससे हम रोग मुक्त रहेंगे।

उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में सूर्य की रोशनी में बैठकर सरसों के तेल का मालिश करना बहुत फायदेमंद होता है। इससे शरीर का तापक्रम बढ़ता है और ठंड से हमारे शरीर की रक्षा करता है। आयुर्वेद में शरीर का मसाज करना लाभप्रद माना गया है।
सीमैप के वैज्ञानिक डाक्टर राजेश वर्मा का कहना है कि वनस्पति को ठंड या पाले से बचाने के लिए खेत में पर्याप्त नमी का रहना जरूरी है। उन्होंने बताया कि खेत में नमी रहने पर ओस को वह कंडेस नहीं होने देता। उसको ऐसे समझा जा सकता है कि ठंड में पानी का तापमान ओस या पाले से ज्यादा होता है। इस कारण नमी वाले खेतों में पाले का असर नहीं पड़ता।
डाक्टर राजेश वर्मा ने बताया कि इस मौसम में आलू व मटर में फंगस की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को दवा का छिड़काव करते रहना चाहिए। ठंड से बचाने के लिए किसान नेट का भी प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिर्च पर ठंड का ज्यादा असर नहीं होता लेकिन आलू व मटर ज्यादा प्रभावित होते हैं।







