पर्यावरण के लिहाज से भी है बेहद सुरक्षित, इको फ्रेंडली कलर से तैयार होती हैं मूर्तियां
ग्लोबल वार्मिंग अलर्ट के चलते अब लोग जागरूक हो रहे हैं ‘अर्थ सेव’ के लिए लोग अब पर्यावरण सुरक्षा सम्बन्धी सभी विकल्प अपना रहे हैं इस बार लोग गणेश उत्सव पर इको फ्रेंडली मूर्तियों की मांग कर रहे हैं।
यह एक अच्छा संकेत है पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर इस बार मूर्तिकार भी इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। मूर्तिकार के अनुसार राजधानी के साथ ही कई जिलों से भी इको फ्रेंडली मूर्तियों के आर्डर मिले हैं। उनका कहना है कि लगभग अब सभी जगह इको फ्रेंडली मूर्तियों की ही मांग है।
चाहे वह ‘गणेश पूजा’ हो या ‘दुर्गा पूजा’ हम मूर्तिकार यही प्रयास करते है कि सारी मूर्तियां इको फ्रेंडली बने। उनका कहना है कि डिमांड इतनी है कि मूर्ति बनाने के लिए कोलकाता से भी कारीगर बुलाए जा रहे हैं। पिछले तीन पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण से जुड़े परिवार का कहना है कि समय के साथ मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी मिलना भी मुश्किल होता जा रहा है हम बाराबंकी से मिटटी मंगाते हैं उन्होंने कहा कि बाराबंकी के रामनगर से 4000 प्रति ट्राली के हिसाब से मिट्टी मंगवाई जाती है जो अब पहले के हिसाब से बहुत मांगी हो गयी है।
देश भर में अब तैयारी गणेश चतुर्थी 2018 की
शास्त्रों के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी 13 सितंबर को है। गणेश चतुर्थी उत्सव 10 दिन तक चलता है, और श्रद्धालु गणपति बप्पा की पूजा करते हैं और गणपति बप्पा का घर में स्वागत करते हैं।
अष्टविनायक का अर्थ होता है 8 गणपति। कहा जाता है कि अष्टविनायक के 8 अति प्राचीन मंदिर है जहां भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमाएं विराजमान हैं। इन 8 मंदिरों का उल्लेख हमारे हिंदू धर्म पवित्र ग्रंथों में भी मिलता है। मान्यता है कि अष्टविनायक दर्शन करने मनोकामना जरूर पूरी होती है।
भगवान गणेश को रिद्धि-सिद्धि और बुद्धि का देवता कहा जाता है। सभी भगवानों को गणेश भगवान को सबसे ऊपर का दर्जा प्राप्त है। इसीलिए हर पूजा व शुभ कार्यों में सर्वप्रथम भगवान गणेश को पूजा जाता है। भगवान गणेश की कृपा पाने वाला त्योहार गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालु सारा साल इंतजार करते हैं। इस बार गणेश चतुर्थी 13 सितंबर 2018 की है और गणेश उत्सव 10 दिन तक यानि कि इस बार 23 सितंबर तक गणेश उत्सव चलेगा।
- नीतू सिंह







