बागेश्वर, 22 सितम्बर 2018: शैलराज हिमालय की गोद में सरयू गोमती के संगम पर बसे पुरातन नगर व कुमाऊं की रक्तहीन क्रान्ति के ऐतिहासिक शहर बागेश्वर में रामलीला का प्रारम्भ शिवलाल साह के प्रयासों से 1890 में हुआ। यहां की रामलीला का मुख्य आकर्षण लव-कुश काण्ड का मंचन होता है।
चम्पावत में 118 वर्ष पुरानी कुमाऊंनी रामलीला का शुभारंभ प्रेमलाल वर्मा द्वारा किया गया। वहीं लोहाघाट में रामलीला की शुरूआत देवीदत्त वकील व चूड़ामणि के प्रयासों से हुई। माॅ कालिका देवी की स्थली गंगोलीहाट में लीला का मंचन 1942 में रायबहादुर पूरनलाल साह की देखरेख में हुआ। कहा जाता है कि अल्मोड़ा के गुलाम उस्ताद ने गंगोलीहाट जाकर वहां की रामलीला को सजाया, संवारा।
पिथौरागढ़ में रामलीला का आयोजन 1897 में देवीदत्त मकडि़या द्वारा किया गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार 1902 में असंख्य दीपों के प्रकाश में गंगाराम पुनेठा व लालू साह के द्वारा किया गया। पिथौरागढ़ की रामलीला में पूर्व में इन्तिया राम हारमोनियम मास्टर व वर्तमान में रामलीला को नए आयाम देने वालों में महेन्द्र सिंह मटियानी प्रमुख नाम हैं। इस रामलीला के कुछ कलाकार ऐसे हैं जिनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है, जिनमें नैन सिंह ऐर (दशरथ), अम्बादत्त (कैकेई), खुदा बख्श (सूर्पनखा), व अकबर हुसैन (रावण) प्रमुख हैं।







