अयोध्या, 22 अक्टूबर 2025 : राम जन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली दीपावली अयोध्या में ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली से पहले देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। अपने संदेश में उन्होंने एक्स पर लिखा, “दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! यह पर्व हर भारतीय के जीवन को सुख, समृद्धि और एकता से रोशन करे। माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा सभी पर बनी रहे।” उन्होंने अयोध्या के दीपोत्सव को “वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर” बताते हुए इसे विश्व मंच पर भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक कहा।

बता दें कि इस वर्ष दीपोत्सव का नौवाँ संस्करण 19 अक्टूबर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया गया, जो दीपावली (20 अक्टूबर 2025) से एक दिन पहले था। सरयू नदी के 55 घाटों पर 28 लाख दीये प्रज्ज्वलित कर तीसरा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। पिछले वर्ष 25 लाख 12 हजार 585 दीयों ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा, 1,500 से अधिक लोगों द्वारा एकसाथ आरती का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने स्वयं दीप प्रज्ज्वलन की शुरुआत की और राम की पैड़ी पर आयोजित भव्य आरती में हिस्सा लिया।
दीपोत्सव में रामायण के सात कांडों पर आधारित 20 झाँकियाँ साकेत महाविद्यालय और पर्यटन विभाग ने तैयार कीं। राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान के किरदारों को हेलीकॉप्टर से लाया गया, जो पुष्पक विमान की प्रतीकात्मकता को जीवंत करता है। नेपाल, थाईलैंड, और इंडोनेशिया के कलाकारों ने यूनेस्को-मान्यता प्राप्त रामलीला का मंचन किया। लेजर और साउंड शो ने रामायण की कथाओं को जीवंत कर पर्यटकों को मंत्रमुग्ध किया। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए वैक्स दीये और ग्रीन पटाखों का उपयोग हुआ।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “अयोध्या अब केवल धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन और आध्यात्मिकता का हब है। डबल इंजन सरकार ने माफिया और बाधाओं को समाप्त कर विकास का मार्ग प्रशस्त किया।” श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर को दीयों और फूलों से सजाया, जो रात 12 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहा। लगभग 35,000 स्वयंसेवकों ने घाटों को सजाने में योगदान दिया।
पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वर्ष अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में 35% की वृद्धि हुई। स्थानीय निवासी रमेश तिवारी ने कहा, “रामलला की वापसी ने अयोध्या को नया जीवन दिया। यह दीपोत्सव हमारी आस्था और गर्व का प्रतीक है।” यह आयोजन अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है।







