वाराणसी में गंगा खतरे के निशान से महज 28 सेमी दूर, मचा हाहाकार
वाराणसी, 29 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है। लगातार भारी बारिश और पड़ोसी राज्यों में डैमों से छोड़े गए पानी के कारण गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे शहर के तटीय इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। चेतावनी बिंदु (70.26 मीटर) को पार कर गंगा का जलस्तर 70.98 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान (71.26 मीटर) से केवल 28 सेंटीमीटर नीचे है। वरुणा और अस्सी नदियों में भी पलट प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे निचले इलाकों में पानी घुसने लगा है।
सरकारी बुलेटिन के अनुसार, शुक्रवार को जलस्तर 71.4 मीटर तक पहुंच सकता है, लेकिन फिलहाल गुरुवार की सुबह स्थिरता के संकेत मिले हैं। हालांकि, घटाव का कोई स्पष्ट संकेत नहीं है, और प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
बाढ़ का कहर: घर डूबे, घाट जलमग्न, पलायन शुरू
घाटों पर संकट: शहर के सभी 84 घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। नमो घाट पर बने नमस्कार स्ट्रक्चर तक पानी पहुंच गया है, जबकि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह प्लेटफॉर्म डूब चुके हैं। अब अंतिम संस्कार छतों या ऊपरी हिस्सों पर हो रहा है, जिससे शव यात्रा में देरी हो रही है। दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती को भी ऊपरी स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है। नाव संचालन पूरी तरह बंद है, और घाटों के बीच संपर्क टूट गया है।
बस्तियों में हाहाकार: वरुणा नदी के किनारे के इलाकों जैसे कोनिया, सलारपुर, सिधवा घाट, ऊंचवा और शैलपुत्री में पानी घुस गया है। कई घर एक मंजिल तक डूब चुके हैं, और सैकड़ों परिवार पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। बड़ौदा क्षेत्र में पटल प्रवाह के कारण बाढ़ ने तबाही मचा दी, जहां गरीब बुनकरों के करघे और मजदूरों के घर प्रभावित हुए हैं। एनडीआरएफ और जल पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है, और बाढ़ राहत शिविरों में हजारों लोग शिफ्ट हो चुके हैं।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर: ढाब क्षेत्र में सब्जी और अन्य फसलें जलमग्न हो गई हैं। 1721 एकड़ से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है, और 6244 किसान प्रभावित हैं। नाविकों और पंडों की आजीविका पर भी गहरा असर पड़ा है, क्योंकि नौका संचालन दो महीनों से बंद है।
सरकारी प्रयास और राहत कार्य :
बता दें कि प्रशासन ने 22 बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं, जहां 60 से अधिक परिवार शरण लिए हुए हैं। एनडीआरएफ और जल पुलिस रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है। डीएम सुरेंद्र कुमार और कमिश्नर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। राहत सामग्री बांटी जा रही है, लेकिन स्थानीय लोग साफ-सफाई और दवा छिड़काव की मांग कर रहे हैं।
बड़ी राहत: बुधवार को चेतावनी बिंदु पार करने के बाद गुरुवार सुबह जलस्तर स्थिर हो गया, जो खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे आ गया। इससे लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश के केन, बेतवा और चंबल डैमों से छोड़े गए 10 लाख क्यूसेक पानी का असर अभी बरकरार है।
आशंका और चेतावनी :
केंद्रीय जल आयोग की बुलेटिन के मुताबिक, शुक्रवार को जलस्तर 71.4 मीटर तक पहुंच सकता है, जो 1978 की ऐतिहासिक बाढ़ के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है। आईआईटी-बीएचयू के नदी विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि गंगा की चौड़ाई और गहराई में कमी (पिछले 30 वर्षों में संकरी हो गई) के कारण बाढ़ समय से पहले आ रही है। जलग्रहण क्षेत्र को मुक्त करने और डिसिल्टिंग की जरूरत बताई गई है।
सीएम योगी का दौरा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शुक्रवार को वाराणसी पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेंगे। उन्होंने पहले ही सभी जिलों को अलर्ट जारी किया है, और 17 जिलों में 768 गांव प्रभावित होने की रिपोर्ट है।
बता दें कि यह बाढ़ पूर्वांचल में मानसून की तीसरी लहर है, जो मध्य प्रदेश और राजस्थान की बारिश से प्रभावित है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि निचले इलाकों से सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट हो जाएं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन अगर बारिश जारी रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं।






