पहली बार काठमांडू में होगा आयोजन: भारत व नेपाल के राजनयिकों समेत कई देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल, समारोह के पूर्व सात पुस्तकों का नेपाली में प्रकाशन होगा
गोरखपुर, 14 सितंबर 2019: गोरखपुर स्थित गीता प्रेस हिन्दू धर्मग्रंथों के प्रकाशन के लिए मशहूर है। देश-विदेश की कई भाषाओं में धार्मिक ग्रंथों को प्रकाशित कर आध्यात्मिक चेतना जगाने वाली इस संस्था अब नेपाली भाषा मे सात ग्रंथों (पुस्तकों) का प्रकाशन करने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं, भारत-नेपाल संबंधों को और परवान चढ़ाने को नेपाल में पहली बार ‘गीता जयंती’ का आयोजन करेगी। इसमें कई देशों के राजनयिकों के शिरकत करने को आमंत्रण भेजा जाएगा।
गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी के मुताबिक गीता जयंती से पूर्व जिन ग्रंथों या पुस्तकों का नेपाली में प्रकाशन होना है, उनमें श्रीमद्भगवत गीता पदच्छेद, अष्टावक्र गीता, संसार का असर कैसे छूटे, प्रश्नोत्तरी शंकराचार्य की, सामाजिक चेतावनी, नारद भक्ति सूत्र व शांडिल्य भक्ति सूत्र शामिल हैं। इन सबके नेपाली भाषा में प्रकाशन का कार्य गीता जयंती (08 दिसंबर) से पूर्व कर लिया जाएगा। बता दें कि गीता प्रेस से प्रकाशित पहला धर्मग्रंथ ‘श्रीमद्भगवत गीता पदच्छेद’ (इसी से प्रकाशन की शुरुआत हुई) भी इनमें शामिल है।
नेपाल में पहली बार मनाई जाएगी ‘गीता जयंती’:
भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने को गीता प्रेस ने इस वर्ष नेपाल के काठमांडू में गीता जयंती मनाने का निर्णय लिया है। नेपाल में पहली बार मनाई जाने वाली गीता जयंती नेपाल के काठमांडू स्थित गीताप्रेस केंद्र में आठ दिसंबर को मनाई जाएगी।
यह भी जानें :
गीता प्रेस की स्थापना वर्ष 1923 में हुई थी। तब से यह हिन्दू धर्म से जुड़े ग्रंथों का प्रकाशन करती आ रही है। गीताप्रेस द्वारा हिन्दू धर्म की सबसे पवित्र धर्मग्रंथ की मान्यता प्राप्त ‘गीता’ सहित सनातन धर्म की पुस्तकों को सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जाता है। नेपाल में हिंदू धर्म के लोगों की बहुलता है। वहां भी घर-घर में धार्मिक पुस्तकें पहुंचाने के लिए गीताप्रेस ने काठमांडू में अपना केंद्र स्थापित किया है। गोरखपुर में गीताप्रेस की स्थापना वर्ष 1923 के बाद से हर वर्ष यहां मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को गीता जयंती मनाई जा रही है। अंग्रेजी तारीख के अनुसार इस वर्ष गीता जयंती आठ दिसंबर को है।
बोले काठमांडू केंद्र प्रबंधक :
काठमांडू स्थित गीता प्रेस केंद्र के प्रबंधक जयकिशन शारदा का कहना है कि गीता जयंती इस वर्ष काठमांडू केंद्र में मनाने की कार्य-योजना पर काम शुरू है। इस आयोजन से न सिर्फ हिन्दू-सनातनी विचारधारा को बल मिलेगा, बल्कि भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूती भी मिलेगी।







