आंकड़ों के मुताबिक इसकी प्रमुख वजह जीएसटी के तहत एकत्र टैक्स में आई गिरावट
नई दिल्ली 28 दिसम्बर। देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को एक जुलाई-2017 से लागू करने के फैसले पर संसद में सवाल उठाया जा चुका है। अब जीएसटी लागू हुए छह महीने बीत चुके हैं। पांचवें और छठे महीने में केन्द्र सरकार की कमाई को तगड़ा झटका लगा है। आंकड़ों के मुताबिक इसकी प्रमुख वजह जीएसटी के तहत एकत्र टैक्स में आई गिरावट है। यानी केंद्र सरकार को जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स से आमदनी की जितनी उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हुई है।

जीएसटी ने घटाई सरकार की कमाई:
जीएसटी लागू होने के बाद अक्टूबर और नवंबर के महीने में केंद्र सरकार की कमाई में कमी आई है। बीते छह महीनों से जीएसटी में हो रहे बदलावों से व्यापारियों में असमंजस पैदा हुआ है। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
कर्ज सहारे मोदी सरकार:
जीएसटी ने आमदनी कम कर दी है, इसलिए सरकार जनवरी के पहले हफ्ते में गिल्ट बॉन्ड के जरिए 18 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले सकती है। वह इस कर्ज के जरिए अपना राजकोषीय घाटा पाटने की कोशिश करेगी, जो मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान टैक्स एकत्र करने और रेवेन्यू पैदा करने के लक्ष्य में विफलता का सूचक है। केन्द्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में डायरेक्ट टैक्स में 20 हजार करोड़ और इनडायरेक्ट टैक्स में 25 से 35 हजार करोड़ की कमी का अनुमान लगाया है। जीएसटी संग्रह में लगातार दूसरे महीने गिरावट आयी और नवंबर में यह घटकर महज 80 हजार 808 करोड़ रुपये रहा। अक्टूबर में यह 83 हजार करोड़ रुपये था।
वादा पूरा नहीं हुआ:
जुलाई में लागू जीएसटी को अहम आर्थिक सुधार कहा गया था। इससे पूरे देश को एकीकृत बाजार में बदला जाना था। वहीं इस सुधार में सबसे अहम पक्ष कारोबार में टैक्स चोरी को रोकना था। लेकिन एक जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद देशभर के सभी कारोबारियों को अपना पूरा कारोबार नए टैक्स प्रणाली के तहत रजिस्टर कराने की जरूरत पड़ी। जीएसटी के तहत किसी भी बड़े कारोबारी को अपने पूरे कारोबार का ब्यौरा नियमित तौर पर केन्द्र सरकार को देना था। सरकार ने जो भी वादे किए थे, वह पूरे नहीं हुए।
जीएसटी पर बार-बार यू-टर्न:
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी में उन उत्पादों पर बड़ी रियायत का एलान जीएसटी काउंसिल से कराया। इसका सीधा ताल्लुक गुजरात के कारोबार से था। जीएसटी काउंसिल ने 7 अक्टूबर को 27 उत्पादों पर टैक्स दर में कटौती का एलान किया। इन उत्पादों में सूरत के कपड़ा उद्योग को राहत पहुंचाने और नायलॉन और पॉलिस्टर समेत खाखरा और नमकीन जैसे खाद्य उत्पादों को राहत दी गई, जिससे विरोध का सुर कमजोर पड़ जाए। वहीं जीएसटी में टैक्स चोरी रोकने के कई कड़े प्रावधान जैसे नियमित कारोबार का पूरा ब्यौरा देना टैक्स विभाग को देना को हल्का कर दिया गया, जिससे कारोबारियों का विरोध खत्म हो जाए।







