हर साल 10000 बच्चे थैलेसीमिया रोग के साथ हो रहे पैदा

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अगली सुनवाई 12 मार्च को

नई दिल्ली, 30 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र थैलेसीमिया के उपचार पर नियमावली तैयार करे। चार सप्ताह में इसे अंतिम रूप दे दिया जाए। अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की गई है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की बेंच ने दीपक कांसल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इसमें अपील की गई थी कि इस रोग का कोई उपचार नहीं है और मरीज को नियमित खून चढ़ाना होता है। उनका कहना था कि भारत इस रोग की राजधानी के तौर पर उभर रहा है।

हर साल 10 हजार बच्चे इस रोग को साथ लेकर पैदा हो रहे हैं। 20 साल की उम्र तक इनमें से 50 फीसद बच्चे असमय मौत का शिकार हो जाते हैं। केंद्र ने अदालत को कहा था कि राज्यों को इस संबंध में किसी तरह का दिशानिर्देश जारी करना तर्क संगत नहीं है। पब्लिक हैल्थ व अस्पताल पूरी तरह से राज्यों का विषय है।

याचिका में कहा कि देश में 40 लाख लोग ऐसे हैं, जो थैलेसीमिया का संक्रमण फैला रहे हैं। 1 लाख लोगों को गहन चिकित्सा की जरूरत है, लेकिन भारत में ऐसी कोई पद्धति नहीं है जिससे रोग पर अंकुश लग सके। गौरतलब है कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है। हीमाग्लोबिन के ज्यादा बनने से यह पैदा होती है। इससे ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में शरीर में नहीं पहुंच पाती और लाल रक्त कणिकाएं खत्म होने लग जाती हैं। शरीर में थैलेसीमिया की वजह से आयरन ज्यादा होने लगता है तो हृदय रोग भी पैदा होने लग जाते हैं।

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