ICON और CII ने रणनीतिक संवाद की मेजबानी की
नई दिल्ली, 19 सितंबर 2025 : भारतीय उद्योग परिसंघ (CII सीआईआई) तेलंगाना के सहयोग से अमेरिकी निर्माण कंपनी आईसीओएन ( ICON ) ने हैदराबाद में अपने पहले कार्यक्रम “फार्मीकॉन” का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का विषय था “अमेरिका में विनिर्माण: आगे का रास्ता।” इसमें उद्योग के प्रमुख नेता, नीति निर्माता और व्यावसायिक हितधारकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने फार्मास्यूटिकल विनिर्माण के बदलते परिदृश्य पर चर्चा की और अमेरिका में कारोबारी विस्तार के अवसरों और चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत श्री संजय सिंह, पूर्व अध्यक्ष, सीआईआई तेलंगाना, और श्री चक्रवर्ती एवीपीएस, संयोजक, सीआईआई तेलंगाना फार्मा और लाइफ साइंसेज पैनल और अध्यक्ष, इकोब्लिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने की। उन्होंने भारतीय कंपनियों के लिए लचीलापन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बदलते भू-राजनीतिक व नियामक माहौल के अनुकूल होने की जरूरत पर जोर दिया। ( ICON & CII Host Strategic Dialogue on Indian Pharma’s )
अपने संबोधन में, आईसीओएन के सीईओ और संस्थापक श्री भूपेंद्र पटेल ने अमेरिका में आधुनिक, नियमों का पालन करने वाली और लागत प्रभावी सुविधाओं के निर्माण में फार्मा और बायोटेक कंपनियों की मदद करने की आईसीओएन की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:”आईसीओएन के पास निर्माण और परियोजना प्रबंधन में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है। हमने 200 स्थानों पर 300 मिलियन डॉलर की परियोजनाएं पूरी की हैं और 10 लाख वर्ग फुट से अधिक सुविधाएं बनाई हैं। हमारा विशेषज्ञता क्षेत्र जीवन विज्ञान तक फैला है, जहां हम बायोफार्मा निर्माण के लिए पूरी प्रक्रिया -जमीन अधिग्रहण से लेकर डिजाइन, निर्माण और परिचालन सहायता तक- के समाधान प्रदान करते हैं।”
तेलंगाना सरकार के तेलंगाना लाइफसाइंसेज के उपाध्यक्ष (नीति और निवेश) श्री वेणुगोपाल राव संकिनेनी ने भी अपने विशेष संबोधन में वैश्विक स्तर पर फार्मा और मेडटेक नवाचार को बढ़ावा देने में तेलंगाना की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण “बदलता परिदृश्य:
भारतीय फार्मा कंपनियों का अमेरिका में विनिर्माण की ओर कदम” नामक श्वेतपत्र का विमोचन था। इसे आईसीओएन और सीआईआई ने हेल्थआर्क के साथ मिलकर तैयार किया था। इस श्वेतपत्र में भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए रणनीतिक आवश्यकताओं, अमेरिकी नीतियों (जैसे आईआरए और बायोसिक्योर एक्ट) के प्रभाव, बायोलॉजिक्स और इंजेक्टेबल्स जैसे क्षेत्रों में अवसरों, और वैश्विक प्रतिस्पर्धी बाजार में भारतीय कंपनियों की स्थिति पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में दो रोचक पैनल चर्चाएं भी हुईं:”अमेरिका में विनिर्माण: आगे का रास्ता” – इसमें अमेरिका में भारतीय फार्मा निवेश के अवसरों, चुनौतियों और दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार-विमर्श हुआ।
“विनिर्माण अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण क्यों” – इस चर्चा में बताया गया कि बदलती भू-राजनीति, अमेरिकी नीतियां और बायोफार्मा निवेश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और विनिर्माण रणनीतियों को कैसे नया रूप दे रहे हैं।
कार्यक्रम का समापन श्री चक्रवर्ती एवीपीएस के सारांश के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य संदेश को दोहराया कि भारतीय फार्मा उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। अमेरिका में सही समय पर विनिर्माण में निवेश से वैश्विक जीवन विज्ञान मूल्य श्रृंखला में विकास, विश्वास और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सकता है।






