वाणिज्यकर विभाग: पैरवी के पत्र लिखवाकर फंस गये हैं अधिकारी, सीएम करेंगे 500 तबादला सूची पर निर्णय

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प्रदेश भर में काम- काज ठप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले वाणिज्य कर विभाग में करीब पांच सौ अधिकारियों की स्थानान्तरण सूची को लेकर अपर सचिव कर एव निबन्धन आर.के तिवारी व कमिश्नर राज्य कर मुकेश मेश्राम के बीच फुटबाल का मैच चल रहा है, जिसकी दर्शक दीर्घा में बैठे करीब पांच सौ वैट अधिकारी अधर में फस गये हैं। दो- दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मिल कर भी इस जटिल मुद्दे पर फैसला नहीं ले पा रहे हैं ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि प्रदेश सरकार को दो दर्जन से अधिक विधायक व मंत्री खींचतान के इस खेल में जोर आजमाइश कर रहे हैं। अब विभाग के अधिकारियों को मुख्यमंत्री ही एक आशा की किरण नजर आ रहे हैं अगर जल्द उन्होंने इस मामले में दखल देते हुए कोई ठोस निर्णय न लिया तो सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होगा। इस ज्वलंत मुद्दे का खुलासा होने के बाद विभाग में हड़कम्प मच गया है।

इस प्रकरण से प्रदेश सरकार की साख लगातार गिर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अधीन आने वाले वाणिज्य कर विभाग में तैनाती को लेकर राजनीतिक दखल व नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, आगरा व मुरादाबाद की विशेष जांच टीम ( एसआईबी) के पदों को हथियाने को लेकर वर्चस्व की लड़ाई होने का यह पहला मामला नहीं है। कहा जाता है इन पदों पर केवल उन्हीं अधिकारियों की ही तैनाती होती है जिनकी पहुंच सीधे शासन में होती है। जिले में जो अधिकारी तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लेते हैं, उनका स्थानान्तरण कर दिया जाता है। अधिकारी जाते भी हैं, लेकिन जुगाडू अधिकारी मनचाहे पदों पर जाने के लिए सालों से तैयारी करते हैं, हालाकि इनकी संख्या बहुत अधिक नहीं होती है। इस साल ये सूची 30 जून को जारी होनी थी, पहली जुलाई से जीएसटी लागू होने के कारण सूची तो नहीं जारी की गयी, लेकिन शासन व मुख्यालय के बीच डिप्टी कमिश्नर से लेकर ज्वाइंट कमिश्नर तक की सूची फुटबाल जरूर बन गयी।

पंचम तल व मुख्यालय के बीच अब तक लगभग चार बार फाइल फेकी जाने के बाद अभी तक यह भी निर्णय नहीं हो पाया है कि इस साल स्थानान्तरण होने हैं या नही होने हैं। बड़ा सवाल ये भी है कि अगर जीएसटी के चलते सूची अभी तक जारी नहीं की जा सकी है तो मुख्यमंत्री का अनुमोदन लेकर या तो इसे टाला जाए या फिर घोषित किया जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।

इस प्रकरण में की जा रही पड़ताल में पता चला है कि सूची न जारी हो पाने का मुख्य कारण मुख्यालय के एडीशनल कमिश्नर ( आईएएस) ऑजनेय कुमार सिंह हैं। ज्वाइंट कमिश्नर( स्थापना) का काम देख रहे सुनील राय ने जो सूची बनाकर भेजी थी उसमें श्री सिंह ने कई बड़े बदलाव कर दिए हैं। इसके बाद कमिश्नर के माध्यम से शासन को जो नाम भेजे गए उनको लेकर अपर सचिव व कमिश्नर के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। भाजपा सरकार बनने के बाद लोगों को उमीद थी कि राजनीतिक दखल कुछ कम होगी, लेकिन दखल कम होने की जगह इस कदर बढ़ गया कि अधिकारियों ने नोएडा,गाजियाबाद, कानपुर के किस पद पर जाना चाहते हैं इस तक की सिफारिश करायी है।

सामान्य रूप से काम करने वाले अधिकारियों का कहना है कि शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है अगर लिस्ट जारी होने में और देर हुई तो बच्चों का स्कूलों में दाखिला तक कठिन हो जाएगा। इस मामले में एडीशनल कमिश्नर ऑजनेय कुमार सिंह का कहना है कि मुख्यालय ने अपना काम पूरा कर लिया है, अब निर्णय शासन स्तर पर होना है। वहीं कमिश्नर वाणिज्य कर मुकेश मेश्राम इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

 सपा सरकार में अधिकारियों की तैनाती में पैरवी होना तो आम बात मानी जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार के विधायक मंत्री तो दो कदम आगे निकल गये। विभाग के रिकार्ड फाइल में लगभग पचास पत्र ऐसे लगे हैं जिनमें अधिकारी को किस शहर में किस पद पर तैनाती दी जानी है यह तक लिखा है। सबसे रोचक बात यह है कि अधिकतर अधिकारियों ने बीमारी का हवाला देते हुए नोएडा व गाजियाबाद में तैनाती मांगी है। आखिर गाजियाबाद,नोएडा की जलवायु में ऐसा क्या है, जहां जाकर अधिकारी फिट हो जाएंगे और उनकी उत्पादकता बढ़ जाएगी। पैरवी के इन पत्रों को लेकर खुलासा किये जाने के बाद अब ऐसे अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं, जिन्होंने ये पत्र लगवाए हैं क्योंकि अगर मुख्यमंत्री ने पैरवी वाले अधिकारियों की सूची तलब कर ली तो गाज गिरना तय माना जा रहा है।

वहीं मुख्यालय में तैनात ज्वाइंट कमिश्नर स्थापना सुनील राय को कार्य मुक्त न किया जाना भी विभाग में चर्चा का विषय है, इनका मई में ही एडीशनल कमिश्नर- ग्रेड-2 के पद पर प्रमोशन हो चुका है और मुरादाबाद जैसे महत्वपूर्ण पद पर स्थानान्तरण भी हो चुका है, लेकिन फिर भी ये ज्वाइंट कमिश्नर ( स्थापना) के पद पर ही काम कर रहे हैं, जबकि इनके साथ में प्रमोश पाए सभी अधिकारी 30 जून तक अपनी नयी तैनाती पर ज्वाइंन भी कर चुके हैं। स्थानान्तरण सूची ज्वाइंट कमिश्नर स्थापना ही तैयार करते हैं लिहाजा पिछले छह माह से अधिकारी इनकी गणोश परिक्रमा कर रहे हैं।

वाणिज्य कर विभाग में स्थानान्तरण सूची को लेकर मचे घमासान के बीच प्रदेश भर में काम- काज पूरी तरह से ठप हो गया है। करीब दौ सौ डिप्टी कमिश्नरों को जनवरी में प्रमोशन देकर ज्वाइंट कमिश्नर बनाया जा चुका है, लेकिन इन अधिकारियों को अभी तक तैनाती नहीं मिल पायी है। लिहाजा ये अधिकारी बिना काम के ही वेतन ले रहे हैं। वहीं करीब 70 फीसद ऐसे अधिकारी हैं,जिनका कार्यकाल एक ही शहर में पूरा हो चुका है और इस सत्र में उनका स्थानान्तरण होना है। अब इन अधिकारियों ने भी काम- काज बंद कर दिया है, अधिकारी दिन भर सूची व उनमें आने वाले नामों को लेकर चर्चा करते हैं। केवल वही अधिकारी जीएसटी के शिविरों में जा रहे हैं जिनकी ड्यूटी लगायी जा रही है। शेष अधिकारी शिविर में जाने से भी बच रहे हैं आलम ये हैं कि अधिकारी अपने कक्षों में झाडू तक नहीं लग वा रहें क्योंकि उन्हें कब कार्यालय छोड़कर जाना पड़े इसका कोई भरोसा नही है।

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