दीक्षान्त में आनन्दी बेन का अभिनव प्रयोग

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के दीक्षांत समारोह गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित हुआ। राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने इसमें एक अभिनव प्रयोग किया। उन्होंने चालीस बच्चों को भी इस समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया था। जिससे वह दीक्षान्त समारोह को देखें, समझें और भविष्य में अच्छा बनने की प्रेरणा लें। आनन्दी बेन का यहां संबोद्धन भी उपाधि लेने वाले चिकित्सकों, विद्यर्थियो और बच्चों के लिए प्रेरणादायक था।
उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले चिकित्सकों को गरीब और कमजोर वर्ग तथा ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों एवं मलिन बस्तियों में स्वास्थ्य कैम्प लगाने का आह्वान किया। चिकित्सक कम से कम दो वर्ष अपनी सेवायें ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदान करें। जो चिकित्सक सुदूरवर्ती गांवों में सेवा नहीं करना चाहते, जो अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिये विदेश जाते हैं उन्हें अपनी मातृभूमि के साथ बंधन बनाये रखना चाहिये। क्योंकि देश ने उनकी शिक्षा पर निवेश किया है।
सामाजिक उत्तरदायित्व को समझते हुये गांव गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायें। स्वस्थ व्यक्ति ही देश के विकास में अपना योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में अनुसंधान पर निरन्तर ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रदेश की जनता इस संस्थान से उच्चकोटि की चिकित्सा सेवाओं की अपेक्षा करती है। चिकित्सा सेवा में मानवीयता के उच्चतम मापदण्ड अपनायें। रोगी के स्वस्थ होने के लिये चिकित्सक का सहृदय होना आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगले तीन वर्षों में पचहत्तर  नये कालेजों के खोलने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने भी प्रदेश में  चौदह नये मेडिकल कालेज खोलने के प्रस्ताव भेजे हैं। नये मेडिकल कालेज खुलने से देश एवं प्रदेश में चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इस निर्णय से उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलेगी।
 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष दो हजार पच्चीस तक भारत को टीबी रोग से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। संस्थान अपने आसपास के गांव को गोद लेकर टीबी मुक्त बनाने के यज्ञ में आहुति दे। दैनिक जीवन में कुछ समय निकालकर सामाजिक सरोकार से संबंधित कार्यों में सहभागी बनें। आसपास के गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिये प्रेरित करें, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखें, स्वच्छता का ध्यान रखें, पौधे रोपित करें, प्लास्टिक का कम प्रयोग करें, पानी का कम से कम प्रयोग कर जल संरक्षण पर ध्यान दें आदि ऐसे अनेक सामाजिक कार्य हैं, जिनको करने से जहां आपको आत्म-संतोष होगा तो वहीं आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण भी उपलब्ध होगा। जब स्वच्छ वातावरण होगा तो बीमारियाँ भी कम होंगी।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने संस्थान की ख्याति बढ़ाने के लिये सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। यहां से कोई मरीज बिना इलाज के नहीं लौटना चहहिये।  चिकित्सक विनम्रता, परोपकार और सदाचार का ध्यान रखें। आम व्यक्ति चिकित्सक को भगवान समझता हैं इस विश्वास को बनाये रखें। दूसरों के हित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। काम के बोझ के बावजूद संवेदनशील बने रहना चाहिए। उपाधि प्राप्त करने वाले चिकित्सक नई तकनीक के आधार पर आम जनता को लाभ पहुंचाने के प्रति सजग रहें।संस्थान प्रतिवर्ष विशिष्ट चिकित्सक तैयार करता है।

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