गर्मी क्यों न बढ़े जब पेड़ों के विनाशक ही हम है?
लखनऊ, 07 अप्रैल 2019: आप जब घर से बाजार कुछ खरीदने निकलते हैं और जब आप बाज़ार पहुंचते हैं तो अचानक ही आप बोल पड़ते हैं कि आज बहुत धूप बहुत है, कही छांव ही नहीं है? दरअसल इन सबके ज़िम्मेदार भी हम सभी हैं।
सीधी बात कहे तो रास्ते के सारे छायादार पेड़ों की जगह अब अतिक्रमण करती बिल्डिंग्स और शॉपिंग माल्स ही दिखती हैं और बाकी रही सही कसर मंहगी -मंहगी गाड़ियों और टैक्सियों ने पूरी कर दी हैं तो छांव मिले कहाँ से?
दरअसल इसके ज़िम्मेदार विकसित पूरी मानव जाति हैं खूबसूरती और दिखावे की शोशेबाज़ी में हम यह भी भूल जाते हैं कि हम विकास के नाम पर पेड़ों को काटकर अपनी प्रकृति से कितनी बड़ी छेड़छाड़ कर रहें हैं। क्या यह ऊंची -ऊंची बिल्डिंग्स हमें अच्छी अक्सीसिजन और पेड़ों की हवादार छांव दे पाएंगे?
..लेकिन यह कदम सराहनीय है:

लेकिन यह कदम सराहनीय है जहां एक पेड़ को बचाने के लिए कुछ लोगों पेड़ को कटने नहीं दिया। बता दें कि यह फोटो लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित मानसरोवर कालोनी के पास स्थित अवध प्लाजा के आसपास की है जहां ‘सेव ट्री’ जैसे शब्दों को सार्थक किया गया।







