संवैधानिक मर्यादा के साथ ही चिरपरिचित सहजता

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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बनने के बाद पहली बार कलराज मिश्र लखनऊ आये थे। उनका यह नागरिक अभिनन्दन किया गया। इसके अलावा राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनको सम्मानित किया। दशकों तक वह यहां की राजनीति में सक्रिय और लोकप्रिय रहे है।
कई बार प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे,प्रदेश कैबिनेट में मंत्री रहे। दो हजार चौदह में देवरिया से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद वह नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। उन्हें हिमाचल के राज्यपाल नियुक्त किया गया।
इसके पहले वह राजनीतिक विषयों पर मुखरता से अपनी बात रखते थे। भाजपा के नेता, कार्यकर्ता सभी उनसे राजनीतिक मामलों में चर्चा करते थे, सलाह लेते थे। लेकिन उनकी अब उनके साथ संवैधानिक मर्यादा जुड़ी हुई था, अब वह किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य नहीं है।
इसलिए संवाद में भी उसी के अनुरूप बदलाव दिखा। लेकिन उनकी सहजता में कहीं कोई बदलाव नहीं हुआ। उनका यह रूप भी लोगों को प्रभावित कर गया।
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री

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